लीवर व गुर्दे /
किडनी के रोगो मे
चमत्कारी औषधि।
भूमि आंवला PHYLLANTHUS NIRURI
लीवर व गुर्दे /किडनी के रोगो मे
चमत्कारी औषधि।
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यह एक छोटा सा पौधा है जो यकृत / लीवर व
गुर्दे /किडनी के रोगो मे चमत्कारी लाभ
करता है।
वैसे यह बरसात मे अपने आप उग जाता है परंतु छायादार
नमी वाले स्थानो पर पूरा साल मिलता है। इसके पत्ते
के नीचे छोटा सा फल लगता है जो देखने मे आंवले
जैसा ही दिखाई देता है। बरसात मे यह मिल जाए तो
इसे उखाड़ कर रख ले व छाया मे सूखा कर रख ले।
जड़ी बूटी की दुकान से
आसानी से मिल जाता है। मात्रा - आधा चम्मच चूर्ण
पानी के साथ दिन मे 2-4 बार तक। या
पानी मे उबाल कर छान कर भी दे सकते
हैं। ताजे का रस अधिक गुणकारी है
पीलिया किसी भी कारण से
हो चाहे पीलिया का रोगी मौत के मुंह मे
हो यह देने से बहुत अधिक लाभ होता है। अन्य दवाइयो के
साथ भी दे सकते (जैसे कुटकी/
रोहितक/भृंगराज) अकेले भी दे सकते हैं।
LIVER CIRRHOSIS जिसमे यकृत मे घाव हो जाते हैं यकृत
सिकुड़ जाता है उसमे भी बहुत लाभ करता है।
Fatty LIVER जिसमे यकृत मे सूजन आ जाती है
पर बहुत लाभ करता है।
गुर्दे मे SERUM CREATININ बढ़ गया हो, पेशाब मे
इन्फेक्शन हो बहुत लाभ करेगा।
इसका कोई साइडेफेक्ट नहीं है
लीवर व किडनी के रोगी को
खाने मे घी तेल मिर्च खटाई व सभी दाले
बंद कर देनी चाहिए। मूंग की दाल कम
मात्रा मे ले सकते हैं। मिर्च के लिए कम मात्र मे
काली मिर्च व खटाई के लिए अनारदाना प्रयोग करना
चाहिए।
भोजन मे चावल का अधिक प्रयोग करना चाहिए
हरे नारियल का पानी बहुत अच्छा है।
भोजन –
1- सभी किस्म की दाले बंद कर दे।
केवल मूंग बिना छिलके की दाल ले सकते।
2-लाल मिर्च, हरी मिर्च, अमचूर,
इमली, गरम मसाला और पैकेट का नमक बंद कर दे।
3- सैंधा नमक और काली मिर्च का प्रयोग करे
बहुत कम मात्रा मे।
4- यदि खटाई की इच्छा हो खट्टा सूखा अनारदाना
प्रयोग करे।
5- प्रतिदिन लगभग 50 ग्राम किशमिश/दाख/ मुनक्का (सूखा
अंगूर) , खजूर व सुखी अंजीर
पानी मे धो कर खिलाए।
6- चावल उबालते समय जो पानी (माँड़) निकलता है
वह ले। वह स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा है।
7- गेहू का दलिया, लौकी की
सब्जी, परवल की सब्जी दे
8- भिंडी, घुइया (अरबी), कटहल आदि
न खाए।
9- सफ़ेद पेठा (कूष्माण्ड जिसकी मिठाई बनाई
जाती है) वह मिले तो उसका रस पिए व
उसकी सब्जी खाए। पीले रंग
का पेठा जिसे काशीफल या सीताफल
कहते हैं वह न खाए ।
श्री राजीव दीक्षित जी
दीपक खण्डेलवाल
Monday, 27 February 2017
महिलाओं की Periods सम्बन्धी समस्यायों का आयुर्वेदिक उपचार / ayurvedic remedy for periods problem in ladies
महिलाओं की Periods सम्बन्धी समस्यायों का आयुर्वेदिक उपचार
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मित्रो माताओ-बहनो को मासिक धर्म (Periods) से सबन्धित समस्याएँ होना साधारण बात है अक्सर माहवारी की अनियमिता हो जाती है, अर्थात कई बार रक्तस्त्राव बहुत अधिक हो जाता है और कई बार क्या होता है बिलकुल ही नहीं होता ! और कभी कभी ऐसा भी होता है की ये 2-3 दिन होना चाहिए लेकिन 1 ही दिन होता है ,और कई बार 15 दिन ही दुबारा आ जाता है ! और कई बार 2 महीने तक नहीं आता ! तो ये मित्रो मासिक धर्म चक्र की अनियमिता की जितनी सभी समस्याएँ है इसकी हमारे आयुर्वेद मे बहुत ही अच्छी और लाभकारी औषधि है वो है अशोक के पेड़ के पत्तों की चटनी ! हाँ एक बात याद रखे आशोक का पेड़ दो तरह का है एक तो सीधा है बिलकुल लंबा ज़्यादातर लोग उसे ही अशोक समझते है जबकि वो नहीं है एक और होता है पूरा गोल होता है और फैला हुआ होता है वही असली अशोक का पेड़ है जिसकी छाया मे माता सीता ठहरी थी
तो इस असली अशोक के 5-6 पत्ते तोड़िए उसे पीस कर चटनी बनाओ अब इसे एक से डेढ़ गिलास पानी मे कुछ देर तक उबाले ! इतना उबाले की पानी आधा से पौन गिलास रह जाए ! फिर उसे बिलकुल ठंडा होने के लिए छोड़ दीजिये और फिर उसको बिना छाने हुए पीये ! सबसे अच्छा है सुबह खाली पेट पीना ! कितने दिन तक पीना ?? 30 दिन तक लगातार पीना उससे मासिक धर्म (periods ) से सबन्धित सभी तरह की बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं ! ये सबसे अधिक अकेली बहुत ही लाभकारी दवा है ! जिसका नुकसान कोई नहीं है ! और अगर कुछ माताओ-बहनो को 30 दिन लेने से थोड़ा आराम ही मिलता है ज्यादा नहीं मिलता तो वो और अगले 30 दिन तक ले सकती है वैसे लगभग मात्र 30 दिन लेने से ही समस्या ठीक हो जाती है !
तो मित्रो ये तो हुई महवारी मे अनियमिता की बात ! अब बात करते पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द की. बहुत बार माताओ -बहनो को ऐसे समय मे बहुत अधिक शरीर मे अलग अलग जगह दर्द होता है कई बार कमर दर्द होना ,सिर दर्द होना ,पेट दर्द पीठ मे दर्द होना जंघों मे दर्द होना ,स्तनो मे दर्द,चक्कर आना ,नींद ना आना बेचैनी होना आदि तो ऐसे मे तेज pain killer लेने से बचे क्योंकि इनके बहुत अधिक side effects है , एक बीमारी ठीक करेंगे 10 साथ हो जाएगी और बहुत से pain killer तो विदेशो मे 20 वर्षो से ban है जो भारत मे बिकती है !
तो आयुर्वेद मे भी इस तरह के दर्दों की तात्कालिक (instant relief ) दवाये है जिसका कोई side effect नहीं है ! तो पीरियडस के दौरान होने वाले दर्दों की सबसे अच्छी दवा है गाय का घी ,अर्थात देशी गाय का घी ! एक चम्मच देशी गाय का घी को एक गिलास गर्म पानी मे डालकर पीना ! पहले एक गिलास पानी खूब गर्म करना जैसे चाय के लिए गर्म करते है बिलकुल उबलता हुआ ! फिर उसमे एक चम्मच देशी गाय का घी डालना ,फिर ना मात्र सा ठंडा होने पर पीना ,चाय की तरह से बिलकुल घूट घूट करके पीना ! बिलकुल सिप सिप करके पीना है ! तात्कालिक (instant relief ) एक दम आराम आपको मिलेगा और ये लगातार 4 -5 दिन जितने दिन पीरियड्स रहते है पीना है उससे ज्यादा दिन नहीं पीना ! ये पीरियडस के दौरन होने वाले सब तरह के दर्दों के लिए instant relief देता है सामान्य रूप से होने वाले दर्दों के लिए अलग दवा है !
एक बात जरूर याद रखे घी देशी गाय का ही होना चाहिए , विदेशी जर्सी,होलेस्टियन ,फिरिजियन भैंस का नहीं !! देशी गाय की पहचान है की उसकी पीठ गोल सा ,मोटा सा हम्प होता है !कोशिश करे घर के आस पास पता करे देशी गाय का ! उसका दूध लाकर खुद घी बना लीजिये ! बाजारो मे बिक रहे कंपनियो के घी पर भरोसा ना करें ! या भारत की सबसे बड़ी गौशाला जिसका नाम पथमेड़ा गौशाला है जो राजस्थान मे है यहाँ 2 लाख से ज्यादा देशी गाय है इनका घी खरीद लीजिये ये पूरा देशी गाय के दूध से ही बना है ! काफी बड़े शहरो मे उपलब्ध है !
और अंत जब तक आपको जीवन मे आपको मासिक धर्म रहता है आप नियमित रूप से चुने का सेवन करें ,चुना कैसा ?? गीला चुना , जो पान वाले के पास से मिलता है कितना लेना है ?? गेहूं के दाने जितना ! कैसे लेना है ??बढ़िया है की सुबह सुबह खाली पेट लेकर काम खत्म करे आधे से आधा गिलास पानी हल्का गर्म करे गेहूं के दाने के बराबर चुना डाले चम्मच से हिलाये पी जाए ! इसके अतिरिक्त दही मे ,जूस मे से सकते है बस एक बात का ध्यान रखे कभी आपको पथरी की समस्या रही वो चुना का सेवन ना करे !! ये चुना बहुत ही अच्छा है बहुत ही ज्यादा लाभकरी है मासिक धर्म मे होने वाली सब तरह की समस्याओ के लिए !! इसके अतिरिक्त आप जंक फूड खाने से बचे , नियमित सैर करे ,योग करे !
शुगर, थाइराइड, बीपी, ह्रदय रोगों के लिए आयुर्वेदिक औषधि / ayurvedic medicine for diabetes, thyroid, blood pressure and heart problem
शुगर, थाइराइड, बीपी, ह्रदय आदि में रामबाण चूर्ण। स्वस्थ व्यक्ति भी लें सकतें है। 1 च सुबह,1च शाम को। उपरोक्त चूर्ण बनाकर कर काँच की बरनी में रख लें।।
100 ग्राम तुलसी पाउडर।
100 ग्राम पोदीना पाउडर।
100 ग्राम बेल पाउडर।
100 ग्राम आँवला पाउडर।
100 ग्राम जामुन गुठली पाउडर।
100 ग्राम जामुन पत्ता पाउडर।
100 ग्राम नीम के पत्तो का पाउडर
100 ग्राम अर्जुन छाल पाउडर।
100 ग्राम हल्दी पाउडर( हल्दी बाजार की पिसी या पैक पैकेट नहीं लेना घर पर पीसनी है) कुल 900 ग्राम बनेगा।। शुगर के मरीज साथ में निम्न काढ़ा भी लें। नीम, तुलसी एवम बेलपत्र 4,4 पत्ते 1 गिलास पानी में उबालें आधा रहने पर पियें।2 से 3 किलोमीटर पैदल घूमें। आहार सन्तुलित हो। योग प्रणायाम करें। 15 दिन बाद परिणाम मिलना शुरू हो जाएगा।
जैविक घड़ी पर आधारित शरीर की दिनचर्या / daily routine as per bio clock
*जैविक घड़ी पर आधारित शरीर की दिनचर्या....*
★ *प्रातः ३ से ५* – इस समय जीवनी-शक्ति विशेष रूप से फेफड़ों में होती है। थोड़ा गुनगुना पानी पीकर खुली हवा में घूमना एवं प्राणायाम करना । इस समय दीर्घ श्वसन करने से फेफड़ों की कार्यक्षमता खूब विकसित होती है। उन्हें शुद्ध वायु (आक्सीजन) और ऋण आयन विपुल मात्रा में मिलने से शरीर स्वस्थ व स्फूर्तिमान होता है। ब्रह्म मुहूर्त में उठने वाले लोग बुद्धिमान व उत्साही होते है, और सोते रहने वालों का जीवन निस्तेज हो जाता है ।
★ *प्रातः ५ से ७* – इस समय जीवनी-शक्ति विशेष रूप से आंत में होती है। प्रातः जागरण से लेकर सुबह ७ बजे के बीच मल-त्याग एवं स्नान का लेना चाहिए । सुबह ७ के बाद जो मल-त्याग करते है उनकी आँतें मल में से त्याज्य द्रवांश का शोषण कर मल को सुखा देती हैं। इससे कब्ज तथा कई अन्य रोग उत्पन्न होते हैं।
★ *प्रातः ७ से ९* – इस समय जीवनी-शक्ति विशेष रूप से आमाशय में होती है। यह समय भोजन के लिए उपर्युक्त है । इस समय पाचक रस अधिक बनते हैं। भोजन के बीच-बीच में गुनगुना पानी (अनुकूलता अनुसार) घूँट-घूँट पिये।
★ *प्रातः ११ से १* – इस समय जीवनी-शक्ति विशेष रूप से हृदय में होती है।
★ *दोपहर १२ बजे* के आस–पास मध्याह्न – संध्या (आराम) करने की हमारी संस्कृति में विधान है। इसी लिए भोजन वर्जित है । इस समय तरल पदार्थ ले सकते है। जैसे मट्ठा पी सकते है। दही खा सकते है ।
★ *दोपहर १ से ३* -- इस समय जीवनी-शक्ति विशेष रूप से छोटी आंत में होती है। इसका कार्य आहार से मिले पोषक तत्त्वों का अवशोषण व व्यर्थ पदार्थों को बड़ी आँत की ओर धकेलना है। भोजन के बाद प्यास अनुरूप पानी पीना चाहिए । इस समय भोजन करने अथवा सोने से पोषक आहार-रस के शोषण में अवरोध उत्पन्न होता है व शरीर रोगी तथा दुर्बल हो जाता है ।
★ *दोपहर ३ से ५* -- इस समय जीवनी-शक्ति विशेष रूप से मूत्राशय में होती है । २-४ घंटे पहले पिये पानी से इस समय मूत्र-त्याग की प्रवृति होती है।
★ *शाम ५ से ७* -- इस समय जीवनी-शक्ति विशेष रूप से गुर्दे में होती है । इस समय हल्का भोजन कर लेना चाहिए । शाम को सूर्यास्त से ४० मिनट पहले भोजन कर लेना उत्तम रहेगा। सूर्यास्त के १० मिनट पहले से १० मिनट बाद तक (संध्याकाल) भोजन न करे। शाम को भोजन के तीन घंटे बाद दूध पी सकते है । देर रात को किया गया भोजन सुस्ती लाता है यह अनुभवगम्य है।
★ *रात्री ७ से ९* -- इस समय जीवनी-शक्ति विशेष रूप से मस्तिष्क में होती है । इस समय मस्तिष्क विशेष रूप से सक्रिय रहता है । अतः प्रातःकाल के अलावा इस काल में पढ़ा हुआ पाठ जल्दी याद रह जाता है । आधुनिक अन्वेषण से भी इसकी पुष्टी हुई है।
★ *रात्री ९ से ११* -- इस समय जीवनी-शक्ति विशेष रूप से रीढ़ की हड्डी में स्थित मेरुरज्जु में होती है। इस समय पीठ के बल या बायीं करवट लेकर विश्राम करने से मेरूरज्जु को प्राप्त शक्ति को ग्रहण करने में मदद मिलती है। इस समय की नींद सर्वाधिक विश्रांति प्रदान करती है । इस समय का जागरण शरीर व बुद्धि को थका देता है । यदि इस समय भोजन किया जाय तो वह सुबह तक जठर में पड़ा रहता है, पचता नहीं और उसके सड़ने से हानिकारक द्रव्य पैदा होते हैं जो अम्ल (एसिड) के साथ आँतों में जाने से रोग उत्पन्न करते हैं। इसलिए इस समय भोजन करना खतरनाक है।
★ *रात्री ११ से १* -- इस समय जीवनी-शक्ति विशेष रूप से पित्ताशय में होती है । इस समय का जागरण पित्त-विकार, अनिद्रा , नेत्ररोग उत्पन्न करता है व बुढ़ापा जल्दी लाता है । इस समय नई कोशिकाएं बनती है ।
★ *रात्री १ से ३* -- इस समय जीवनी-शक्ति विशेष रूप से लीवर में होती है । अन्न का सूक्ष्म पाचन करना यह यकृत का कार्य है। इस समय का जागरण यकृत (लीवर) व पाचन-तंत्र को बिगाड़ देता है । इस समय यदि जागते रहे तो शरीर नींद के वशीभूत होने लगता है, दृष्टि मंद होती है और शरीर की प्रतिक्रियाएं मंद होती हैं। अतः इस समय सड़क दुर्घटनाएँ अधिक होती हैं।
*यह एक आदर्श दिन चर्या है !!! वर्तमान में भले सभी संभव ना हो ईस के ईर्दगीर्द रहने से भी हभ कई बिमारीओ से बच शकते है और अपना जिवन आनंद से जी सकते हैं !!!!*
Sunday, 26 February 2017
जोड़ो के दर्द का इलाज / joint pain treatment
हर प्रकार के दर्द का इलाज़ है ये आयुर्वेदिक नुस्खे
शरीर के किसी भी अंग में दर्द होना आधुनिक जीवनशैली का परिणाम है। किसी भी अंग में तकलीफ होने पर रोगी को भयानक दर्द होने लगता है। यदि आप किसी भी प्रकार के दर्द के शिकार हैं तो करें दर्द निवारण में मददगार कुछ विशेष चीजों का सेवन करें और घरेलू नुस्खों का उपयोग करें। ये आपकी सेहत की रक्षा करेंगे, बल्कि हर तरह के दर्द में औषधि की तरह काम करेंगे, जबकि ऐलोपेथिक दवा लेने पर कई तरह के रिएक्शन हो सकते हैं। चलिए आज जानते हैं कुछ ऐसी चीजों के बारे में जिन्हें खाने और लगाने पर दर्द गायब हो जाता है।
1. सोंठ और अदरक एक ही चीज दो रूप हैं। गीले रूप में यह अदरक कहलाता है। सूखने पर यही सोंठ हो जाती है। अदरक और सोंठ का उपयोग मसालों और घरेलू दवाओं के रूप में भी व्यापक रूप से किया जाता है। यह वात रोगों की सबसे अच्छी औषधि है। यदि शरीर के किसी भी अंग में दर्द हो तो थोड़ा सा सौंठ का चूर्ण फांक लें। दर्द से तुरंत राहत मिल जाएगी।
2. मेथी गैस व कफ दोनों को ही मिटाने वाली औषधि की तरह कार्य करती है। रोजाना 5 ग्राम मेथी का चूर्ण सुबह-शाम खाने से वात रोग दूर हो जाते हैं। मेथी व सोंठ को समान मात्रा में मिलाकर बारीक चूर्ण बनाकर रख लें, इस चूर्ण को 5-5 ग्राम की मात्रा में गुड़ मिलाकर सुबह शाम खाने से गठिया व जोड़ो के दर्द से छुटकारा मिलता है।
3. जायफल के तेल को सरसों के तेल में मिलाकर जोड़ों की पुरानी सूजन पर मालिश करने से लाभ मिलता है। यह संधिवात के कारण अकड़े हुए संधि-स्थल को खोलता है। जिससे जोड़ों के दर्द से राहत मिलती है। जायफल का चूर्ण शहद के साथ सेवन करने से जोड़ों का दर्द दूर होता है। जायफल को बकरी के दूध में घिसकर उसे थोड़ा गर्म कर लेप करने से सिरदर्द, सिर का भारीपन व जुकाम ठीक हो जाता है।
4. गठिया के दर्द में गाजर बहुत उपयोगी है। इसे उबाल कर भी खाया जा सकता है, लेकिन कच्चे गाजर का रस अधिक लाभप्रद होता है। कच्चा गाजर खाने से शरीर को अधिक पोषण मिलता है। रोजाना गाजर का रस पीने से जोड़ों के दर्द से छुटकारा मिलता है। इसमें आंवले का रस मिला लेने पर ये अधिक गुणकारी हो जाता है।
5. किसी भी तरह का दर्द हो लहसुन के रस के प्रभाव से यूरिक एसिड गलकर तरल रूप में मूत्रमार्ग से बाहर निकल जाता है। इसलिए यह गठिया और संधिवात आदि रोगों में गुणकारी है। लहसुन से पेटदर्द, गठिया, गले के दोष आदि में भी औषधि की तरह काम करता है। दूध और पानी बराबर मात्रा में मिलाकर लहसुन और वायव डिंग को उसमें उबालें। जब पानी जल जाए तो दूध को उतार लें, इसे छानकर ठंडा होने पर पिएं। इससे मांसपेशियां मजबूत होती है। लहसुन व उड़द के बड़े बनाकर तिल के तेल में तल कर खाने से संधिवात और अन्य बीमारियों में राहत मिलती है।
6. हल्दी में विटामिन ए, बी व सी मिलता है। यह गठिया, कुष्ठ, जुकाम व त्वचा के रोगों की चमत्कारिक घरेलू औषधि है। सूजन और हड्डी की टूटन को भी ठीक कर सकती है। हल्दी, चूना और शहद समान मात्रा में लेकर तीनों को अच्छी तरह मिलाकर दर्द के स्थान पर लगाने से गठिया की सूजन दूर होती है। हल्दी के पत्तों को सेककर बांधने से गठिया की सूजन और दर्द दूर होता है।
7. कैसा भी जोड़ो का दर्द हो अगर उस पर अजवाइन का तेल बनाकर लगाया जाए तो दर्द में बहुत जल्दी राहत मिलती है। 10 ग्राम अजवाइन का तेल 10 ग्राम पिपरमेंट और 20 ग्राम कपूर तीनोंं को मिलाकर एक बोतल में भर दें। कमरदर्द या पसलीदर्द, सिरदर्द आदि में तुरंत लाभ पहुंचाने वाली औषधि है। इसकी कुछ बूंदे मलिए, दर्द छूमंतर हो जाएगा। अजवाइन के तेल की मालिश करने से जोड़ों का दर्द तथा शरीर के अन्य भागों पर भी मलने से दर्द में राहत मिलती है। रोज थोड़ी सी अजवाइन खाने से जोड़ों का दर्द दूर हो जाता है।
Saturday, 25 February 2017
पीलिया का घरेलू उपचार / domestic ways to fight jaundice
पीलिया का घरेलू उपचार
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पीलिया में परहेज :
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* पीलिया के रोगियों को मैदा,
मिठाइयां, तले हुए पदार्थ, अधिक
मिर्च मसाले, उड़द की दाल, खोया,
मिठाइयां नहीं खाना चाहिए।
* पीलिया के
रोगियों को ऐसा भोजन
करना चाहिए जो कि आसानी से
पच जाए जैसे खिचड़ी, दलिया, फल,
सब्जियां आदि।
उपचार
********
1- एक गिलास पानी में एक बड़ा चम्मच
पिसा हुआ त्रिफला रात भर के
लिए भिगोकर रख दें। सुबह इस
पानी को छान कर पी जाएँ। ऐसा 12 दिनों तक करें।
2- इस रोग से पीड़ित
रोगियों को नींबू बहुत
फायदा पहुंचाता है। रोगी को 20 ml
नींबू का रस पानी के साथ दिन में 2
से तीन बार लेना चाहिए।
3- गोभी और गाजर का रस बराबर
मात्रा में मिलाकर एक गिलास रस
तैयार करें। इस रस को कुछ
दिनों तक रोगी को पिलाएँ।
4- रोगी को दिन में तीन बार एक एक
प्लेट पपीता खिलाना चाहिए।
5- टमाटर पीलिया के रोगी के बहुत
लाभदायक होता है। एक गिलास
टमाटर के जूस में चुटकी भर
काली मिर्च और नमक मिलाएं।
यह जूस सुबह के समय लें।
पीलिया को ठीक करने का यह एक
अच्छा घरेलू उपचार है।
6- नीम के पत्तों को धोकर इनका रस
निकाले। रोगी को दिन में दो बार
एक बड़ा चम्मच पिलाएँ। इससे
पीलिया में बहुत सुधार आएगा।
7- पीलिया के रोगी को लहसुन
की पांच कलियाँ एक गिलास दूध में
उबालकर दूध पीना चाहिए , लहसुन
की कलियाँ भी खा लें। इससे बहुत
लाभ मिलेगा।
8- रोगी को दिन में तीन बार एक एक
प्लेट पपीता खिलाना चाहिए।
रोग की रोकथाम एवं बचाव
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*खाना बनाने, परोसने, खाने से
पहले व बाद में और शौच जाने के
बाद में हाथ साबुन से अच्छी तरह
धोना चाहिए।
*भोजन जालीदार
अलमारी या ढक्कन से ढक कर
रखना चाहिये,
ताकि मक्खियों व धूल से
बचाया जा सकें।
*ताजा व शुद्व गर्म भोजन करें दूध
व पानी उबाल कर काम में लें।
*पीने के लिये पानी नल,
हैण्डपम्प या आदर्श कुओं
को ही काम में लें तथा मल, मूत्र,
कूडा करकट सही स्थान पर
गढ्ढा खोदकर
दबाना या जला देना चाहिये।
*गंदे, सडे, गले व कटे हुये फल
नहीं खायें धूल
पडी या मक्खियॉं बैठी
मिठाईयॉं का सेवन नहीं करें।
लकवा या पक्षाघात का होम्योपैथिक इलाज / homeopathic remedy of paralysis
http://rajivdixitji.com/2016/11/homeopathic-treatment-of-paralysis-by-rajiv-dixit-madhav-rao/
किडनी का आयुर्वेदिक इलाज / aayurvedic treatment of kidney
http://onlyayurved.com/major-disease/kidney/kidney-transplant/kidney-transplant/?utm_source=Social&utm_medium=UTM103
Saturday, 11 February 2017
कब्ज के लिए आयुर्वेदिक उपचार / aurvedic remedy of indigestion
कब्ज के लिए आयुर्वेदिक उपचार :-
• कब्ज होने पर अधिक मात्रा में पानी पीने की सलाह दी जाती है, गर्म पानी पीने से फ़ायदा होता हैं।
पानी की कमी से आंतों में मल सूख जाता है। और मल
निष्कासन में जोर लगाना पडता है। इसलिये कब्ज से परेशान
रोगियों के लिये सर्वोत्तम सलाह तो यह है कि मौसम के
मुताबिक २४ घंटे में ३ से ५ लिटर पानी पीने की आदत
डालना चाहिये। सुबह उठते ही सवा लिटर पानी पीयें। फ़िर
३-४ किलोमिटर तेज चाल से भ्रमण करें। शुरू में कुछ
अनिच्छा और असुविधा महसूस होगी लेकिन धीरे-धीरे आदत
पड जाने पर कब्ज जड से मिट जाएगी।
• कब्ज के रोगी को तरल पदार्थ व सादा भोजन जैसे दलिया,
खिचड़ी इत्यादि खाना चाहिए।
• कब्ज के दौरान कई बार सीने में भी जलन होने लगती हैं।
ऐसे में एसीडिटी होने और कब्ज होने पर शक्कर और
घी को मिलाकर खाली पेट खाना चाहिए।
• हरी सब्जियों और फलों जैसे पपीता, अंगूर, गन्ना, अमरूद, टमाटर, चुकंदर, अंजीर फल, पालक का रस
या कच्चा पालक, किश्मिश को पानी में भिगोकर खाने, रात को मुनक्का खाने से कब्ज दूर करने में मदद मिलती है।
बालतोड़ का इलाज / home remedy of boils
1. 50 ग्राम नीम की पत्तिया ले कर , पीसकर इसकी पेस्ट बना कर, पेस्ट को बालतोड़ पर लगा लीजिये। और इसमें पस भर गयी हैं तो नीम की पत्तियों में उतनी ही काली मिर्च पीसकर पेस्ट बना लीजिये और लगाए।
2. पीसी हुई मेहन्दी भिगोकर, बालतोड़ के स्थान पर गाढ़ा- गाढ़ा लेप सुबह और रात को लगाए
3. गेंहूँ के 15-20 दाने दांत से चबा-2 कर इसको मुंह में पेस्ट की तरह बना लीजिए,इस पेस्ट को बालतोड़ पर लगाने से 2 से 3 दिन में बालतोड़ ठीक हो जाता है। दिन मे दो-तीन बार लगाये।
4. तुलसी की कुछ पत्तियां और उतनी ही मात्रा मे पीपल की कोपल को पीसकर लेप बनाकर बालतोड़ के स्थान पर लागने अतिशीघ्र लाभ मिलता है। ये प्रयोग 24 घंटे मे दुबारा दोहरा सकते है।
Monday, 6 February 2017
Pest control, domestic ways
1. चूहों से मुक्ति चूहों को पिपरमिंट की गंध बिल्कुल पसंद नहीं होती. अगर घर में चूहे उत्पात मचा रहे हैं तो रूई के कुछ फाहों को पिपरमिंट में डाल कर उनके होने की संभावित जगह के पास रख दें. इसकी गंध से उनका दम घुटेगा और वे मर जाएंगे. 2. कॉकरोच से राहत काली-मिर्च, प्याज और लहसुन को पीसकर मिला लें और इस पेस्ट में पानी डालकर एक सॉल्यूशन तैयार कर लें. इस सॉल्यूशन को उन जगहों पर छिड़कें, जहां कॉकरोच बहुत ज्यादा हैं. इसकी तेज गंध से वे आपका घर छोड़कर भाग जाएंगे. 3. मक्खी से मुक्ति मक्खियों को दूर रखने के लिए कोशिश करें कि घर साफ और दरवाजे बंद रहें. बावजूद इसके मक्खियां घर में आ जाएं तो कॉटन बॉल को किसी तेज गंध वाले तेल में डुबोकर दरवाजे के पास रख दें. तेल की गंध से मक्खियां दूर रहती हैं और इस उपाय को आजमाएंगे तो वे आपके घर से तुरंत भाग जाएंगी. 4. खटमल मारो प्याज का रस खटमल को मारने की प्राकृतिक औषधि है. इसकी गंध से उनकी सांस बंद हो जाती है और ये तुरंत मर जाते हैं. 5. छिपकली भगाओ अंडे के खाली छिलकों को कुछ ऊंचाई पर रख दें. अंडे की गंध से छिपकली दूर भागती हैं. इनको घर से भगाने का यह एक कारगर उपाय है।