Sunday, 23 October 2016

एनीमिया का आयुर्वेदिक इलाज / ayurvedic treatment of animia

एनीमिया का आयुर्वेदिक इलाज
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शरीर में थकान, कमजोरी और त्वचा का रंग
पीला पड़ने से हमारा शक पूरी तरह से सच में बदल
जाता है कि किसी इंसान
को एनीमिया यानी की उसके शरीर में खून
की कमी है। अगर खून में हीमोग्लोबिन
की मात्रा बहुत अधिक कम हो गई है तो,
आपकी त्वचा में सूजन भी देखने को मिल सकती है।
एनीमिया का करण, लोह तत्त्व / विटामिन
बी १२ / फोलिक एसिड की कमी होती है
जो भोजन में कमी के कारण हो सकती है
या अत्यधिक रक्त श्राव के कारण ।
कभी कभी अनुवांशिक कारणों से
भी हो सकती है। खून की कमी अक्सर महिलाओं
में देखी जाती है । अगर आपके घर में
भी किसी को एनीमिया है,
तो अच्छा होगा कि आप इसका आयुर्वेदिक
इलाज ही करें।
अगर शरीर में खून की कमी है तो अपने आहार पर
खास ध्यान दें।
खून बढ़ाने वाले आहार गेहूं, चना, मोठ, मूंग
को अंकुरित कर नींबू मिलाकर सुबह नाश्ते में
खाएं। मूंगफली के दाने गुड़ के साथ चबा-चबा कर
खाएं। पालक, सरसों, बथुआ, मटर, मेथी,
हरा धनिया, पुदीना तथा टमाटर खाएं। फलों में
पपीता, अंगूर, अमरूद, केला, सेब, चीकू, नींबू
का सेवन करें। अनाज, दालें, मुनक्का, किशमिश,
गाजर तथा पिंड खजूर दूध के साथ लें।
1. सेब और चुकंदर रस... एक गिलास सेब का जूस लें,
उसमें एक गिलास चुकंदर का रस और स्वाद के लिये
शहद मिलाएं। इसे रोजाना पिएं। इस पेय में बहुत
सारा लौह तत्व होता है।
2. तिल और शहद ...एक चम्मच तिल का बीज लें, उसे
2 घटों के लिये पानी में भिगो दें। फिर
पानी छान कर बीज को कूंच कर पेस्ट बना लें।
फिर इसमें 1 चम्मच शहद मिलाएं और दिन में इसे
दो बार खाएं।
3. एलोवेरा नाश्ते के 30 मिनट पहले 30 एमएल
एलोवेरा जूस दिन में रोजाना लें।
4. शरीर की मसाज शरीर से टॉक्सिन
निकालना भी जरुरी है। इसलिये अपने शरीर
की किसी अच्छे पेशेवर मसाज करने वाले से मसाज
करवाएं।
5. योगा सूर्यनमस्कार, सर्वांगआसन, शवआसन और
पश्चिमोत्तानासन करने से पूरे शरीर में खून
का फ्लो बढ़ जाता है। इसके अलावा गहरी सांस
भरना और प्रणायाम करना भी लाभदायक
होता है।
6. आम पके हुए आम के गूदे को अगर मीठे दूध के साथ
लिया जाए तो आपका हीमोग्लोबिन बढ़
जाएगा।
7. टिप्स- दिन में दो बार ठंडे पानी से नहाएं।
सुबह के समय सूरज की रौशनी में बैठें। चाय और
कॉफी पीना थोड़ा कम कर दें क्योंकि यह शरीर
को आयरन सोखने से रोकता है।
8. चिकित्सक से परामर्श यह घरेलू नुस्खे पूरी तरह से
आयुर्वेद पर आधारित हैं। यह पूरी तरह से
प्राकृतिक, नुकसान ना पहुंचाने वाला और
आसानी से घर में बनाये जाने वाले नुस्खे हैं। अगर
आपको लगे कि इसे लेने से आपको कोई नुकसान
हो रहा है तो, चिकित्सक से परामर्श करें।

कब्ज का आयुर्वेदिक इलाज / ayurvedic remedy of indigestion and gas

सारी बिमारियों की जड़ कब्ज का परमानेंट आयुर्वेदिक इलाज आयुर्वेद कहता है की लगभग सारी बिमारियों का सबसे पहला कारण या जड़ कब्ज ही होती है इसलिए कभी भी कब्ज को हल्के में नहीं लेना चाहिए !

एक पुरानी कहावत भी है की जिस का पेट साफ़ हो और जिस पर कोई कर्ज ना हो तो उससे बड़ा सुखी कौन है !

कब्ज होने का अर्थ है, पेट ठीक तरह से साफ नहीं हुआ है या शरीर में तरल पदार्थ की कमी है।

अगर आपको लंबे समय से कब्ज रहता है और आपने इस बीमारी का इलाज नहीं कराया है तो ये एक भयंकर बीमारी का रूप ले सकती है।

कब्ज होने पर व्यक्ति को पेट संबंधी दिक्कते भी होती हैं, जैसे पेट दर्द होना, ठीक से फ्रेश होने में दिक्कत होना, शरीर का मल पूरी तरह से न निकलना इत्यादि । आइए जानते हैं कब्ज के लिए आयुर्वेदिक उपचार –

– रोज लैट्रिन (शौच) जाने का समय बिल्कुल निश्चित होना चाहिए ! क्योंकि अगर समय निश्चित हो तो बिना किसी दवा के भी पेट साफ़ होने लगता है ! रोज निश्चित समय पर जाकर लैट्रिन में बैठने से कुछ दिन बाद अपने आप बिना किसी मेहनत के आराम से पेट साफ़ होने लगता है ! अगर लैट्रिन जाने का रोज का समय बार बार बदलेगा तो निश्चित कब्ज होनी ही है (नोट – लैट्रिन या पेशाब करते समय जोर लगाना बहुत हानिकारक होता है इसलिए अपने से जितना मल या पेशाब आसानी से बाहर निकल जाय उतना ही ठीक है, और ज्यादा मल या पेशाब जबरदस्ती बाहर निकालने के लिए कभी भी जोर नहीं देना चाहिए) !

– अगर किसी को कब्ज हो तो उसे अधिक मात्रा में पानी पीने की सलाह दी जाती है तथा गर्म पानी पीने से ज्यादा फ़ायदा होता हैं। पानी की कमी से आंतों में मल सूख जाता है और मल निष्कासन में जोर लगाना पडता है। इसलिये कब्ज से परेशान रोगियों के लिये सर्वोत्तम सलाह तो यह है कि मौसम के मुताबिक 24 घंटे में 3 से 5 लिटर पानी पीने की आदत डालना चाहिये। और अगर एक नार्मल आदमी भी इतना पानी रोज पिए तो उसे कभी कब्ज होगी ही नहीं ! सुबह उठते ही 1 लिटर पानी पीयें। फ़िर 2 से 5 किलोमीटर तेज चाल से मॉर्निंग वाक (पैदल चले) करें। शुरू में कुछ अनिच्छा और असुविधा महसूस होगी लेकिन धीरे-धीरे आदत पड़ जाने पर कब्ज जड़ से ही मिट जाएगी (ध्यान रखें सिर्फ पानी की सही मात्रा पीने भर से ही, बिना किसी दवा के, कब्ज की बीमारी निश्चित ठीक हो जाती है) !

– मेथी के दानों को हल्की आंच पर भून (सेंक) कर रात को 1-2 चम्मच खाने से सुबह पेट बढ़िया साफ़ होता है ! मेथी के दानों को बिना भूजे हुए खाने से इसका उल्टा फायदा मिलता है मतलब अगर दस्त हो रही हो तो कच्ची मेथी खाने से दस्त बंद हो जाती है ! मेथी कच्ची खाएं या भूजी, ये पेट के अलावा डायबिटिज तथा ह्रदय रोगों में भी बहुत फायदा है !

– कब्ज के पुराने रोगी को तरल पदार्थ, सादा और आसानी से पचने वाला खाना (जैसे दलिया, खिचड़ी) इत्यादि ही अधिक खाना चाहिए।

– कब्ज के दौरान कई बार सीने में भी जलन होने लगती हैं। ऐसे में एसीडिटी होने और कब्ज होने पर शक्कर और देशी गाय माता के घी को मिलाकर खाली पेट खाना चाहिए।

– हरी सब्जियों और फलों जैसे पपीता, अंगूर, गन्ना, अमरूद, टमाटर, चुकंदर, अंजीर फल, पालक का रस या कच्चा पालक, किशमिश को पानी में भिगोकर खाने, रात को मुनक्का खाने से कब्ज दूर करने में मदद मिलती है।

– इसबगोल की की भूसी कब्ज में परम हितकारी है। पानी के साथ 2-3 चम्मच इसबगोल की भूसी रात को सोते वक्त लेना फ़ायदेमंद है और इससे सुबह पेट आराम से साफ़ होता है (इसबगोल एक कुदरती रेशा है और आंतों की सक्रियता बढाता है) !

– श्री बाबा रामदेव के पतंजलि आयुर्वेद के भी कई प्रोडक्ट हैं (जैसे – दिव्य चूर्ण, उदर कल्प चूर्ण, त्रिफला चूर्ण, हरीतकी चूर्ण आदि) जो कब्ज में बहुत फायदेमंद हैं ! ये प्रोडक्ट सुरक्षित हैं और लम्बे समय तक इनका इस्तेमाल किया जा सकता है फिर रोज इनकी मात्रा धीरे धीरे कम करने से बिना इन प्रोडक्ट को खाए भी, पेट साफ़ होने लगता है !

– खाने में हरे पत्तेदार सब्जियों के अलावा रेशेदार सब्जियों का सेवन खासतौर पर करना चाहिए।

– गर्म पानी और गर्म दूध कब्ज दूर करते हैं। रात को गर्म दूध में भारतीय देशी गाय माता का घी डालकर पीना कब्ज को दूर करने में कारगार है।

– रात सोते समय, दूध में 2-3 छुवारे उबाल कर, छुवारे खाकर दूध पीने से, सुबह बढियां पेट साफ़ होता है !

– नींबू को गर्म पानी में डालकर पीने से कब्ज दूर होती है। सुबह-सुबह सिर्फ सादा गर्म पानी पीने से भी कब्ज को दूर करने में बहुत मदद मिलती है।

– अलसी के बीज का पाउडर पानी के साथ लेने से कब्ज में राहत मिलती है !

– दो सेब रोज खाने से या केला गर्म दूध के साथ रोज लेने से कब्ज में लाभ होता है।
  अमरूद और पपीता ये दोनो फ़ल कब्ज रोगी के लिये अमृत समान है। ये फ़ल दिन मे किसी भी समय खाये जा सकते हैं। इन फ़लों में पर्याप्त रेशा होता है और आंतों को शक्ति देते हैं। मल आसानी से विसर्जित होता है।

– सूखे अंगूर यानी किशमिश पानी में 3 घन्टे गलाकर खाने से आंतों को ताकत मिलती है और दस्त आसानी से आती है।

– अंजीर कब्ज हरण फ़ल है। 3 – 4 अंजीर फ़ल रात भर पानी में गलावें। सुबह खाएं। आंतों को गतिमान कर कब्ज का निवारण होता है।

– मुनक्का में कब्ज नष्ट करने के गुण हैं। 7 मुनक्का रोजाना रात को सोते वक्त लेने से कब्ज रोग में आराम मिलता है

Tuesday, 18 October 2016

खाज-खुजली का आयुर्वेदिक इलाज / ayurvedic treatment of skin itching

खाज-खुजली :
• 20 ग्राम अजवाइन को 100 मिलीलीटर पानी में उबाल लें और छान लें फिर शरीर में जहां पर खुजली हो उस भाग को इस पानी से साफ करने से खुजली मिट जाती है।
• अजवाइन को पानी के साथ पीसकर लगाने से खुजली दूर हो जाती है। हल्के गर्म पानी के अंदर अजवाइन पीसकर लेप करने से खुजली दूर हो जाती है।
• जंगली अजवाइन को तेल में पका लें और उस तेल को खुजली वाले स्थान पर लगाने से लाभ होता है।

Natural ways to prepare various face pack at home

पपाया फेस पैक

पपीते से आप अपने चेहरे का रंग काफी हद तक निखार सकती हैं। पपीते को थोड़ी सी दही के साथ मिक्स कर के चेहरे के लिये फेयरनेस पैक बनाया जा सकता है।

नेमन फेस पैक

नींबू अक्सर ब्लीचिंग के लिये प्रयोग किया जाता है। इसे लगाने से भी चेहरे का रंग निखरता है। इसे सीधे लगाएं या फिर किसी पैक में मिला कर लगाएं। भारतीय त्वचा के लिये ओटमील काफी अच्छा है। इस फेस पैक को चेहरे पर लगाइये और फिर देखिये फरक।

आलू

आलू को छील कर घिस लें और चेहरे पर लगाएं। इससे चेहरे पर मुंहासों के दाग भी गायब हो जाएंगे और चेहरा भी दमक जाएगा।

टमाटर

टमाटर के पल्प को लगाने से तुरंत ही फरक देखने को मिलता है। इसे थोडे़ से नींबू के रस के साथ आजमाइये। यह संवेदनशील त्वचा के लिये भी काफी अच्छा है।

बादाम

कुछ बादाम को रातभर के लिये पानी में भिगो दें। फिर उसे छील कर पीस लें और उसे शहद के साथ मिक्स करें। अब इसे चेरहे पर लगा लें और कुछ देर के बाद चेहरे को धो लें।

बेसन फेस पैक

अगर आपको हफ्तेभर में गोरा बनना है तो बेसन, हल्दी और मलाई का फेस पैक लगाइये।

मिंट फेस पैक

यह त्वचा को ठंडक पहुंचाता है। पुदीने की पत्तियों का फेस पैक लगाने से पोर्स खुलते हैं, जिससे रंग निखरता है।

बनाना फेस पैक

थोड़े से केले को मैश कर के उसमें थोड़ी सी मलाई मिलाएं और चेहरे तथा गर्दन पर लगाएं। इसे 20 मिनट के लिये पानी से धो लें।

चंदन पावडर फेस पैक

इसे किसी भी प्रकार की स्किन पर प्रयोग किया जा सकता है। चेहरा गोरा करने के लिये इसमें रोज वॉटर मिला कर मुंह पर लगाएं।

अंडे का फेस मास्क

अंडे में काफी सारा प्रोटीन होता है। इससे चेहरे का टेक्सचर ठीक होता है।

गाजर फेस पैक

1 गाजर को पीस कर पेस्ट बना लें। फिर उसमें ताजी दही मिक्स करें और फिर इसे चेहरे पर लगा लें। इससे आपके चेहरे का रंग धीरे धीरे साफ होना शुरु हो जाएगा।

आयुर्वेदिक बालतोड़ का इलाज / ayurvedic Treatment of Boils

बालतोड़ का इलाज / Treatment of Boils---

आमतौर पर बालतोड़ हाँथ या पैर के बाल टूटने पर हो जाता है जिससे इंसान को हाँथ या पैर हिलाने में भी तकलीफ होती है। ऐसे में बालतोड़ होने के साथ ही #गेहूं के कुछ दाने को मुंह में ले कर चबाएं और फिर उसे मुंह से निकाल कर बालतोड़ पर लगायें। दिन में अगर आप 3 बार गेंहूँ को चबा कर बालतोड़ पर लगाते है तो आपका बालतोड़ का जख्म नहीं बढेगा है ।

#पीपल के पेड़ का #छाल को उखाड़ लें और फिर उसे घिस कर उसमें थोड़ा थोड़ा पानी मिलकर उसका पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को दिन में २ से ३ बार बालतोड़ पर लगाएं। इसे लगाने से बालतोड़ का जख्म और उसका दर्द दोनों में राहत मिलती है ।

लगभग #20g नीम के पत्ते को ले कर उसमें 20g #काली मिर्च (black pepper) को मिलकर पीस कर उसका पेस्ट तैयार कर लें। अब उस पेस्ट को बालतोड़ के जख्म पर लगा कर उसपर किसी कपड़े से पट्टी बांध लें। आप चाहे तो बालतोड़ पर केवल नीम के पत्ते को भी पीस कर लगा सकते है । इन दोनों उपचार से बालतोड़ जल्दी ठीक हो जाता है ।

एक चम्मच #मैदे को ले कर #घी में थोड़ी देर तक पका कर उसका पेस्ट बना लें और फिर उस पेस्ट को ठंडा कर के सोते समय बालतोड़ के जख्म पर लगा कर किसी कपड़े से बांध लें। एक से दो दिन ऐसा करने से बालतोड़ ठीक हो जायेगा ।

#मेहंदी के पत्ते को पीस कर या फिर मेहंदी के powder को कुछ देर तक फुलाकर  उसके लेप को बालतोड़ के जख्म पर गाढ़ा कर के लगाने से बालतोड़ ठीक हो जाता है ।

बच्चे को बिस्तर पर पेशाब करने से बचने का आयुर्वेदिक इलाज / ayurvedic ways to treat child from urinating in bed

बच्चे का बिस्तर पर पेशाब करना..

बच्चे दिनभर कुछ न कुछ रहते हैं। बार -बार कुछ खाने से बच्चों की पाचन क्रिया खराब हो जाती है। कुछ बच्चे ज्यादा ठंडे पदार्थ खाते हैं तो कुछ बच्चे ज्यादा गरिष्ठ या भारी खाने वाले पदार्थो का सेवन करते हैं। गरिष्ठ या भारी भोजन बहुत देर में पचता है। गरिष्ठ या भारी भोजन खाने वाले बच्चे रात में सोते समय ज्यादा पेशाब करते हैं। कुछ बच्चे दिन में ज्यादा समय खेलते -कूदते रहते हैं जिसकी वजह से बच्चे बुरी तरह से थक जाते हैं। ऐसे बच्चों को ज्यादा भूख लगती है और वह खाते ही सो जाते हैं। थकावट की वजह से बच्चे रात को सोते हुए बार -बार पेशाब करते हैं। कुछ मां- बाप काम की वजह से बच्चों को खाना देर से खिलाते हैं और फिर बच्चे खाना खाते ही बिस्तर पर चले जाते हैं और सो जाते हैं। इसलिए वह बच्चे रात को बिस्तर पर पेशाब जरूर करते है। कई अनुभवियों के अनुसार स्नायु विकृति के कारण बच्चे रात को सोते हुये बिस्तर पर पेशाब कर देते हैं। पेट में कीड़े होने पर भी बच्चे सोते हुए बिस्तर पर पेशाब कर देते हैं। स्नायु विकृति में शरीर में बहुत ज्यादा उत्तेजना होती है। ऐसे में बच्चा सोते हुए पेशाब करने पर काबू नहीं कर पाता और पेशाब कर देता है। पेशाब की नली में रोग के कारण भी बच्चा सोते हुए पेशाब कर देता है। रात को सोते समय बच्चे का बिस्तर में पेशाब करने का रोग समाप्त करने के लिये कोई भी औषधि देने से पहले माता- पिता को बच्चे के भोजन की कुछ आदते सुधारनी जरूरी हैं। बच्चे को सोने से 1 घंटा पहले भोजन करा देना चाहिए। बच्चे को सोने के बाद उसे जगाकर कुछ भी खाने और पीने को नहीं देना चाहिए। बच्चे को बिस्तर पर जाने से पहले एक बार पेशाब जरूर करा देना चाहिए। 
➡ बिस्तर पर पेशाब करने का घरेलु उपाय :
जामुन की गुठली को पीसकर चूर्ण बना लो। इस चूर्ण की एक चम्मच मात्रा पानी के साथ देने से लाभ होता है।रात को सोते समय प्रतिदिन छुहारे खिलाओ।200 ग्राम गुड़ में 100 ग्राम काले तिल एवं 50 ग्राम अजवायन मिलाकर 10-10 ग्राम की मात्रा में दिन में दो बार चबाकर खाने से लाभ होता है।रात्रि को सोते समय दो अखरोट की गिरी एवं 20 किशमिश 15-20 दिन तक निरन्तर देने से लाभ होता है।सोने से पूर्व शहद का सेवन करने से लाभ होता है। रात को भोजन के बाद दो चम्मच शहद आधे कप पानी में मिलाकर पिलाना चाहिए। यदि बच्चे की आयु छः वर्ष हो तो शहद एक चम्मच देना चाहिए। इस प्रयोग से मूत्राशय की मूत्र रोकने की शक्ति बढ़ती है।पेट में कृमि होने पर भी बालक शय्या पर मूत्र कर सकता है। इसलिए पेट के कृमि का इलाज करायें। तिल और गुड़ को एक साथ मिलाकर बच्चे को खिलाने से बच्चे का बिस्तर पर पेशाब करने का रोग समाप्त हो जाता है। तिल और गुड़ के साथ अजवायन का चूर्ण मिलाकर खिलाने से भी लाभ होता है।लगभग 10 -10 ग्राम आंवला और काला जीरा लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में इतनी ही मिश्री पीसकर मिला लें। यह 2 - 2 ग्राम चूर्ण रोजाना पानी के साथ खाने से बच्चे का बिस्तर में पेशाब करना बंद हो जाता है।आंवले को बहुत अच्छी तरह से बारीक पीसकर कपड़े में छानकर चूर्ण बना लें। यह 3 - 3 ग्राम चूर्ण रोजाना शहद में मिलाकर बच्चों को सुबह -शाम चटाने से बच्चे बिस्तर में पेशाब करना बंद कर देते हैं।रोजाना 5 मुनक्का खाने से बच्चे का बिस्तर में पेशाब करने का रोग दूर होता है।

भोजन के नियम व रस

🌅 भोजन नियम व रस 🌅

हमारे भोजन में 6 रस  होते है । इसीलिए हमारे भोजन को षडरस कहा जाता है ।   

१. अम्ल ( खट्टा ) २. मधुर ( मीठा ) ३. लवण ( नमकीन )  ४.कटु ( कडुवा )  ५. तिक्त ( चरपरा ) ६. कषाय ( कसैला ) 

प्रत्येक रस का सेवन नियमित एवं सीमिति मात्रा में किया जाता है , अधिक या कम मात्रा में सेवन से विमारियां पैदा होती है ।

1. मधुर ( Sweet चीनी ) :- मन में तृप्ति मिलती है । 
*यह वात और पित्त का शमन करता है जबकि कफ को विकृत करता है* ।
* धातु एवं ओज की वृद्धि करते हुए ज्ञानेन्द्रियों को स्वच्छ रखता है ।
*इस रस को अधिक सेवन करने से आलस्य व कम सेवन करने से कमजोरी महसूस होती है* ।

2. अम्ल ( खट्टा Acid नीबूं ) :-  अधिक सेवन से मुंह व गले में जलन उत्पन्न करता है ।

*यह मुंह से लार को उत्पन्न करता है*।
*यह वात का शमन करता है , तथा पित्त एवं कफ को विकृत करता है* ।

3. लवण ( नमक /पटु Salt ):- यह मुँह में डालते ही घुलता है , इसका अधिक सेवन जलन पैदा करता है ।

*यह वात का शमन करता है* । *जबकि  पित्त एवं कफ़ को विकृत करता है* ।

* लवण की अधिकता से नपुंसकता , बांझपन , रक्तपित्त आदि विमारियाँ होती है ।

* लवण के कमी से भोजन में अरुचि व पाचन क्रिया को प्रभावित करता है ।

4. कटु ( कड़वा pungent करेला , नीम ):- 

*यह जीभ के संपर्क में आते ही कष्ट पहुँचाता है* ।
*इसके संपर्क से आँखों व मुँह से जलस्राव होता है ।
*यह कफ का शमन करता है परन्तु  वात व पित्त को विकृत करता है* ।

*मेथी , मंगरैला , अजवाइन* आदि ।

5. तिक्त ( उष्ण Bitter मिर्च ) :- यह जीभ को अप्रिय होता है , स्वाद में एकाधिकार होने के कारण इसकी उपस्थिति में अन्य स्वाद का पता नहीं लगता है ।

*यह वात को विकृत करता है जबकि पित्त व कफ का शमन करता है* ।

* तिक्त रस हल्दी में भी पाया जाता है ।

  6. कषाय ( कसैला Astringent आंवला ) :-
*इसके सेवन से जीभ की चिपचिपाहट दूर होता है ।
*यह अन्य रसों को अनुभव नहीं करने देता है* ।
*यह पित्त एवं कफ को शमन करता है परन्तु वात को विकृत करता है* ।

   हमें अपना भोजन अपनी प्रकृति को ध्यान में रखते  हुए करना चाहिए , तभी आपका वात-पित्त-कफ  इन षडरसों द्वारा नियंत्रित होगा । और आपका आहार सुखदायी होगा । अपनी प्रकृति के विपरीत रसों के सेवन से आपका वात-पित्त-कफ कुपित होगा और आप अस्वस्थ्य होंगें ।

*प्रातः के सूखा पदार्थ सर्वप्रथम खायें , फिर द्रव्य पदार्थ लें इसके बाद भारी चिकना और हल्का मीठा पदार्थ पहले लें, यदि फल है तो पहले मीठे फल खाएं । अम्ल व लवण मध्य मे खायें , कडुवा , तीखा व कसैला अंत मे खायें* । यदि भूख कम लगती है तो गर्म पदार्थ पहले खायें ।
*अति मधुर भोजन अग्नि को नष्ट करता है* ।
*अत्यंत लवण युक्त भोजन आंखो के लिए हानिकारक है* ।
*अति तीक्ष्ण व अति अम्ल युक्त भोजन वृद्धावस्था को बढ़ाता है* ।

👉🏻 दही , मधु , घृत , सत्तू , खीर, कांजी , को छोड़कर अन्य आहार द्रव्य खाते समय थोड़ा छोड़ना चाहिए ।

*पेट दर्द मे घी के साथ मिश्रित हींग*
*पुराने ज्वर मे मधु के साथ पीपर*
*वातरोग मे घी मे भुना लहसुन लाभप्रद है* ।

     इसे ऐसे समझे :-

  * *रसों का दोषों से सम्बन्ध*  :-

दोष  लाभकारी रस    प्रकोप
                                    रस  
वात - मधुर,अम्ल ।  कटु , 
          लवण ।    तिक्त ,कषाय
                          
पित्त - तिक्त,कषाय। अम्ल,
          मधुर।      कटु , लवण , 
            
कफ - कटु, तिक्त। मधुर,
          कषाय ।  अम्ल, लवण
                       

** रसों का पंचभूतों से सम्बन्ध **
           
रस                        महाभूत
1. मधुर रस           पृथ्वी , जल
2. अम्ल रस          पृथ्वी , अग्नि 
3. लवण रस          जल , अग्नि
4. तिक्त रस           वायु, आकाश
5. कटु रस              वायु , अग्नि
6. कषाय रस           वायु , पृथ्वी 

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* आयुर्वेद में तीन-तीन रसों का संयुग्म बनाया गया है , जिनसे वात-पित्त-कफ असंतुलित भी होते और संतुलित भी होते है जाने कैसे ..?

*तत्राद्या मारूतं धन्ति त्रयस्तदाय: कफम्*, 
*कषायतिक्तमधुरा: पित्तमन्ये तु कुर्वते* ।।
   
* कफ वर्धक व कफ शामक :-  यदि आपके भोजन में मीठे , खट्टे , और नमकीन पदार्थ होंगे तो आपका कफ बढेगा । लेकिन यदि आपके भोजन में कडुवे , चरपरे , कसैले पदार्थ हैं तो आपका कफ शांत होगा ।

* पित्त वर्धक व पित्त शामक :-  यदि आपके भोजन में कडुवे , नमकीन , खट्टे पदार्थ होंगे तो यह आपके पित्त को बढ़ाएंगे जबकि मीठे , चरपरे कसैले  पदार्थ पित्त को शांत करेंगे ।

*  वात-वर्धक व वात शामक :- कडुवे , चरपरे कसैले आहार  आपके वात को बढ़ा देते हैं जबकि मीठे,  खट्टे और नमकीन  युक्त भोज्य पदार्थो के सेवन से आपका वात नियंत्रित होता है ।

    => *यह हमेशा ध्यान रखे कि आपके भोजन में आपके प्रकृति के विपरीत पदार्थों की मात्रा अल्प हो तथा आपके प्रकृति के अनुरूप भोजन में पदार्थों की मात्रा अधिक हो* ।

Tuesday, 11 October 2016

आँखों की असह्य पीड़ा मिटाने हेतू इलाज / remedies for various eyes pains

आँखों की असह्य पीड़ा मिटाने हेतु -----
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(1)आँखों से पानी आना :- आँखों से पानी आता हो तो सूखे धनिये का काड़ा २-२ बूंद आँखों में डाल लीजिये, आँखों
से पानी आना बंद हो जायेगा ।

(2)सौंधी (रात को न दिखना) (Night Blindness)- पहला प्रयोगः बेलपत्र का 20 से 50 मि.ली. रस पीने और 3 से 5 बूँद आँखों से आँजने से रतौंधी रोग में आराम होता है।
दूसरा प्रयोगः श्याम तुलसी के पत्तों का दो-दो बूँद रस 14 दिन तक आँखों में डालने से रतौंधी रोग में लाभ होता है। इस प्रयोग से आँखों का पीलापन भी मिटता है।
तीसरा प्रयोगः 1 से 2 ग्राम मिश्री तथा जीरे को 2 से 5 ग्राम गाय के घी के साथ खाने से एवं लेंडीपीपर को छाछ में घिसकर आँजने से रतौंधी में फायदा होता है।
चौथा प्रयोगः जीरा, आँवला एवं कपास के पत्तों को समान मात्रा में लेकर पीसकर सिर पर 21 दिन तक पट्टी बाँधने से लाभ होता है।

(3) आँखों की गर्मी या आँख आने परः नींबू एवं गुलाबजल का समान मात्रा का मिश्रण एक-एक घण्टे के अंतर से आँखों में डालने से एवं हल्का-हल्का सेंक करते रहने से एक दिन में ही आयी हुई आँखें ठीक होती हैं।

(4) आँख की अंजनी (मुहेरी या बिलनी) (Stye)- हल्दी एवं लौंग को पानी में घिसकर गर्म करके अथवा चने की दाल को पीसकर पलकों पर लगाने से तीन दिन में ही गुहेरी मिट जाती है।

(5) आँख में कचरा जाने परः पहला प्रयोगः सौ ग्राम पानी में एक नींबू का रस डालकर आँखे धोने से कचरा निकल जाता है। दूसरा प्रयोगः आँख में चूना जाने पर घी अथवा दही का तोर (पानी) आँजें।

(6) आँख दुखने परः गर्मी की वजह से आँखें दुखती हो तो लौकी को कद्दूकस करके उसकी पट्टी बाँधने से लाभ होता है।

(7) आँखों से पानी बहने परः पहला प्रयोगः आँखें बन्द करके बंद पलको पर नीम के पत्तों की लुगदी रखने से लाभ होता है। इससे आँखों का तेज भी बढ़ता है।
दूसरा प्रयोगः रोज जलनेति करें। 15 दिन तक केवल उबले हुए मूँग ही खायें। त्रिफला गुगल की 3-3 गोली दिन में तीन बार चबा-चबाकर खायें तथा रात्रि को सोते समय त्रिफला की तीन गोली गर्म पानी के साथ सेवन करें। बोरिक पावडर के पानी से आँखें धोयें इससे लाभ होता है।

(8) सर्वप्रकार के नेत्ररोगः पहला प्रयोगः पैर के तलवे तथा अँगूठे की सरसों के तेल से मालिश करने से नेत्ररोग नहीं होते।
दूसरा प्रयोगः ॐ अरुणाय हूँ फट् स्वाहा। इस मंत्र के जप के साथ-साथ आँखें धोने से अर्थात् आँख में धीरे-धीरे पानी छाँटने से असह्य पीड़ा मिटती है।
तीसरा प्रयोगः हरड़, बहेड़ा और आँवला तीनों को समान मात्रा में लेकर त्रिफलाचूर्ण बना लें। इस चूर्ण की 2 से 5 ग्राम मात्रा को घी एवं मिश्री के साथ मिलाकर कुछ महीनों तक सेवन करने से नेत्ररोग में लाभ होता है।

(9) आँखों की सुरक्षाः रात्रि में 1 से 5 ग्राम आँवला चूर्ण पानी के साथ लेने से, हरियाली देखने तथा कड़ी धूप से बचने से आँखों की सुरक्षा होती है।