Wednesday, 26 June 2019

प्रोस्टेट ग्रंथि/ prostate gland

🌅 प्रोस्टेट ग्रंथि 🌅

लगभग तीस फीसदी पुरुष 40 वर्ष की उम्र में और पचास फीसदी से भी ज्यादा पुरुष 60 वर्ष की उम्र में प्रोस्टेट की समस्या से परेशान होते हैं !

*प्रोस्टेट ग्लैंड को पुरुषों का दूसरा दिल भी माना जाता है !*

पौरूष ग्रंथि शरीर में यूरीन के बहाव को नियन्त्रित करने व प्रजनन के लिये सीमेन बनाने का कार्य करती है !

उम्र के साथ-साथ यह ग्रंथि बढ़ने लगती हैं  जिसे बीपीएच ( बीनीग्न प्रोस्टेट हाइपरप्लेसिया ) कहते हैं !

प्रोस्टेट ग्लैंड ज्यादा बढ़ जाने पर कई लक्षण सामने आने लगते हैं।

*प्रोस्टेट वृद्धि के लक्षण*

* पेशाब करने में कठिनाई महसूस होना !

* थोडी - थोडी देर में पेशाब की हाजत होना - रात को कई बार पेशाब के लिये उठना !

* पेशाब की धार चालू होने में विलंब होना !

* मूत्राशय पूरी तरह खाली नहीं होता है इससे मूत्राशय में शेष बची पेशाब में रोगाणु पनपने लगते हैं !

*पहले आसान से उपायों के प्रयोग से लाभ उठाये !*

*सीताफल के कच्चे बीज 10 से 30 ग्राम  प्रतिदिन अपने खाने में इस्तेमाल किया जाए तो काफी हद तक यह प्रोस्टेट की समस्या से बचाव करने में मददगार है ! इन बीजों में काफी मात्रा में "प्लांट केमिकल व पोषक तत्व मौजूद होते हैं ! जैसे-  आयरन, जिंक, फॉस्फोरस, टि्रप्टोफैन, कॉपर, मैग्नेशियम, मैग्नीज, विटामिन के, प्रोटीन, फैटी एसिड और फाइटोस्टेरोल जो शरीर में जाकर टेस्टोस्टेरोन को डिहाइड्रोटेस्टोस्टेरोन में बदलने से बचाता है - जिससे प्रोस्टेट कोशिकाएं नहीं बन पातीं हैं !

   कद्दू के बीज की गिरी निकालकर तवे पर सेंककर, पीसकर 10 से 30 ग्राम की मात्रा में खाये। कद्दू में जिंक होता है, हर दिन 60 मिलीग्राम जिंक का सेवन प्रोस्टेट मरीजों में बेहद फायदा पहुंचाता है।

आपने महसूस किया होगा कि महिलाओं को कद्दू की शब्जी बहुत पसंद है, तथा भारत में अनेक त्योहारों पर इसे बनाने का प्रचलन भी है।

- द्राक्षा, मिश्री 10 -10 ग्राम दही के साथ कारगर है।

*अदरक लाभकारी है प्रोस्टेट और ओवेरियन कैंसर में :-*

जिस प्रकार हम सूखी खांसी, सर्दी, जुकाम,  भूख ना लगना जैसी समस्याओं में अदरक का प्रयोग प्राचीन समय से करते आ रहें हैं उसी प्रकार अदरक का प्रयोग कैंसर चिकित्सा में बेहद उत्साहकारी हैं !

शोध के मुताबिक़ अदरक ओवेरियन कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट करने में सफल है ! शोध में देखा गया कि जैसे ही कैंसर कोशिकाओं को अदरक के चूर्ण के संपर्क में लाया गया - कैंसर के सेल्स नष्ट होते चले गए ! वैज्ञानिक भाषा में इसे *"एपोप्टीज यानि कोशिकाओं की आत्महत्या"* कह सकते हैं ! यह भी देखा गया कि अदरक की मौजूदगी में कैंसर के सेल्स एक दुसरे को खाने लगे ! इसे डाक्टरी भाषा में *"ऑटो फिगिज"* कहते हैं !

शोध में यह भी पाया गया कि ''अदरक का सत्व '' बढे हूए प्रोस्टेट ट्युमर की साईज को 56 % तक कम कर देता है ! सबसे अच्छी बात यह कि अदरक की मात्रा ज्यादा भी हो जाए तो इसका दुष्प्रभाव कीमोथेरपी की तरह नहीं होता है !

*- प्रोस्टेट ( पौरुष ग्रंथि - गदूद ) के आसान रामबाण इलाज !-*

* एक सामान्य पीली हरड़ जो ना ज़्यादा बड़ी हो और ना ज़्यादा छोटी हो उसके दो टुकड़े करके गुठली सहित चीनी मिटटी के कप या कांच के गिलास में रात भर 12 से 14 घंटे तक भीगने दे !  फूलने के बाद सुबह इसके बीज निकालकर इसको धीरे धीरे चबा-चबा कर खा ले और ऊपर से वही पानी घूँट घूँट कर पी ले !

यह प्रयोग कम से कम 1 महीने से 2 महीने तक करे !

* 10 ग्राम गोखरू 125 मिली पानी के साथ घोट छानकर - बिना मीठा डाले हरड़ के प्रयोग के 15 मिनट बाद करे ! यह प्रयोग तब तक करे जब तक आपकी बार बार पेशाब आने की समस्या हो !

=> यह दोनों प्रयोग बहुत कड़वे हैं मगर बेहद उपयोगी हैं। इनमें मीठा मत मिलाएं।

** प्रोस्टेट ....

* दिन में 3 - 4 लिटर पानी पीयें लेकिन शाम को 6 बजे के बाद जरुरत के मुताबिक ही पानी, पियें ताकि रात में बार बार पेशाब के लिये ना उठना पडे ! कुछ लोग इसमें वट के डोडे डालकर पीते हैं।

* मिक्सर में अलसी का दरदरा पाउडर बना लें !फिर 20 ग्राम की मात्रा में 1 ग्‍लास पानी में 4 घंटे के लिये घोलकर दिन में दो बार पीयें ! बहुत लाभदायक उपचार है !

* सोयाबीन बीज में फ़ायटोएस्टोजीन्स होते हैं जो शरीर मे टेस्टोस्टरोन का लेविल कम करते हैं ! रोज 30 ग्राम बीज गलाकर खाना प्रोस्टेट में लाभदायक है !

* विटामिन सी का प्रयोग रक्त नलियों के अच्छे स्वास्थ्य के लिये जरूरी है ! 500 एम जी की 3 गोली प्रतिदिन लेना हितकर माना गया है !

* दो देशी टमाटर प्रतिदिन अथवा हफ़्ते में कम से कम दो बार खाने से प्रोस्टेट कैंसर का खतरा 50 % तक कम हो जाता है ! इसमें पाये जाने वाले लायकोपिन और एन्टिआक्सीडेंट्स कैंसर को पनपने को रोकता हैं !

*प्रोस्टेट वृद्धि की औषधि*

आक के जड़ की छाल का चूर्ण 50 ग्राम।

वंग भस्म 2.5 ग्राम।

वरूणछाल चूर्ण 100 ग्राम।

ताम्र भस्म 2.5 ग्राम।

काँचनार की छाल का चूर्ण 100 ग्राम।

सबको मिलाकर साफ डिब्बे में डालकर रख लें।

मात्रा:—

2.5 ग्राम दोनों समय शहद (HONEY) से लेवें।

*इसके साथ-साथ एक गोली चंद्रप्रभावटी और एक- एक गोली कचनार गुग्गल दोनों समय उपरोक्त दवा के साथ ही लेवें।*

*पेशाब को बढ़ाने के लिए पुनर्नवा का क्वाथ लें।*

- पानी व पेशाब हमेशा बैठकर ही करें।

Monday, 25 March 2019

खांसी के लिए आर्युवेदिक उपचार
(चाहे किसी भी प्रकार की हो)
1:- हल्दी पाउडर आधा चम्मच मुह के अंतिम हिस्से में डाले और चुप होकर बैठ जायें 10 मिनट तक
ये धीरे धीरे लार के साथ अंदर चली जायेगी
इससे टांसिल भी ठीक हो जाता है पूर्णरूप से
2:- अदरक और पान
दोनों के एक-एक चम्मच रस
को गर्म करने के बाद उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर चाट ले
3:- अदरक के टूकड़े को तवे या आग में भूनकर उसपर हल्दी डालकर
चूसते रहे
(इससे तो भयानक से भयानक खांसी दूर हो जाती है)
4:- अनार के रस को गर्म करके पीने से भी खांसी ठीक हो जाती है
5:- अमरूद को आग में भूनकर खाने से भी खासी ठीक हो जाती है
6:-हल्दी एक चौथाई चम्मच को गर्म दूध में मिलाकर पीये
7:- काली मिर्च को मुह में डालकर चूसते रहे
इससे भी खांसी दूर होती है
अमर बलिदानी श्री राजीव दीछित जी के व्याखानो से
नेत्रपाल सिंह चौहान
09456319233

Saturday, 9 June 2018

आयुर्वेदिक हेयर डाई

🌹🌹आयुर्वेदिक हेयर डाई🌹🌹

पीसी मेंहदी -1 कप
कत्था--1चम्मच
दही-1चम्मच
निम्बू रस -1चम्मच
कॉफी पाउडर-1चम्मच
आंवला चूर्ण -1चम्मच
ब्राह्मी चूर्ण-1चम्मच
सुखा पुदीना चूर्ण-1चम्मच

सभी चीजों को मिलाकर पानी की सहायता से गाढ़ा लेप बनाएं व 2 घण्टे के लिए रख दें। अब हेयर डाई तैयार है।
इसे अब बालों में जड़ों तक लगाएं और घण्टे बाद सूख जाने पर बेसन या मुल्तानी मिट्टी से सिर धो लें आपको बालों में अलग ही बदलाव महसूस होगा।

Thursday, 12 April 2018

घमौरियों का रामबाण इलाज


*घमौरियों का रामबाण इलाज :-*

*अदरक :-*
अदरक को अपने औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है। यह कांटेदार गर्मी की वजह से खुजली और चुभने वाले दर्द को कम करने में भी मदद कर सकता है। इसके लिए आप अदरक को पानी में उबाल लें। पानी को ठंडा करें और फिर इसे साफ, मुलायम कपड़े से अपनी त्वचा पर लगाएं।

*चंदन का पाउडर :-*
चंदन का तेल एंटीसेप्टिक, एंटी-इंफ्लेमेटरी, , एन्टीस्पैस्मोडिक, कीटाणुनाशक, मेमोरी बूस्टर और एक टॉनिक पदार्थ के रूप में अपने गुणों के लिए जाना जाता है। इसका सुगंध लेप त्वचा की घमौरियों वाली जलन पर ताजगी भरे मलहम का काम करता है। इसके लिए आप चंदन पाउडर और धनिया पाउडर को बराबर मात्रा में मिलाकर इनमें गुलाबजल मिलाकर गाढ़ा लेप बनाएं तथा इस लेप को बॉडी पर कुछ देर लगाकर ठंडे पानी से धो लें।

*एलोवेरा :-*
एलोवेरा जेल अपने जीवाणुरोधी और एंटीसेप्टिक गुणों के कारण घमौरियां सहित विभिन्न प्रकार की त्वचा की चकत्ते को कम करने में मदद मिलती है। यह हीलिंग गुणों के लिए भी जाना जाता है। यह सूजन और लालिमा को कम करने में मदद करता है। यह त्वचा को डिहाइड्रेशन से भी बचाता है। इसके लिए आप एलोवेरा जेल को प्रभावित जगह पर लगाएं।

*मुल्तानी मिट्टी :-*
मुल्तानी मिट्टी मैग्नीशियम, सिलिका, क्वार्ट्ज, कैल्शियम, आयरन, काल्साइट और डोलोमाइट जैसे खनिजों का प्रचुर स्रोत है। यह मुंहासे और त्वचा अन्य दूसरे रोगों में बहुत ही कारगर है। हालांकि, बहुत से लोग इस बात से अनजान हैं कि मुल्तालनी मिट्टी क्या है। यह पके चेहरे, त्वचा और स्वास्थ्य के लिए लाभ प्रदान करता है। यदि आप घमौरियों की समस्या से ग्रसित हैं तो आप मुल्ता नी मिट्टी का लेप बनाकर इसे लगाएं। आपको बहुत ही फायदा मिलेगा।

Sunday, 24 December 2017

दमा अथवा स्वास सम्बन्धी परेशानी के उपाय

*श्वास अथवा दमा श्वसन तंत्र की भयंकर कष्टदायी बीमारी है। यह रोग किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है।श्वास पथ की मांसपेशियों में आक्छेप होने से सांस लेने निकालने में कठिनाई होती है।खांसी का वेग होने और श्वासनली में कफ़ जमा हो जाने पर तकलीफ़ ज्यादा बढ जाती है।रोगी बुरी तरह हांफ़ने लगता है।*
एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थ या वातावरण के संपर्क में आने से,बीडी,सिगरेट धूम्रपान करने से,ज्यादा सर्द या ज्यादा गर्म मौसम,सुगन्धित पदार्थों,आर्द्र हवा,ज्यादा कसरत करने और मानसिक तनाव से दमा का रोग उग्र हो जाता है।
*यहां ऐसे घरेलू नुस्खों का उळ्लेख किया जा रहा है जो इस रोग ठीक करने,दौरे को नियंत्रित करने,और श्वास की कठिनाई में राहत देने वाल सिद्ध हुए हैं--*
१) तुलसी के १५-२० पत्ते पानी से साफ़ करलें फ़िर उन पर काली मिर्च का पावडर बुरककर खाने से दमा मे राहत मिलती है।
*२) एक केला छिलका सहित भोभर या हल्की आंच पर भुन लें। छिलका उतारने के बाद काली मिर्च का पावडर उस पर बुरककर खाने से श्वास की कठिनाई तुरंत दूर होती है।*
३) दमा के दौरे को नियंत्रित करने के लिये हल्दी एक चम्मच दो चम्मच शहद में मिलाकर चाटलें।
*४)  तुलसी के पत्ते पानी के साथ पीस लें ,इसमें दो चम्मच शहद मिलाकर सेवन करने से दमा रोग में लाभ मिलता है।*
५)  पहाडी नमक सरसों के तेल मे मिलाकर छाती पर मालिश करने से फ़ोरन शांति मिलती है।
*६)   मैथी के बीज १० ग्राम एक गिलास पानी मे उबालें तीसरा हिस्सा रह जाने पर ठंडा करलें और पी जाएं। यह उपाय दमे के अलावा शरीर के अन्य अनेकों रोगों में फ़ायदेमंद   है।*
७)  एक चम्मच हल्दी एक गिलास दूध में मिलाकर पीने से दमा रोग काबू मे रहता है।एलर्जी नियंत्रित होती है।
*८)  सूखे अंजीर ४ नग रात भर पानी मे गलाएं,सुबह खाली पेट खाएं।इससे श्वास नली में जमा बलगम ढीला होकर बाहर निकलता है।*
९)  सहजन की पत्तियां उबालें।छान लें उसमें चुटकी भर नमक,एक चौथाई निंबू का रस,और काली मिर्च का पावडर मिलाकर पियें।दमा का बढिया इलाज माना गया है।
*१०)  शहद दमा की अच्छी औषधि है।शहद भरा बर्तन रोगी के नाक के नीचे रखें और शहद की गन्ध श्वास के साथ लेने से दमा में राहत मिलती है।*
११)  दमा में नींबू का उपयोग हितकर है।एक नींबू का रस एक गिलास जल के साथ भोजन के साथ पीना चाहिये
*१२)  लहसुन की  ५  कली चाकू से बारीक काटकर  ५० मिलि दूध में उबालें।यह मिक्श्चर सुबह-शाम लेना बेहद लाभकारी है।*
१३)-अनुसंधान में यह देखने में आया है कि आंवला दमा रोग में अमृत समान गुणकारी है।एक चम्मच आंवला रस मे दो चम्मच शहद मिलाकर लेने से फ़ेफ़डे ताकतवर बनते हैं।
*14) दमे का मरीज उबलते हुए पानी मे अजवाईन डालकर उठती हुई भाप सांस में खींचे ,इससे श्वास-कष्ट में तुरंत राहत मिलती है।*
१५) लौंग ४-५ नग लेकर १०० मिलिलिटर पानी में उबालें आधा रह जाने पर छान लें और इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर गरम गरम पीयें। ऐसा काढा बनाकर  दिन में तीन बार पीने से रोग नियंत्रित होकर दमे में आशातीत लाभ होता है।
*१६) चाय बनाते वक्त २ कली लहसुन की पीसकर डाल दें। यह दमे में राहत पहुंचाता है। सुबह-शाम पीयें।*
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Saturday, 23 December 2017

फटी एडियो का उपचार / reamady from heal crack

फटी एडियो का उपचार

गुनगुने पानी में दो चम्मच नमक डालकर उस पानी में 10-15 मिनट दोनों पैरों को डालकर बैठें तत्पश्चात तलवों को किसी तौलिए से रगड़कर पोंछ लेना चाहिए। ऐसा करने से तलुवों का मैल निकल जायेगा। इसके बाद एड़ियों और तलवों पर सरसों का तेल मलकर सूती जुराबें पहन लेनी चाहिए। इस प्रकार से उपचार करने से फटी हुई एड़ियां कुछ ही दिनों में ठीक हो जाती हैं। एडियों की साफ-सफाई का ध्यान रखें

स्नान करते समय एड़ियों को अच्छी तरह से साफ करना चाहिए और इसके बाद एड़ियों पर सरसों का तेल लगाना चाहिए। नाभि में सरसों का तेल लगायें स्नान करने के बाद या फिर सोते समय नाभि में सरसों का तेल लगना चाहिए। इसके बाद 20-25 बार नाभि को मलना चाहिए।

रात्रि सोने से पहले ग्लिसरीन, गुलाबजल और जैतून के तेल को समभाग एकसाथ मिला लें। फिर इस तेल से तलुवों तथा एड़ियों की मालिश करें। ऐसा प्रतिदिन करने से यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।

फलों का पेस्ट है असरकारी  कच्चे आम को पीसकर फटी हुई एड़ियों पर मालिश करने से बहुत जल्द ही फटी हुई एड़ियां ठीक हो जाती हैं।

फटी हुई एड़ियों को ठीक करने के लिए कच्चे पपीते को पीस लें। इसके बाद इसमें जरा-सा सरसों का तेल तथा हल्दी मिलाएं और इस पेस्ट को एड़ियों पर लगाकर कपड़ा बांध लें। इस प्रकार से उपचार करने से कुछ ही दिनों में फटी हुई एड़ियां ठीक हो जाती हैं।

हरी मुलायम घास और नीम के 10 से 12 पत्ते पीसकर पूरी पगतली में अच्छी तरह से लगाकर आधे घंटे बाद धो लें। इससे एड़िया जल्दी ही ठीक हो जाती है।

बरगद का दूध फटी हुई एड़ियों पर लगाने से बहुत अधिक लाभ मिलता है।

फटी हुई एड़ियों पर पिसी हुई मेहंदी लगाने से एड़ियां जल्दी ठीक हो जाती हैं।

सरसों के तेल में मधु मख्खी के छत्ते का मोम मिलाकर फटी हुई एड़ियों पर लगाने से एड़िया जल्दी ठीक हो जाती है।

फटी हुई एड़ियों पर प्रतिदिन घी लगाने से एड़ियां जल्दी ठीक हो जाती हैं।

पानी में शलगम के टुकड़ों को डालकर उबाल लें। इसके बाद इस पानी से फटी हुई एड़ियों को धोने से फटी हुई एड़ियां ठीक हो जाती हैं।

फटी हुई एड़ियों को साबुन, राख, मिट्टी तथा कीचड़ आदि से बचाकर रखना चाहिए।

सप्ताह में एक बार नींबू का रस मिले हुए पानी से अपने पैरों को धोना चाहिए।

पाचनशक्ति के ज्यादा कमजोर हो जाने के कारण भी एड़ियां फटने लगती हैं इसलिए यदि पाचनशक्ति कमजोर हो गई हो तो सबसे पहले उसको ठीक करने का उपाय करना चाहिए। इसके बाद एड़ी फटने का इलाज कराना चाहिए। पाचन शक्ति को ठीक करने के लिए पौष्टिक तत्व युक्त तथा पाचनशक्ति को बढ़ाने वाले पदार्थ और विटामिन `सी´ युक्त पदार्थों का सेवन अधिक मात्रा में करना चाहिए।

एड़ियों को फटने से रोकने के लिए प्रतिदिन हरी सब्जियों का सेवन करना चाहिए तथा सुबह के समय में नंगे पैर घास पर चलना चाहिए l

बीड़ी तम्बाकू धूम्रपानगुटखा छोड़ने के घरेलु नुस्खे / natural ways to get rid of tobacco and smoking

बीड़ी तम्बाकू धूम्रपान
गुटखा छोड़ने के घरेलु नुस्खे
आज कल धूम्रपान करना एक आम बात हो गयी है । लोगो ने ऐसे अपना लाइफ स्टाइल बना लिया है, और ऐसी गन्दी आदत को छोड़ना कोई बड़ी बात नहीं, सिर्फ एक दृढ इच्छा शक्ति की ज़रूरत हैं, और वो आपमें हैं। धूम्रपान करने वालों को कईतरह की बीमारियाँ होती हैं, जैसे मुँह का कैंसर, दमा, फेफड़ों में कैंसर और हृदय रोग।
धूम्रपान के नुकसान से तो हर कोई वाकिफ है, लेकिन इस लत को छोड़ पाने में सभी बेहदलाचार साबित होते हैं। और हमारे सभ्य समाज में ये कलाकार पैसे के लालच में नयी पीढ़ी को नशों की और धकेल रहे हैं। ऐसे लोगों का समाज से बहिष्कार होना चाहिए। खैर ये टॉपिक बहुत बड़ा हैं, आज हम आपको कुछ ऐसे प्राकृतिक नुस्ख़े बताएंगे जिससे आप धूम्रपान और तम्बाकूका किसी भी तरह का सेवन छोड़ सकते हैं।

उपचार

100 ग्राम अजवायन और 100 ग्राम बड़ी सोंफ लेकर दोनों को खूब साफ कर ले और इसमें 60 ग्राम काला नमक मिलाकर इन तीनो को पीस लें। ततपश्चात इस मिश्रण में दो निम्बू का रस मिलाकर रात भर (चांदनी रात में रखना
अधिक अच्छा है) रखा रहने दें। दूसरे दिन प्रात: इस मिश्रण को तवे पर धीमी आंच पर भून कर साफ़ शीशी में भरकर सुरक्षित रख लें। बस दवा तैयार है।

सेवन विधि
जब भी धूम्रपान या तम्बाकू की इच्छा या तलब उठे तब थोड़ा चूर्ण लेकर मुंह में डालकर चबाएं। ऐसा कुछ दिन लगातार करने से यह बुरी आदत अपने-आप छूट जाएगी। साथ ही अन्य कई लाभ होंगे, जैसे गैस की तकलीफ मिटना, पाचनशक्ति में वृध्दि होना, भूख खुलकर लगना, रक्त सुधरना, सुगंध और स्वाद से चित प्रसन्न रहना आदि। इसके सेवन से पान आदि में जर्दा या तम्बाकू सेवन से बिगड़े हुए दांत और दांत- दर्द में लाभ होगा तथा चालीस दिन तक सेवन से भीतर के तम्बाकू के दाग भी साफ़ हो जाएंगे।
सहायक उपचार
ओषधि के सेवन के साथ हल्का सुपाच्य व भूख से कम भोजन लें तथा प्रात: भर्मण, योगासन व प्राणायाम करें तो शीघ्र लाभ होगा।

हरड़
यदि आप एक छोटी हरड़ ( काली, जंगी, जौ हरड़. जो पंसारी से मिलती है) के छोटे टुकड़े करके रख लें। जब भी इन चीजों की इच्छा या तलब उठे छोटी हरड़ का एक टुकड़ा मुंह में डाल लें और चीरे-धीरे चूसें। इससे कुछ ही दिनों मेंबीड़ी-सिगरेट तम्बाकू की बुरी आदत छूटजाती है।

दालचीनी
दालचीनी को बारीक़ पीसकर शहद में मिलाकर एक डिब्बी या कांच की शीशी में रख लें। जब बीड़ी सिगरेट की तलब लगे एक ऊँगली यह ओषधि चाट लें।

प्याज
कैसा भी नशा हो चाहे शराब, अफीम, गांजा, बीड़ी, सिगरेट कोई भी नशा, नित्य खाली पेट आधा कप (50 gram.) हर रोज़ प्याज का रस पीने से थोड़े दिन पीने से नशे की आदत छोटजाती हैं।