Saturday, 20 August 2016

नीम के उपयोग / Neem medicinal uses

नीम – एक चमत्कारिक औषधि----------------------
नीम एक चमत्कारी वृक्ष माना जाता है। नीम जो प्रायः सर्व सुलभ वृक्ष आसानी से मिल जाता है।
नीम के पेड़ पूरे दक्षिण एशिया में फैले हैं और हमारे जीवन से जुड़े हुए हैं। नीम एक बहुत ही अच्छी वनस्पति है जो कि भारतीय पर्यावरण के अनुकूल है और भारत में बहुतायत में पाया जाता है। भारत में इसके औषधीय गुणों की जानकारी हज़ारों सालों से रही है।
भारत में एक कहावत प्रचलित है कि जिस धरती पर नीम के पेड़ होते हैं, वहाँ मृत्यु और बीमारी कैसे हो सकती है। लेकिन, अब अन्य देश भी इसके गुणों के प्रति जागरूक हो रहे हैं। नीम हमारे लिए अति विशिष्ट व पूजनीय वृक्ष है। नीम को संस्कृत में निम्ब, वनस्पति विज्ञान में ‘आज़ादिरेक्ता- इण्डिका (Azadirecta-indica) अथवा Melia azadirachta कहते है।
गुण
यह वृक्ष अपने औषधि गुण के कारण पारंपरिक इलाज में बहुपयोगी सिद्ध होता आ रहा है। नीम स्वाभाव से कड़वा जरुर होता है, परन्तु इसके औषधीय गुण बड़े ही मीठे होते है। तभी तो नीम के बारे में कहा जाता है की एक नीम और सौ हकीम दोनों बराबर है। इसमें कई तरह के कड़वे परन्तु स्वास्थ्यवर्धक पदार्थ होते है, जिनमे मार्गोसिं, निम्बिडीन, निम्बेस्टेरोल प्रमुख है। नीम के सर्वरोगहारी गुणों से भरा पड़ा है। यह हर्बल ओरगेनिक पेस्टिसाइड साबुन, एंटीसेप्टिक क्रीम, दातुन, मधुमेह नाशक चूर्ण, कोस्मेटिक आदि के रूप में प्रयोग किया जाता है। नीम की छाल में ऐसे गुण होते हैं, जो दाँतों और मसूढ़ों में लगने वाले तरह-तरह के बैक्टीरिया को पनपने नहीं देते हैं, जिससे दाँत स्वस्थ व मज़बूत रहते हैं।
चरक संहिता और सुश्रुत संहिता जैसे प्राचीन चिकित्सा ग्रंथों में इसका उल्लेख मिलता है। इसे ग्रामीण औषधालय का नाम भी दिया गया है। यह पेड़ बीमारियों वगैरह से आज़ाद होता है और उस पर कोई कीड़ा-मकौड़ा नहीं लगता, इसलिए नीम को आज़ाद पेड़ कहा जाता है। भारत में नीम का पेड़ ग्रामीण जीवन का अभिन्न अंग रहा है। लोग इसकी छाया में बैठने का सुख तो उठाते ही हैं, साथ ही इसके पत्तों, निबौलियों, डंडियों और छाल को विभिन्न बीमारियाँ दूर करने के लिए प्रयोग करते हैं। ग्रन्थ में नीम के गुण के बारे में चर्चा इस तरह है :-
निम्ब शीतों लघुग्राही कतुर कोअग्नी वातनुत।
अध्यः श्रमतुटकास ज्वरारुचिक्रिमी प्रणतु ॥
अर्थात नीम शीतल, हल्का, ग्राही पाक में चरपरा, हृदय को प्रिय, अग्नि, वाट, परिश्रम, तृषा, अरुचि, क्रीमी, व्रण, कफ, वामन, कोढ़ और विभिन्न प्रमेह को नष्ट करता है।
घरेलू उपयोग
नीम के वृक्ष की ठंण्डी छाया गर्मी से राहत देती है तो पत्ते फल-फूल, छाल का उपयोग घरेलू रोगों में किया जाता है, नीम के औषधीय गुणों को घरेलू नुस्खों में उपयोग कर स्वस्थ व निरोगी बना जा सकता है। इसका स्वाद तो कड़वा होता है, लेकिन इसके फ़ायदे तो अनेक और बहुत प्रभावशाली हैं और उनमें से कुछ निम्नलिखित हैं :–
• नीम के तेल से मालिश करने से विभिन्न प्रकार के चर्म रोग ठीक हो जाते हैं।
• नीम के तेल का दिया जलाने से मच्छर भाग जाते है और डेंगू , मलेरिया जैसे रोगों से बचाव होता है
• नीम की दातुन करने से दांत व मसूढे मज़बूत होते है और दांतों में कीडा नहीं लगता है, तथा मुंह से दुर्गंध आना बंद हो जाता है।
• इसमें दोगुना पिसा सेंधा नमक मिलाकर मंजन करने से पायरिया, दांत-दाढ़ का दर्द आदि दूर हो जाता है।
• नीम की कोपलों को पानी में उबालकर कुल्ले करने से दाँतों का दर्द जाता रहता है।
• नीम की पत्तियां चबाने से रक्त शोधन होता है और त्वचा विकार रहित और चमकदार होती है।
• नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर और पानी ठंडा करके उस पानी से नहाने से चर्म विकार दूर होते हैं, और ये ख़ासतौर से चेचक के उपचार में सहायक है और उसके विषाणु को फैलने न देने में सहायक है।
• चेचक होने पर रोगी को नीम की पत्तियों बिछाकर उस पर लिटाएं।
• नीम की छाल के काढे में धनिया और सौंठ का चूर्ण मिलाकर पीने से मलेरिया रोग में जल्दी लाभ होता है।
• नीम मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों को दूर रखने में अत्यन्त सहायक है। जिस वातावरण में नीम के पेड़ रहते हैं, वहाँ मलेरिया नहीं फैलता है। नीम के पत्ते जलाकर रात को धुआं करने से मच्छर नष्ट हो जाते हैं और विषम ज्वर (मलेरिया) से बचाव होता है।
• नीम के फल (छोटा सा) और उसकी पत्तियों से निकाले गये तेल से मालिश की जाये तो शरीर के लिये अच्छा रहता है।
• नीम के द्वारा बनाया गया लेप वालों में लगाने से बाल स्वस्थ रहते हैं और कम झड़ते हैं।
• नीम और बेर के पत्तों को पानी में उबालें, ठंण्डा होने पर इससे बाल, धोयें स्नान करें कुछ दिनों तक प्रयोग करने से बाल झडने बन्द हो जायेगें व बाल काले व मज़बूत रहेंगें।
• नीम की पत्तियों के रस को आंखों में डालने से आंख आने की बीमारी (कंजेक्टिवाइटिस) समाप्त हो जाती है।
• नीम की पत्तियों के रस और शहद को 2:1 के अनुपात में पीने से पीलिया में फ़ायदा होता है, और इसको कान में डालने कान के विकारों में भी फ़ायदा होता है।
• नीम के तेल की 5-10 बूंदों को सोते समय दूध में डालकर पीने से ज़्यादा पसीना आने और जलन होने सम्बन्धी विकारों में बहुत फ़ायदा होता है।
• नीम के बीजों के चूर्ण को ख़ाली पेट गुनगुने पानी के साथ लेने से बवासीर में काफ़ी फ़ायदा होता है।
• नीम की निम्बोली का चूर्ण बनाकर एक-दो ग्राम रात को गुनगुने पानी से लें कुछ दिनों तक नियमित प्रयोग करने से कब्ज रोग नहीं होता है एवं आंतें मज़बूत बनती है।
• गर्मियों में लू लग जाने पर नीम के बारीक पंचांग (फूल, फल, पत्तियां, छाल एवं जड) चूर्ण को पानी मे मिलाकर पीने से लू का प्रभाव शांत हो जाता है।
• बिच्छू के काटने पर नीम के पत्ते मसल कर काटे गये स्थान पर लगाने से जलन नहीं होती है और ज़हर का असर कम हो जाता है।
• नीम के 25 ग्राम तेल में थोडा सा कपूर मिलाकर रखें यह तेल फोडा-फुंसी, घाव आदि में उपयोग रहता है।
• गठिया की सूजन पर नीम के तेल की मालिश करें।
• नीम के पत्ते कीढ़े मारते हैं, इसलिये पत्तों को अनाज, कपड़ों में रखते हैं।
• नीम की 20 पत्तियाँ पीसकर एक कप पानी में मिलाकर पिलाने से हैजा़ ठीक हो जाता है।
• निबोरी नीम का फल होता है, इससे तेल निकला जाता है। आग से जले घाव में इसका तेल लगाने से घाव बहुत जल्दी भर जाता है।
• नीम का फूल तथा निबोरियाँ खाने से पेट के रोग नहीं होते।
• नीम की जड़ को पानी में उबालकर पीने से बुखार दूर हो जाता है।
• छाल को जलाकर उसकी राख में तुलसी के पत्तों का रस मिलाकर लगाने से दाग़ तथा अन्य चर्म रोग ठीक होते हैं।
• विदेशों में नीम को एक ऐसे पेड़ के रूप में पेश किया जा रहा है, जो मधुमेह से लेकर एड्स, कैंसर और न जाने किस-किस तरह की बीमारियों का इलाज कर सकता है।
नीम के उपयोग से लाखों लोगों को रोजगार मिलता है, आप सभी से निवेदन है कि आप नीम जैसी औषधि का अपने घर में जरूर प्रयोग करे और देश के विकास में सहयोग दे और स्वस्थ भारत और प्रगतिशील भारत का निर्माण करे और अपने धन को विदेशी कम्पनियों के पास जाने से रोक !

कलौंजी का आयुर्वेद उपयोग / Nigella sativa medicinal (Ayurveda) uses





कलौंजी लगाएं, सर पर लहलहाते बाल वापस पाएं

महिलाएं ही क्या पुरुष भी आम तौर पर अपने बालों को लेकर काफी चिंतित रहते हैं, आज की आधुनिक शैली और आधुनिक प्रोडक्ट्स ने हमारे शरीर को फायदा पहुंचाने के बजाय नुक्सान ही पहुंचाया है. बहुत कम लोग जानते हैं कि हमारे आसपास ऐसी बहुत सारी चीजें हैं, जिन्हें सही तरीके से खाकर सुन्दर त्वचा, बालों से लेकर अच्छी सेहत का फायदा उठाया जा सकता है.
इन्हीं में शामिल है कलौंजी जिसमें बहुत सारे मिनरल्स और न्यूट्रिएंट्स होते हैं. आयरन, सोडियम, कैल्शियम, पोटैशियम और फाइबर से भरपूर कलौंजी कई प्रकार के रोगों का घर बैठे इलाज है. लगभग 15 एमीनो एसिड वाला कलौंजी शरीर के लिए जरूरी प्रोटीन की कमी भी पूरी करता है.
बालों को लाभ
कलौंजी के लाभ में से सबसे बड़ा लाभ बालों को होता है. अनहेल्दी लाइफस्टाइल, स्ट्रेस जैसी कई समस्याओं से महिला हो या पुरुष, दोनों के ही साथ बालों के गिरने की समस्या आम हो चुकी है. इसके लिए तमाम तरह के ट्रीटमेंट कराने पर भी फायदा नहीं होता. लेकिन घर में मौजूद कलौंजी इस समस्या के निपटारे में बहुत ही कारगर उपाय है. सिर पर 20 मिनट तक नींबू के रस से मसाज करें और फिर अच्छे से धो लें. इसके बाद कलौंजी का तेल बालों में लगाकर उसे अच्छे से सूखने दें. लगातार 15 दिनों तक इसका इस्तेमाल बालों के गिरने की समस्या को दूर करता है.
कलौंजी ऑयल, ऑलिव ऑयल और मेहंदी पाउडर को मिलाकर हल्का गर्म करें. ठंडा होने दें और हफ्ते में एक बार इसका इस्तेमाल करें. इससे गंजेपन की समस्या भी दूर होती है.
कलौंजी की राख को तेल में मिलाकर गंजे अपने सर पर मालिश करें कुछ दिनों में नए बाल पैदा होने लगेंगे. इस प्रयोग में धैर्य महत्वपूर्ण है.

कलौंजी के अन्य लाभ

डायबिटीज से बचाता है, पिंपल की समस्या दूर, मेमोरी पावर बढ़ाता है, सिरदर्द करे दूर, अस्थमा का इलाज, जोड़ों के दर्द में आराम, आंखों की रोशनी, कैंसर से बचाव, ब्लड प्रेशर करे कंट्रोल.
कलौंजी एक बेहद उपयोगी मसाला है. इसका प्रयोग विभिन्न व्यंजनों जैसे दालों, सब्जियों, नान, ब्रेड, केक और आचार आदि में किया जाता है.
कलौंजी की सब्जी भी बनाई जाती है.
कलौंजी में एंटी-आक्सीडेंट भी मौजूद होता है जो कैंसर जैसी बीमारी से बचाता है.
कलौंजी का तेल कफ को नष्ट करने वाला और रक्तवाहिनी नाड़ियों को साफ़ करने वाला होता है. इसके अलावा यह खून में मौजूद दूषित व
अनावश्यक द्रव्य को भी दूर रखता है. कलौंजी का तेल सुबह ख़ाली पेट और रात को सोते समय लेने से बहुत से रोग समाप्त होते हैं. गर्भावस्था के समय स्त्री को कलौंजी के तेल का उपयोग नहीं कराना चाहिए इससे गर्भपात होने की सम्भावना रहती है.
कलौंजी का तेल बनाने के लिए 50 ग्राम कलौंजी पीसकर ढाई किलो पानी में उबालें. उबलते-उबलते जब यह केवल एक किलो पानी रह जाए तो इसे
ठंडा होने दें. कलौंजी को पानी में गर्म करने पर इसका तेल निकलकर पानी के ऊपर तैरने लगता है. इस तेल पर हाथ फेरकर तब तक कटोरी में पोछें जब तक पानी के ऊपर तैरता हुआ तेल खत्म न हो जाए. फिर इस तेल को छानकर शीशी में भर लें और इसका प्रयोग औषधि के रूप में करें.
आयुर्वेद कहता है कि इसके बीजों की ताकत सात साल तक नष्ट नहीं होती. दमा, खांसी, एलर्जीः एक कप गर्म पानी में एक चम्मच शहद तथा आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह निराहार (भोजन से पूर्व) पी लेना चाहिए, फिर रात में भोजन के बाद उसी प्रकार आधा चम्मच कलौंजी और एक चम्मच शहद गर्म पानी में मिलाकर इस मिश्रण का सेवन कर लेना चाहिए. इस प्रकार 40 दिनों तक प्रतिदिन दो बार पिया जाए. सर्दी के ठंडे पदार्थ वर्जित हैं.

मधुमेहः


 एक कप काली चाय में आधा चाय का चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह नाश्ते से पहले पी लेना चाहिए. फिर रात को भोजन के पश्चात सोने से पहले एक कप चाय में एक चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर पी लेना चाहिए. चिकनाई वाले पदार्थों के उपयोग से बचें. इस इलाज के साथ अंगे्रजी दवा का उपयोग होता है तो उसे जारी रखें और बीस दिनों के पश्चात शर्करा की जांच करा लें. यदि शक्कर नार्मल हो गई हो तो अंग्रेजी दवा बंद कर दें, किंतु कलौंजी का सेवन करते रहें.
हृदय रोगः 

एक कप दूध में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर प्रतिदिन दो बार प्रयोग करें. इस तरह दस दिनों तक उपचार चलता रहे. चिकनाई वाले पदार्थों का सेवन न करें.


नेत्र रोगों की चिकित्साः 


नेत्रों की लाली, मोतियाबिंद, आंखों से पानी का जाना, आंखों की तकलीफ और आंखों की नसों का कमजोर होना आदि में एक कप गाजर के जूस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल दो चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो बार सुबह (निराहार) और रात में सोते समय लेना चाहिए. इस प्रकार 40 दिनों तक इलाज जारी रखें. नेत्रों को धूप की गर्मी से बचाएं.

अपच या पेट दर्द में आप कलौंजी का काढा बनाइये फिर उसमे काला नमक मिलाकर सुबह शाम पीजिये. दो दिन में ही आराम देखिये.

कैंसर के उपचार में कलौजी के तेल की आधी बड़ी चम्मच को एक ग्लास अंगूर के रस में मिलाकर दिन में तीन बार लें.

हृदय रोग, ब्लड प्रेशर और हृदय की धमनियों का अवरोध के लिए जब भी कोई गर्म पेय लें, उसमें एक छोटी चम्मच तेल मिला कर लें.

सफेद दाग और लेप्रोसीः 15 दिन तक रोज पहले सेब का सिरका मलें, फिर कलौंजी का तेल मलें.

एक चाय की प्याली में एक बड़ी चम्मच कलौंजी का तेल डाल कर लेने से मन शांत हो जाता है और तनाव के सारे लक्षण ठीक हो जाते हैं.
कलौंजी के तेल को हल्का गर्म करके जहां दर्द हो वहां मालिश करें और एक बड़ी चम्मच तेल दिन में तीन बार लें. 15 दिन में बहुत आराम मिलेगा.
एक बड़ी चम्मच कलौंजी के तेल को एक बड़ी चम्मच शहद के साथ रोज सुबह लें, आप तंदुरूस्त रहेंगे और कभी बीमार नहीं होंगे; स्वस्थ और निरोग रहेंगे .
याददाश्त बढाने के लिए और मानसिक चेतना के लिए एक छोटी चम्मच कलौंजी का तेल 100 ग्राम उबले हुए पुदीने के साथ सेवन करें.
पथरी हो तो कलौंजी को पीस कर पानी में मिलाइए फिर उसमे शहद मिलाकर पीजिये, १०-११ दिन प्रयोग करके टेस्ट करा लीजिये.कम न हुई हो तो फिर १०-११ दिन पीजिये.
अगर गर्भवती के पेट में बच्चा मर गया है तो उसे कलौंजी उबाल कर पिला दीजिये, बच्चा निकल जायेगा.और गर्भाशय भी साफ़ हो जाएगा.
किसी को बार-बार हिचकी आ रही हो तो कलौंजी के चुटकी भर पावडर को ज़रा से शहद में मिलकर चटा दीजिये.
अगर किसी को पागल कुत्ते ने काट लिया हो तो आधा चम्मच से थोडा कम करीब तीन ग्राम कलौंजी को पानी में पीस कर पिला दीजिये, एक दिन
में एक ही बार ३-४ दिन करे.
जुकाम परेशान कर रहा हो तो इसके बीजों को गरम कीजिए ,मलमल के कपडे में बांधिए और सूंघते रहिये.
दो दिन में ही जुकाम और सर दर्द दोनों गायब . कलौंजी की राख को पानी से निगलने से बवासीर में बहुत लाभ होता है.
कलौंजी का उपयोग चर्म रोग की दवा बनाने में भी होता है. कलौंजी को पीस कर सिरके में मिलकर पेस्ट बनाए और मस्सों पर लगा लीजिये. मस्से कट जायेंगे. मुंहासे दूर करने के लिए कलौंजी और सिरके का पेस्ट रात में मुंह पर लगा कर सो जाएँ.
जब सर्दी के मौसम में सर दर्द सताए तो कलौंजी और जीरे की चटनी पीसिये और मस्तक पर लेप कर लीजिये.
घर में कुछ ज्यादा ही कीड़े-मकोड़े निकल रहे हों तो कलौंजी के बीजों का धुँआ कर दीजिये.
गैस/पेट फूलने की समस्या --50 ग्राम जीरा, 25 ग्राम अजवायन, 15 ग्राम कलौंजी अलग-अलग भून कर पीस लें और उन्हें एक साथ मिला दें. अब 1 से 2 चम्मच मीठा सोडा, 1 चम्मच सेंधा नमक तथा 2 ग्राम हींग शुद्ध घी में पका कर पीस लें. सबका मिश्रण तैयार कर लें. गुनगुने पानी की सहायता से 1 या आधा चम्मच खाएं.
महिलाओं को अपने यूट्रस (बच्चेदानी) को सेहतमंद बनाने के लिए डिलीवरी के बाद कलौंजी का काढा ४ दिनों तक जरूर पी लेना चाहिए. काढ़ा बनाने के लिए दस ग्राम कलौंजी के दाने एक गिलास पानी में भिगायें, फिर २४ घंटे बाद उसे धीमी आंच पर उबाल कर आधा कर लीजिये. फिर उसको ठंडा करके पी जाइये, साथ ही नाश्ते में पचीस ग्राम मक्खन जरूर खा लीजियेगा. जितने दिन ये काढ़ा पीना है उतने दिन मक्खन जरूर खाना है.
आपको अगर बार बार बुखार आ रहा है अर्थात दवा खाने से उतर जा रहा है फिर चढ़ जा रहा है तो कलौंजी को पीस कर चूर्ण बना लीजिये फिर उसमे गुड मिला कर सामान्य लड्डू के आकार के लड्डू बना लीजिये. रोज एक लड्डू खाना है ५ दिनों तक , बुखार तो पहले दिन के बाद
दुबारा चढ़ने का नाम नहीं लेगा पर आप ५ दिन तक लड्डू खाते रहिएगा, यही काम मलेरिया बुखार में भी कर सकते हैं.
ऊनी कपड़ों को रखते समय उसमें कुछ दाने कलौंजी के डाल दीजिये,कीड़े नहीं लगेंगे.
भैषज्य रत्नावली कहती है कि अगर कलौंजी को जैतून के तेल के साथ सुबह सवेरे खाएं तो रंग एकदम लाल सुर्ख हो जाता है. चेहरे को सुन्दर व आकर्षक बनाने के लिए कलौंजी के तेल में थोड़ा सा जैतून का तेल मिलाकर चेहरे पर लगाएं और थोड़ी देर बाद चेहरा धो लें. इससे चेहरे के दाग़-धब्बे दूर होते हैं.
नोट : यूं तो ये सारे उपाय आयुर्वेद की किताब से लिए गए हैं और नुक्सान होने की आशंका नगण्य है फिर भी कोई भी उपचार अपनाने से पहले घर के बुजुर्गों की सलाह अवश्य लें, क्योंकि हर शरीर की तासीर अलग होती है, जिससे शरीर कोई विपरीत प्रतिक्रया भी दे सकता है.

Saturday, 6 August 2016

डेंगू का होम्योपैथी इलाज / Homeopathy treatment of dengue

किसी को डेगूँ या साधारण बुखार के कारण प्लेटलेट्स कम हो गयी है तो एक होमोपेथिक दवा है।

EUPATORIUM PERFOIAM 200
liquid dilution homeopathic medicine.

इसकी 3 या 4 बूँदें प्रत्येक 2-2 घँटें में साधारण पानी में ड़ाल कर मात्र 2 दिन पिलायें । प्लेटलेट्स कम नहीं होगीं।

हरसिंगार का उपयोग / Harsingar / Raat ki Rani / Jaismine / Nyctanthes arbor-tristis Medicinal Uses




🌻 *हरसिंगार का पौधा* 🌻

हरसिंगार एक उपयोगी सुगन्धित फूल देने वाला और विभिन्न रोगों में काम आने वाला पौधा है, जिस जगह हरसिंगार लगा होता है उस स्थान से 100 मीटर क्षेत्र में खुशबु तो आती ही है नकारात्मक ऊर्जा भी समाप्त होती है।
इसीलिए प्राचीन ग्रंथों में इसे *हरि का श्रृंगार* नाम से संबोधित किया गया है।
बिभिन्न रोगों में इसके फायदे आज देखिये:
*शारीरिक विकास में हरसिंगार का प्रयोग* :
इसके फूलों को छाया में सुखाकर पावडर कर लीजिये, आधा चम्मच पाउडर में मिश्री मिलाकर खाली पेट लीजिए शारीरिक शक्ति का विकास होगा .
*जोड़ों के दर्द में हरसिंगार के प्रयोग :*
जोड़ों का दर्द होने पर इसके पत्तों और छाल का काढ़ा पीजिए . 5-6 पत्ते और थोड़ी छाल को 400 ग्राम पानी लेकर धीमी आंच पर पकाएं . जब एक तिहाई रह जाए तो खाली पेट पीयें .
*खांसी में हरसिंगार के प्रयोग :* इसकी दो पत्तियां +एक फूल + 5 तुलसी के पत्ते !  ये सब लेकर इसको एक गिलास पानी में उबालें और चाय की तरह पी लें . इससे पेट का जमा हुआ मल भी निकल जाएगा .
*पेट में कीड़े में हरसिंगार के प्रयोग :*
5-6  पत्तों का रस लें .छोटा बच्चा है तो एक चम्मच और बड़ा व्यक्ति है तो दो चम्मच . सुबह खाली पेट थोडा पानी और चीनी मिलाकर लें . साल में कभी-कभी यह रस ले लें तो पेट में कीड़े होंगे ही नहीं .
*पुराने टाइफाइड बुखार में हरसिंगार के प्रयोग :*
 पुराना टाइफाइड बुखार हो या शरीर की टूटन हो तो , इसकी तीन ग्राम छाल +दो पत्तियां +3-4 तुलसी की पत्तियां पानी में उबालकर सुबह शाम लें .
*साइटिका (Sciatica) की बीमारी में हरसिंगार के प्रयोग :*
Sciatica का तो इलाज ही यह पेड़ है . इसके दो तीन बड़े पत्तों को पीस कर उनका काढ़ा सवेरे शाम खाली पेट पीयें .
*बवासीर में हरसिंगार के प्रयोग*:
बवासीर के लिए इसके बीज रामबाण औषधि की तरह काम करते हैं। इसके एक बीज का सेवन प्रतिदिन करने से बवासीर ठीक हो जाता है।
या
हरसिंगार के बीज 10 ग्राम तथा कालीमिर्च 3 ग्राम को मिलाकर पीस लें और चने के बराबर आकार की गोलियां बनाकर खायें। रोजाना 1-1 गोली गुनगुने जल के साथ सुबह-शाम खाने से बवासीर ठीक होती है। यदि गुदाद्वार में सूजन या मस्से की समस्‍या है तो हरसिंगार के बीजों का लेप बनाकर गुदे पर लगाने से लाभ मिलता है।
*इस उपयोगी पौधे को अपने घर की फुलवारी में ज़रूर लगाएं*

मोटापे दूर करने के नुस्खे / Ayurveda Method to reduce weight


पेट और वजन कम करने के 15 सबसे बेहतरीन उपाय।-
पेट और वजन या यूँ कहे के मोटापा घटाने के लिए खान-पान में सुधार जरूरी है। कुछ प्राकृतिक चीजें ऐसी हैं, जिनके सेवन से वजन नियंत्रित रहता है। इसलिए यदि आप वजन कम करने के लिए बहुत मेहनत नहीं कर पाते हैं तो अपनाएं यहां बताए गए छोटे-छोटे उपाय। ये आपके बढ़ते वजन को कम कर देंगे।
1) सब्जियों और फलों में कैलोरी कम होती है, इसलिए इनका सेवन अधिक मात्रा में करें। केला और चीकू न खाएं। इनसे मोटापा बढ़ता है। पुदीने की चाय बनाकर पीने से मोटापा कम होता है।
2) खाने के साथ टमाटर और प्याज का सलाद काली मिर्च व नमक डालकर खाएं। इनसे शरीर को विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन के, आयरन, पोटैशियम, लाइकोपीन और ल्यूटिन मिलेगा। इन्हें खाने के बाद खाने से पेट जल्दी भर जाएगा और वजन नियंत्रित हो जाएगा।
3) पपीता नियमित रूप से खाएं। यह हर सीजन में मिल जाता है। लंबे समय तक पपीता के सेवन से कमर की अतिरिक्त चर्बी कम होती है।
4) दही का सेवन करने से शरीर की फालतू चर्बी घट जाती है। छाछ का भी सेवन दिन में दो-तीन बार करें।
5) छोटी पीपल का बारीक चूर्ण पीसकर उसे कपड़े से छान लें। यह चूर्ण तीन ग्राम रोजाना सुबह के समय छाछ के साथ लेने से बाहर निकला हुआ पेट अंदर हो जाता है।
6) आंवले व हल्दी को बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को छाछ के साथ लें। कमर एकदम पतली हो जाएगी।
7) मोटापा कम नहीं हो रहा हो तो खाने में कटी हुई हरी मिर्च या काली मिर्च को शामिल करके बढ़ते वजन पर काबू पाया जा सकता है। एक रिसर्च में पाया गया कि वजन कम करने का सबसे बेहतरीन तरीका मिर्च खाना है। मिर्च में पाए जाने वाले तत्व कैप्साइसिन से भूख कम होती है। इससे ऊर्जा की खपत भी बढ़ जाती है, जिससे वजन कंट्रोल में रहता है।
8) दो बड़े चम्मच मूली के रस में शहद मिलाकर बराबर मात्रा में पानी के साथ पिएं। ऐसा करने से 1 माह के बाद मोटापा कम होने लगेगा।
9) मालती की जड़ को पीसकर शहद मिलाकर खाएं और छाछ पिएं। प्रसव के बाद होने वाले मोटापे में यह रामबाण की तरह काम करता है।
10) रोज सुबह-सुबह एक गिलास ठंडे पानी में दो चम्मच शहद मिलाकर पिएं। इस घोल को पीने से शरीर से वसा की मात्रा कम होती है।
11) ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाली वस्तुओं से परहेज करें। ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाली वस्तुओं से परहेज करें। शक्कर, आलू और चावल में अधिक कार्बोहाइड्रेट होता है। ये चर्बी बढ़ाते हैं।
12) केवल गेहूं के आटे की रोटी की बजाय गेहूं, सोयाबीन और चने के मिश्रित आटे की रोटी ज्यादा फायदेमंद है।
13) रोज पत्तागोभी का जूस पिएं। पत्तागोभी में चर्बी घटाने के गुण होते हैं। इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म सही रहता है।
14) एक चम्मच पुदीना रस को 2 चम्मच शहद में मिलाकर लेते रहने से मोटापा कम होता है।
15) सुबह उठते ही 250 ग्राम टमाटर का रस 2-3 महीने तक पीने से वसा में कमी होती है।
Weight Loss वजन कम करने के आसान घरेलू उपाय - Only Ayurved
वजन कम करने के कुछ आसान घरेलू उपाय
Weight Loss Home Remedies
अपने बढ़ते वजन पर ब्रेक लगाने के लिए आप क्या-क्या करते हैं? जिम में घंटों कसरत करते हैं, तरह-तरह के वेट लॉस पैकेज लेते हैं या फिर डाइटिंग के चक्कर में अपनी भूख मारते रहते हैं? हमारे पास आपके लिए कुछ ऐसे आसान घरेलू उपाय हैं जिन्हें आप अपने रुटीन में शामिल करके वजन पर नियंत्रण तो कर ही सकते हैं, साथ ही आपकी जेब भी ढीली नहीं होगी।
1. गर्म पानी के साथ शहद
रोजाना सुबह खाली पेट गर्म पानी के साथ शहद पीने से वजन घटाने में बहुत आसानी होती है। इससे शरीर में शुगर का लेवल मेनटेन रहता है और त्वचा भी दमकती है।
2. नींबू पानी
वजन घटाने के लिए रोज सुबह खाली पेट नींबू पानी का सेवन भी एक कारगर उपाय है। सर्दियों में जिन्हें ठंड या साइनस की समस्या है वे पानी को गुनगुना करके उसमें नींबू डालकर ‌पी सकते हैं।
3. टमाटर-दही का शेक
एक कप टमाटर के जूस में एक कप दही (फैट फ्री), आधा चम्मच नींबू का रस, बारीक कटा अदरक, काली मिर्च व स्वादानुसार नमक मिलाकर ब्लेंड कर लें। रोज एक ग्लास इस शेक को पीने से आपका वजन तेजी से गिरेगा।
4. खूब पानी पिएं
दिन में आठ से नौ ग्लास पानी पीने से भी वेट कम करने में मदद मिलती है। कई शोधों में माना गया है कि दिन में आठ से नौ ग्लास पानी से 200 से 250 कैलोरी आप बर्न कर सकते हैं।
5. ग्रीन टी
युनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं ने अपने शोध में माना की ग्रीन टी में विशेष प्रकार के पोलीफेनॉल्स पाए जाते हैं जिससे शरीर में फैट्स को बर्न करने में मदद मिलती है।
6. करौंदे का जूस
करौंदे का जूस भी वजन घटाने में बहुत फायदेमंद है। इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म ठीक रहता है और फैट्स कम करने में आसानी होती है।
7. धनिया और नींबू जूस
सामग्री: 60 ग्राम हरा धनिया (मसला हुआ), 1 नींबू, 4 गिलास पानी। एक बर्तन में नींबू को दो हिस्सों में काटकर निचोड़ें। उसमें मसला हुआ धनिया और पानी मिला लें। अच्छी तरह से मिक्स करें। आपका हेल्दी जूस तैयार है। इस जूस को खाली पेट लगातार 5 दिन तक लें। हरा धनिया पाचन शक्ति तो बढ़ाता ही है साथ ही शरीर में प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है। यह खून की अशुद्धियों को दूर करता है। नींबू उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करता है। इस जूस को 5 दिन तक लगातार खाली पेट लेने से आप 5 किलो के करीब वजन कम कर सकते हैं।
मोटापे से बचने के लिए आहार नियंत्रण -  Only Ayurved
मोटापे से बचने के लिए आहार नियंत्रण।
अगर आप चाहते हैं के आप मोटापे पर नियंत्रण कर के उसको कम कर दे तो आपको अपने आहार पर पूरा नियंत्रण करना होगा। ऐसे में कुछ चीजे हैं मोटापे पर कंट्रोल करने में रामबाण सिद्ध होंगी। तो आइये जाने ये क्या हैं।
1. हैवी डिनर कभी ना ले। रात में सिर्फ सोना ही होता हैं। तो भोजन पेट में पड़ा रहता हैं और मोटापे को बढ़ाने का काम करता हैं। इसलिए कोशिश करे जितनी भूख हो उस से कम ही खाए।
2. रात को खाना हमेशा ३-४ घंटे पहले कर ले। और रात को खाने में कभी दाल, चावल, राजमा, दही, छोले आदि ना खाए। रात में पाछाँ क्रिया धीमी होने से ये जल्दी पचते नहीं।
3. कोल्ड ड्रिंक्स की जगह नारियल पानी, वेजिटेबल सूप, नीम्बू पानी, मट्ठा पिए।
4. वजन घटाने के लिए फाइबर ज़्यादा खाएं, इसके लिए खूब सारे फल व् सब्जिया खाए।
5. चीनी और चीनी से बनी मिठाई कम खाए।
6. दूध और दही बिना मलाई का पिए। और हो सके तो गाय का दूध और गाय के दूध से बना दही खाए।
7. प्रतिदिन 2-३ लीटर पानी पियें। खाने के साथ व् खाने के तुरंत बाद पानी ना पियें। खाने के डेढ़ घंटे के बाद ही पानी पियें। भोजन के साथ मक्खन निकली हुयी छाछ ले सकते हैं।
8. कभी भी शॉपिंग खाली पेट ना जाए, बाजार में फ़ास्ट फ़ूड देख कर मन कर जाएगा खाने का और करी कराई म्हणत खराब हो जाएगी।
9. डाइनिंग टेबल पर अंकुरित अनाज और अंकुरित दाले रखे। जब भी कुछ खाने का दिल करे तो बिस्कुट, पेस्ट्री, कुकीज़, स्नैक्स की जगह अंकुरित अनाज या दाल खाए। इनमे स्वाद बढ़ाने के लिए शहद मिला कर खाए।
10. गुड चीनी शक्कर बूरा खांड चुकंदर गन्ने का रस मीठे फल सूखे मेवे ना खाए या सिमित मात्रा में ही सेवन करे। ६० ग्राम से अधिक सेवन ना करे। पानी प्रयाप्त मात्रा में पियें।
11. बीयर, शराब आदि ना पिए, इनसे कोलेस्ट्रॉल बढ़ता हैं और कोलेस्ट्रॉल से मोटापा।
यह आयुर्वेदिक चाय सबसे तेज़ मोटापा कम करती है ।
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यदि आप बगैर व्यायाम, योगासन आदि किए या अधिक कठिन डायटिंग किए बिना मोटापा घटाना चाहते हैं या अपने शरीर को अच्छे आकार (shape) में रखना चाहते हैं तो आपके लिए यहाँ है
सरल सीधा व कारगर आयुर्वेदिक उपाय; जिसे आप घरेलू नुस्खा भी कह सकते हैं ।======================
वज़न कम करने में आयुर्वेद के उपाय बहुत सहायक व असरदार है आयुर्वेदिक विशेषज्ञों की सलाह है कि यदि हम रोजाना कुछ खास किस्‍म के मसालों का प्रयोग नियमित समय पर करें, तो हमारा वजन काफी कम हो सकता है । इन मसालों में जीरा, हरी धनिया, काली मिर्च, सौंफ और दालचीनी आदि शामिल है, ये मसाले ना केवल पाचन क्रिया को दुरुस्‍त करते हैं, बल्‍कि शरीर से दूषित पदार्थ भी बाहर निकालने में सहायक होते हैं। इनसे बनी चाय नियमित रूप से पीने पर आपकी त्‍वचा भी साफ एवं स्वस्थ्य हो जाएगी ।=======================
आइये देखें, इनकी चाय कैसे बनाए, जो मोटापा कम करे ।
सामग्री--------------
1 चम्‍मच जीरा,
1 चम्‍मच साबुत धनिया,
1 चम्‍मच सौंफ,
2 बारीक स्‍लाइस अदरक,
1 चम्‍मच काली मिर्च के दाने,
2 इंच दालचीनी का टुकड़ा
एवं 1 लीटर पानी ।
विधि - ----------
सबसे पहले पानी को सभी सामग्रियों के साथ उबाल लें । जब पानी अच्‍छी तरह से उबालकर आधा रह जाय तब इसे 5 से 10 मिनट तक ढँक कर रख दें । उसके बाद इसे छानेंगे तो 4 से 6 कप चाय बनेगी, जिसे आवश्यकतानुसार 4 से 6 लोग भी पी सकते हैं या आप दिन में 3 बार दो दिन तक भी पी सकते हैं।
यह उतम और निरापद देशी चाय है और इसका शरीर पर कोई नुकसान भी नहीँ है ।===== ============
मोटापा कम करने का ११०% गारंटेड धरेलू नूस्खा :
सामग्री :-
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१) पीसा हुवा हरा धनिया 60 gms
२) १ नींबू का रस
३) २ गला्स पानी
४) चूटकी सैंधा नमक
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बनाने की रीति:
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हरा घनिया को मीक्चर मे डालकर उसमे १ नींबू का रस + चूटकी सैंधा नमक और गला्स पानी डालकर मीलादे .आैर मीक्चर मे जूस बनाले .
आपका हैल्थी आैर वजन धटाने वाला जूस तैयार ..
प्रयोग रीति
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रोज सूबह खाली पेट ये जूस पीऐ
३० मिनट तक कूछ भी ना खाऐ..

पुदीने औषधीय गुण / Medicinal property of Mint

पुदीने में कई औषधीय गुण होते हैं। 

सिरदर्द हो रहा हो या पेट में कोई तकलीफ़ हो, पुदीना फ़ायदेमंद होता है। हिचकी आना भी बंद हो जाती है। इसकी चटनी भी बहुत स्वादिष्ट होती है। यहीं नहीं सौंदर्य निखार के लिए भी पुदीना कारगर है। तो आइए आज हम पुदीने के इन्हीं औषधीय गुणों के बारे में बताते हैं
पुदीने के लाभ ही लाभ
बात पते की – पुदीना अच्छे एंटीबायोटिक की तरह भी काम करता है
घाव भर जाएगा
पुदीने का रस किसी घाव पर लगाने से घाव जल्दी भर जाते हैं। यह चर्म रोगों को भी ख़त्म करने में मदद करता है। चर्म रोग होने पर पुदीने के पत्तों का लेप लगाने से आराम मिलता है।
ऑयली स्किन पर फ़ेशियल
अगर आपकी त्वचा ऑयली है, तो पुदीने का फ़ेशियल आपके लिए सही रहेगा। इसको बनाने के लिए दो बड़े चम्मच ताजा पीसे पुदीने के साथ दो बड़े चम्मच दही और एक बड़ा चम्मच ओटमील लेकर गाढ़ा घोल बनाएं। इसे चेहरे पर दस मिनट तक लगाएं और चेहरे को धो लें।
साफ़ हो जाएगी आवाज़
पुदीने के रस को नमक के पानी के साथ मिलाकर कुल्ला करने से आवाज़ साफ़ होती है। गर्मी में जी मिचलाए तो एक चम्मच सूखे पुदीने की पत्तियों का चूर्ण और आधी छोटी इलाइची के चूर्ण को एक गिलास पानी में उबालकर पीने से फ़ायदा होता है।
हिचकी में फ़ायदा
पुदीने का रस काली मिर्च व काले नमक के साथ चाय की तरह उबालकर पीने से जुकाम, खांसी व बुखार में राहत मिलती है। पुदीने की पत्तियां चबाने या उनका रस निचोड़कर पीने से हिचकियां बंद हो जाती हैं।
मज़बूत हड्डियां
इसमें मौजूद फ़ाइबर कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करता है और मैगनीशियम हड्डियों को ताक़त देता है। उल्टी होने पर आधा कप पुदीना रोगी को पिलाएं। फ़ायदा होगा। इसकी पत्तियों का रस नींबू-शहद के साथ लेने से पेट की बीमारियों में आराम मिलता है।
डॉक्टरी सलाह
पुदीना बहुत ठंडा होता है और यह डाइजेशन की प्रॉब्लम को दूर कर देता है। यह पेट के कीड़ों को भी मार देता है।

मुलेठी के उपयोग / Mulethi / Liquorice Uses

मुलेठी के औषधीय इस्तेमाल 
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1. कफ :
• अधिक कफ होने पर, ३ ग्राम मुलेठी चूर्ण को शहद के साथ लें।
• मुलेठी १० ग्राम + काली मिर्च १० ग्राम + लौंग ५ ग्राम + हरीतकी ५ ग्राम + मिश्री २० ग्राम, को मिलकर पीस लें और शहद के साथ १ चम्मच की मात्रा में शहद के साथ चाट कर लेने से पुरानी खांसी, जुखाम, गले की खराश, सूजन आदि दूर होते हैं।
2. खांसी :
• मुलेठी चूर्ण २ ग्राम + आंवला चूर्ण २ ग्राम को मिला लें। इस चूर्ण को शहद के साथ चाट कर लेने से खासी दूर होती है।
• खांसी के साथ खून आने पर, मुलठी का चूर्ण १ टीस्पून की मात्रा में शहद या पानी के साथ लेना चाहिए।
3. गले के रोग :
• गले की सूजन, जुखाम, सांस नली में सूजन, मुंह में छाले, गला बैठना आदि में इसका टुकड़ा मुंह में रख कर चूसना चाहिए।
4. जुखाम :
• जुखाम के लिए, मुलेठी ३ ग्राम + दालचीनी १ ग्राम + छोटी इलाइची २-३, कूट कर १ कप पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाए, छान कर, मिश्री मिला कर दो बार, सुबह-शाम २ चम्मच की मात्रा में लेना चाहिए।
5. हिचकी :
• हिचकी आने पर मुलेठी का एक टुकडा चूसें। नस्य लेने से भी लाभ होता है।
6. पेट रोग :
• पेट और आँतों में ऐठन होने पर मुलेठी का चूर्ण शहद के साथ दिन में २-३ बार लेना चाहिए।
• अल्सर में मुलेठी को ४ ग्राम को मात्रा में दूध के साथ लिया जाता है। या इसका क्वाथ दिन २-३ बार शहद में मिलकर लेना चाहिए।
7. पेशाब रोग :
• पेशाब की जलन में, २-४ ग्राम मुलेठी के चूर्ण को दूध के साथ लेना चाहिए।
8. रक्त प्रदर :
• रक्त प्रदर में, मुलेठी ३ ग्राम + मिश्री, को चावल के पानी के साथ लेना चाहिए।
9. धातु की कमी :
• धातु क्षय, में ३ ग्राम मुलेठी चूर्ण को ३ ग्राम घी और २ ग्राम शहद के साथ मिला कर लें।
• वीर्य बढाने, स्तम्भन शक्ति को मज़बूत करने के लिए, मुलेठी चूर्ण २-४ ग्राम की मात्रा में शहद और दूध के साथ, कुछ दिन तक सेवन करें
➡ मुलेठी का बाहरी प्रयोग :
1. बाह्य रूप से मुलेठी का प्रयोग, सूजन, एक्जिमा और त्वचा रोगों में लाभदायक है।
2. फोड़ों पर मुलेठी का लेप करना चाहिए।
3. घाव पर मुलेठी और घी का लेप लगाने से आराम मिलता है।
4. विसर्प में मुलेठी का काढ़ा प्रभावित स्थान पर स्प्रे करके लगाना चाहिए।
Note : मुलेठी की चूर्ण को निर्धारित मात्रा में निर्धारित समय तक ही लेना चाहिए। अधिक मात्रा में या लम्बे समय तक इसका सेवन हानिप्रद है। कई रोगों में इसका प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।