*श्वास अथवा दमा श्वसन तंत्र की भयंकर कष्टदायी बीमारी है। यह रोग किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है।श्वास पथ की मांसपेशियों में आक्छेप होने से सांस लेने निकालने में कठिनाई होती है।खांसी का वेग होने और श्वासनली में कफ़ जमा हो जाने पर तकलीफ़ ज्यादा बढ जाती है।रोगी बुरी तरह हांफ़ने लगता है।*
एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थ या वातावरण के संपर्क में आने से,बीडी,सिगरेट धूम्रपान करने से,ज्यादा सर्द या ज्यादा गर्म मौसम,सुगन्धित पदार्थों,आर्द्र हवा,ज्यादा कसरत करने और मानसिक तनाव से दमा का रोग उग्र हो जाता है।
*यहां ऐसे घरेलू नुस्खों का उळ्लेख किया जा रहा है जो इस रोग ठीक करने,दौरे को नियंत्रित करने,और श्वास की कठिनाई में राहत देने वाल सिद्ध हुए हैं--*
१) तुलसी के १५-२० पत्ते पानी से साफ़ करलें फ़िर उन पर काली मिर्च का पावडर बुरककर खाने से दमा मे राहत मिलती है।
*२) एक केला छिलका सहित भोभर या हल्की आंच पर भुन लें। छिलका उतारने के बाद काली मिर्च का पावडर उस पर बुरककर खाने से श्वास की कठिनाई तुरंत दूर होती है।*
३) दमा के दौरे को नियंत्रित करने के लिये हल्दी एक चम्मच दो चम्मच शहद में मिलाकर चाटलें।
*४) तुलसी के पत्ते पानी के साथ पीस लें ,इसमें दो चम्मच शहद मिलाकर सेवन करने से दमा रोग में लाभ मिलता है।*
५) पहाडी नमक सरसों के तेल मे मिलाकर छाती पर मालिश करने से फ़ोरन शांति मिलती है।
*६) मैथी के बीज १० ग्राम एक गिलास पानी मे उबालें तीसरा हिस्सा रह जाने पर ठंडा करलें और पी जाएं। यह उपाय दमे के अलावा शरीर के अन्य अनेकों रोगों में फ़ायदेमंद है।*
७) एक चम्मच हल्दी एक गिलास दूध में मिलाकर पीने से दमा रोग काबू मे रहता है।एलर्जी नियंत्रित होती है।
*८) सूखे अंजीर ४ नग रात भर पानी मे गलाएं,सुबह खाली पेट खाएं।इससे श्वास नली में जमा बलगम ढीला होकर बाहर निकलता है।*
९) सहजन की पत्तियां उबालें।छान लें उसमें चुटकी भर नमक,एक चौथाई निंबू का रस,और काली मिर्च का पावडर मिलाकर पियें।दमा का बढिया इलाज माना गया है।
*१०) शहद दमा की अच्छी औषधि है।शहद भरा बर्तन रोगी के नाक के नीचे रखें और शहद की गन्ध श्वास के साथ लेने से दमा में राहत मिलती है।*
११) दमा में नींबू का उपयोग हितकर है।एक नींबू का रस एक गिलास जल के साथ भोजन के साथ पीना चाहिये
*१२) लहसुन की ५ कली चाकू से बारीक काटकर ५० मिलि दूध में उबालें।यह मिक्श्चर सुबह-शाम लेना बेहद लाभकारी है।*
१३)-अनुसंधान में यह देखने में आया है कि आंवला दमा रोग में अमृत समान गुणकारी है।एक चम्मच आंवला रस मे दो चम्मच शहद मिलाकर लेने से फ़ेफ़डे ताकतवर बनते हैं।
*14) दमे का मरीज उबलते हुए पानी मे अजवाईन डालकर उठती हुई भाप सांस में खींचे ,इससे श्वास-कष्ट में तुरंत राहत मिलती है।*
१५) लौंग ४-५ नग लेकर १०० मिलिलिटर पानी में उबालें आधा रह जाने पर छान लें और इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर गरम गरम पीयें। ऐसा काढा बनाकर दिन में तीन बार पीने से रोग नियंत्रित होकर दमे में आशातीत लाभ होता है।
*१६) चाय बनाते वक्त २ कली लहसुन की पीसकर डाल दें। यह दमे में राहत पहुंचाता है। सुबह-शाम पीयें।*
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Sunday, 24 December 2017
दमा अथवा स्वास सम्बन्धी परेशानी के उपाय
Saturday, 23 December 2017
फटी एडियो का उपचार / reamady from heal crack
फटी एडियो का उपचार
गुनगुने पानी में दो चम्मच नमक डालकर उस पानी में 10-15 मिनट दोनों पैरों को डालकर बैठें तत्पश्चात तलवों को किसी तौलिए से रगड़कर पोंछ लेना चाहिए। ऐसा करने से तलुवों का मैल निकल जायेगा। इसके बाद एड़ियों और तलवों पर सरसों का तेल मलकर सूती जुराबें पहन लेनी चाहिए। इस प्रकार से उपचार करने से फटी हुई एड़ियां कुछ ही दिनों में ठीक हो जाती हैं। एडियों की साफ-सफाई का ध्यान रखें
स्नान करते समय एड़ियों को अच्छी तरह से साफ करना चाहिए और इसके बाद एड़ियों पर सरसों का तेल लगाना चाहिए। नाभि में सरसों का तेल लगायें स्नान करने के बाद या फिर सोते समय नाभि में सरसों का तेल लगना चाहिए। इसके बाद 20-25 बार नाभि को मलना चाहिए।
रात्रि सोने से पहले ग्लिसरीन, गुलाबजल और जैतून के तेल को समभाग एकसाथ मिला लें। फिर इस तेल से तलुवों तथा एड़ियों की मालिश करें। ऐसा प्रतिदिन करने से यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।
फलों का पेस्ट है असरकारी कच्चे आम को पीसकर फटी हुई एड़ियों पर मालिश करने से बहुत जल्द ही फटी हुई एड़ियां ठीक हो जाती हैं।
फटी हुई एड़ियों को ठीक करने के लिए कच्चे पपीते को पीस लें। इसके बाद इसमें जरा-सा सरसों का तेल तथा हल्दी मिलाएं और इस पेस्ट को एड़ियों पर लगाकर कपड़ा बांध लें। इस प्रकार से उपचार करने से कुछ ही दिनों में फटी हुई एड़ियां ठीक हो जाती हैं।
हरी मुलायम घास और नीम के 10 से 12 पत्ते पीसकर पूरी पगतली में अच्छी तरह से लगाकर आधे घंटे बाद धो लें। इससे एड़िया जल्दी ही ठीक हो जाती है।
बरगद का दूध फटी हुई एड़ियों पर लगाने से बहुत अधिक लाभ मिलता है।
फटी हुई एड़ियों पर पिसी हुई मेहंदी लगाने से एड़ियां जल्दी ठीक हो जाती हैं।
सरसों के तेल में मधु मख्खी के छत्ते का मोम मिलाकर फटी हुई एड़ियों पर लगाने से एड़िया जल्दी ठीक हो जाती है।
फटी हुई एड़ियों पर प्रतिदिन घी लगाने से एड़ियां जल्दी ठीक हो जाती हैं।
पानी में शलगम के टुकड़ों को डालकर उबाल लें। इसके बाद इस पानी से फटी हुई एड़ियों को धोने से फटी हुई एड़ियां ठीक हो जाती हैं।
फटी हुई एड़ियों को साबुन, राख, मिट्टी तथा कीचड़ आदि से बचाकर रखना चाहिए।
सप्ताह में एक बार नींबू का रस मिले हुए पानी से अपने पैरों को धोना चाहिए।
पाचनशक्ति के ज्यादा कमजोर हो जाने के कारण भी एड़ियां फटने लगती हैं इसलिए यदि पाचनशक्ति कमजोर हो गई हो तो सबसे पहले उसको ठीक करने का उपाय करना चाहिए। इसके बाद एड़ी फटने का इलाज कराना चाहिए। पाचन शक्ति को ठीक करने के लिए पौष्टिक तत्व युक्त तथा पाचनशक्ति को बढ़ाने वाले पदार्थ और विटामिन `सी´ युक्त पदार्थों का सेवन अधिक मात्रा में करना चाहिए।
एड़ियों को फटने से रोकने के लिए प्रतिदिन हरी सब्जियों का सेवन करना चाहिए तथा सुबह के समय में नंगे पैर घास पर चलना चाहिए l
बीड़ी तम्बाकू धूम्रपानगुटखा छोड़ने के घरेलु नुस्खे / natural ways to get rid of tobacco and smoking
गुटखा छोड़ने के घरेलु नुस्खे
100 ग्राम अजवायन और 100 ग्राम बड़ी सोंफ लेकर दोनों को खूब साफ कर ले और इसमें 60 ग्राम काला नमक मिलाकर इन तीनो को पीस लें। ततपश्चात इस मिश्रण में दो निम्बू का रस मिलाकर रात भर (चांदनी रात में रखना
अधिक अच्छा है) रखा रहने दें। दूसरे दिन प्रात: इस मिश्रण को तवे पर धीमी आंच पर भून कर साफ़ शीशी में भरकर सुरक्षित रख लें। बस दवा तैयार है।
सेवन विधि
जब भी धूम्रपान या तम्बाकू की इच्छा या तलब उठे तब थोड़ा चूर्ण लेकर मुंह में डालकर चबाएं। ऐसा कुछ दिन लगातार करने से यह बुरी आदत अपने-आप छूट जाएगी। साथ ही अन्य कई लाभ होंगे, जैसे गैस की तकलीफ मिटना, पाचनशक्ति में वृध्दि होना, भूख खुलकर लगना, रक्त सुधरना, सुगंध और स्वाद से चित प्रसन्न रहना आदि। इसके सेवन से पान आदि में जर्दा या तम्बाकू सेवन से बिगड़े हुए दांत और दांत- दर्द में लाभ होगा तथा चालीस दिन तक सेवन से भीतर के तम्बाकू के दाग भी साफ़ हो जाएंगे।
ओषधि के सेवन के साथ हल्का सुपाच्य व भूख से कम भोजन लें तथा प्रात: भर्मण, योगासन व प्राणायाम करें तो शीघ्र लाभ होगा।
यदि आप एक छोटी हरड़ ( काली, जंगी, जौ हरड़. जो पंसारी से मिलती है) के छोटे टुकड़े करके रख लें। जब भी इन चीजों की इच्छा या तलब उठे छोटी हरड़ का एक टुकड़ा मुंह में डाल लें और चीरे-धीरे चूसें। इससे कुछ ही दिनों मेंबीड़ी-सिगरेट तम्बाकू की बुरी आदत छूटजाती है।
दालचीनी
दालचीनी को बारीक़ पीसकर शहद में मिलाकर एक डिब्बी या कांच की शीशी में रख लें। जब बीड़ी सिगरेट की तलब लगे एक ऊँगली यह ओषधि चाट लें।
प्याज
कैसा भी नशा हो चाहे शराब, अफीम, गांजा, बीड़ी, सिगरेट कोई भी नशा, नित्य खाली पेट आधा कप (50 gram.) हर रोज़ प्याज का रस पीने से थोड़े दिन पीने से नशे की आदत छोटजाती हैं।
Saturday, 9 December 2017
आंवले के औषधीय प्रयोग / medicinal uses of gooseberry
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🍏 *आंवले के औषधीय प्रयोग* 🍏
🍏 *जो मनुष्य आंवले का रस १० से १५ मि.ली., शहद १० से १५ ग्राम, मिश्री १० से १५ ग्राम और घी २० ग्राम मिलाकर चाटता है तथा पथ्य भोजन करता है, उससे वृद्धावस्था दूर रहती है l इस प्रयोग से शारीर में गर्मी, रक्त, चमड़ी तथा अम्लपित्त के रोग दूर होते हैं और शक्ति मिलती है l*
🍏 *आंवला घृतकुमारी के संग पीने से पित्त का नाश होता है l*
🍏 *१५-२० मि.ली. आंवलों का रस तथा एक चम्मच शहद मिलाकर चटाने से आँखों की रोशनी में वृद्धि होती है l*
🍏 *सर्दी या कफ्फ की तकलीफ हो तो आंवले के १५-२० मि.ली. रस या १ ग्राम (पाँव चम्मच) चूर्ण में १ ग्राम हल्दी मिलाकर लें l*
🍏 *१-२ आंवले और १०-२० ग्राम काले तिल रोज़ सुबह चबाकर खाने से स्मरणशक्ति तेज़ हो जाती है l*
🍏 *आंवले का रस और शुद्ध शहद सामान मात्रा में लेकर मिला लें l इस मिश्रण को प्रतिदिन रात के समय आँखों में आंजने से आँखों का धुंधलापन कम हो जाता है l इस मिश्रण को पीने से भी फायदा होता है l*
🍏 *मैले दांत चमकाने हों तो दांतों पर आंवले के रस से मालिश करें l आंवले के रस में सरसों का तेल मिलाकर मसूड़ों पर हलकी मालिश करने से भी बहुत फायदा होता है l*
🍏 *२५० ग्राम आंवले के चूर्ण में ५० ग्राम लहसुन पीसकर यह मिश्रण शहद में डुबाकर पंद्रह दिन तक धूप में रखें l उसके पश्चात् हर रोज़ एक चम्मच मिश्रण खा लें l यह एक उत्तम ह्रदय-पोषक है l यह प्रयोग ह्रदय को मज़बूत बनाने वाला एक सरल इलाज है l*
🍏 *रक्तचाप, ह्रदय का बढ़ना, मानसिक तनाव (डिप्रेशन), अनिद्रा जैसे रोगों में २० ग्राम गाजर के रस के साथ ४० ग्राम आंवले का रस लेना चाहिए l*
🍏 *आधा भोजन करने के पश्चात् हरे आंवलों का ३० ग्राम रस आधा ग्लास पानी में मिलाकर पी लें l फिर शेष आधा भोजन करें l यह प्रयोग २१ दिन तक करें l इससे ह्रदय व मस्तिष्क की कमजोरी दूर होती है तथा स्वास्थ्य सुधरता है l*
🍏 *सूखे आंवले तथा सुखा धनिया सामान मात्रा में लेकर रात को कुल्लढ में इक्कठे भिगो दें l सुबह छान के मिश्री मिलाकर पियें l इससे पेशाब की जलन दूर होती है तथा मूत्ररोगों में लाभ होता है l*
🍏 *दो चम्मच कच्चे आंवले का रस और दो चम्मच कच्ची हल्दी का रस शहद के साथ लेने से प्रमेह मिट जाता है l कुछ दिनों तक प्रयोग करने से मधुमेह नियंत्रण में आ जाता है तथा सभी तरह के मूत्र-विकारों से छुटकारा मिल जाता है l*
🍏 *आंवले का चूर्ण गौमूत्र में घोंटकर शरीर पर लगाने से तुरंत पित्तियां दब जाती हैं l*
Thursday, 30 November 2017
Tips to stay away from disease / रोगों से दूर रहने के लिए युक्तियाँ
..... अष्ट्रांग ह्रदयम्
२. लकवा - सोडियम की कमी के कारण होता है ।
३. हाई वी पी में - स्नान व सोने से पूर्व एक गिलास जल का सेवन करें तथा स्नान करते समय थोड़ा सा नमक पानी मे डालकर स्नान करे ।
४. लो वी पी - सेंधा नमक डालकर पानी पीयें ।
५. कूबड़ निकलना- फास्फोरस की कमी ।
६. कफ - फास्फोरस की कमी से कफ बिगड़ता है , फास्फोरस की पूर्ति हेतु आर्सेनिक की उपस्थिति जरुरी है । गुड व शहद खाएं
७. दमा, अस्थमा - सल्फर की कमी ।
८. सिजेरियन आपरेशन - आयरन , कैल्शियम की कमी ।
९. सभी क्षारीय वस्तुएं दिन डूबने के बाद खायें ।
१०. अम्लीय वस्तुएं व फल दिन डूबने से पहले खायें ।
११. जम्भाई - शरीर में आक्सीजन की कमी ।
१२. जुकाम - जो प्रातः काल जूस पीते हैं वो उस में काला नमक व अदरक डालकर पियें ।
१३. ताम्बे का पानी - प्रातः खड़े होकर नंगे पाँव पानी ना पियें ।
१४. किडनी - भूलकर भी खड़े होकर गिलास का पानी ना पिये ।
१५. गिलास एक रेखीय होता है तथा इसका सर्फेसटेन्स अधिक होता है । गिलास अंग्रेजो ( पुर्तगाल) की सभ्यता से आयी है अतः लोटे का पानी पियें, लोटे का कम सर्फेसटेन्स होता है ।
१६. अस्थमा , मधुमेह , कैसर से गहरे रंग की वनस्पतियाँ बचाती हैं ।
१७. वास्तु के अनुसार जिस घर में जितना खुला स्थान होगा उस घर के लोगों का दिमाग व हृदय भी उतना ही खुला होगा ।
१८. परम्परायें वहीँ विकसित होगीं जहाँ जलवायु के अनुसार व्यवस्थायें विकसित होगीं ।
१९. पथरी - अर्जुन की छाल से पथरी की समस्यायें ना के बराबर है ।
२०. RO का पानी कभी ना पियें यह गुणवत्ता को स्थिर नहीं रखता । कुएँ का पानी पियें । बारिस का पानी सबसे अच्छा , पानी की सफाई के लिए सहिजन की फली सबसे बेहतर है ।
२१. सोकर उठते समय हमेशा दायीं करवट से उठें या जिधर का स्वर चल रहा हो उधर करवट लेकर उठें ।
२२. पेट के बल सोने से हर्निया, प्रोस्टेट, एपेंडिक्स की समस्या आती है ।
२३. भोजन के लिए पूर्व दिशा , पढाई के लिए उत्तर दिशा बेहतर है ।
२४. HDL बढ़ने से मोटापा कम होगा LDL व VLDL कम होगा ।
२५. गैस की समस्या होने पर भोजन में अजवाइन मिलाना शुरू कर दें ।
२६. चीनी के अन्दर सल्फर होता जो कि पटाखों में प्रयोग होता है , यह शरीर में जाने के बाद बाहर नहीं निकलता है। चीनी खाने से पित्त बढ़ता है ।
२७. शुक्रोज हजम नहीं होता है फ्रेक्टोज हजम होता है और भगवान् की हर मीठी चीज में फ्रेक्टोज है ।
२८. वात के असर में नींद कम आती है ।
२९. कफ के प्रभाव में व्यक्ति प्रेम अधिक करता है ।
३०. कफ के असर में पढाई कम होती है ।
३१. पित्त के असर में पढाई अधिक होती है ।
३२. योग-प्राणायाम- कफ प्रवृति वालों को नहीं करना चाहिए , वात प्रवृति वालों को थोडा, पित्त प्रवृति वालों को ज्यादा करना चाहिए ।
३३. आँखों के रोग - कैट्रेक्टस, मोतियाविन्द, ग्लूकोमा , आँखों का लाल होना आदि ज्यादातर रोग कफ के कारण होता है ।
३४. शाम को वात-नाशक चीजें खानी चाहिए ।
३५. पित्त प्रवृति वालों को प्रातः 4 बजे जाग जाना चाहिए ।
३६. सोते समय रक्त दवाव सामान्य या सामान्य से कम होता है ।
३७. व्यायाम - वात रोगियों के लिए मालिश के बाद व्यायाम , पित्त वालों को व्यायाम के बाद मालिश करनी चाहिए । कफ के लोगों को स्नान के बाद मालिश करनी चाहिए ।
३८. भारत की जलवायु वात प्रकृति की है , दौड़ की बजाय सूर्य नमस्कार करना चाहिए ।
३९. जो माताएं घरेलू कार्य करती हैं उनके लिए व्यायाम जरुरी नहीं ।
४०. निद्रा से पित्त शांत होता है , मालिश से वायु शांति होती है , उल्टी से कफ शांत होता है तथा उपवास ( लंघन ) से बुखार शांत होता है ।
४१. भारी वस्तुयें शरीर का रक्तदाब बढाती है , क्योंकि उनका गुरुत्व अधिक होता है ।
४२. दुनियां के महान वैज्ञानिक का स्कूली शिक्षा का सफ़र अच्छा नहीं रहा, चाहे वह 8 वीं फेल न्यूटन हों या 9 वीं फेल आइस्टीन हों , 43. माँस खाने वालों के शरीर से अम्ल-स्राव करने वाली ग्रंथियाँ प्रभावित होती हैं ।
४४. तेल हमेशा गाढ़ा खाना चाहिए , दूध हमेशा पतला पीना चाहिए ।
४५. छिलके वाली दाल-सब्जियों से कोलेस्ट्रोल हमेशा घटता है ।
४६. कोलेस्ट्रोल की बढ़ी हुई स्थिति में इन्सुलिन खून में नहीं जा पाता है । ब्लड शुगर का सम्बन्ध ग्लूकोस के साथ नहीं अपितु कोलेस्ट्रोल के साथ है ।
४७. मिर्गी दौरे में अमोनिया या चूने की गंध सूँघानी चाहिए ।
४८. सिरदर्द में एक चुटकी नौसादर व अदरक का रस रोगी को सुंघायें ।
४९. भोजन के पहले मीठा खाने से बाद में खट्टा खाने से शुगर नहीं होता है ।
५०. भोजन के आधे घंटे पहले सलाद खाएं उसके बाद भोजन करें ।
५१. अवसाद में आयरन , कैल्शियम , फास्फोरस की कमी हो जाती है । फास्फोरस गुड और अमरुद में अधिक है ।
५२. पीले केले में आयरन कम और कैल्शियम अधिक होता है । हरे केले में कैल्शियम थोडा कम लेकिन फास्फोरस ज्यादा होता है तथा लाल केले में कैल्शियम कम आयरन ज्यादा होता है । हर हरी चीज में भरपूर फास्फोरस होती है, वही हरी चीज पकने के बाद पीली हो जाती है जिसमे कैल्शियम अधिक होता है ।
५३. छोटे केले में बड़े केले से ज्यादा कैल्शियम होता है ।
५४. रसौली की गलाने वाली सारी दवाएँ चूने से बनती हैं ।
५५. हेपेटाइट्स A से E तक के लिए चूना बेहतर है ।
५६. एंटी टिटनेस के लिए हाईपेरियम 200 की दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दे ।
५७. ऐसी चोट जिसमे खून जम गया हो उसके लिए नैट्रमसल्फ दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दें । बच्चो को एक बूंद पानी में डालकर दें ।
५८. मोटे लोगों में कैल्शियम की कमी होती है अतः त्रिफला दें । त्रिकूट ( सोंठ+कालीमिर्च+ मघा पीपली ) भी दे सकते हैं ।
५९. अस्थमा में नारियल दें । नारियल फल होते हुए भी क्षारीय है ।दालचीनी + गुड + नारियल दें ।
६०. चूना बालों को मजबूत करता है तथा आँखों की रोशनी बढाता है ।
६१. दूध का सर्फेसटेंसेज कम होने से त्वचा का कचरा बाहर निकाल देता है ।
६२. गाय की घी सबसे अधिक पित्तवर्धक व कफ व वायुनाशक है ।
६३. जिस भोजन में सूर्य का प्रकाश व हवा का स्पर्श ना हो उसे नहीं खाना चाहिए । जैसे - प्रेशर कूकर
६४. गौ-मूत्र अर्क आँखों में ना डालें ।
६५. गाय के दूध में घी मिलाकर देने से कफ की संभावना कम होती है लेकिन चीनी मिलाकर देने से कफ बढ़ता है ।
६६. मासिक के दौरान वायु बढ़ जाता है , ३-४ दिन स्त्रियों को उल्टा सोना चाहिए इससे गर्भाशय फैलने का खतरा नहीं रहता है । दर्द की स्थति में गर्म पानी में देशी घी दो चम्मच डालकर पियें ।
६७. रात में आलू खाने से वजन बढ़ता है ।
६८. भोजन के बाद बज्रासन में बैठने से वात नियंत्रित होता है ।
६९. भोजन के बाद कंघी करें कंघी करते समय आपके बालों में कंघी के दांत चुभने चाहिए । बाल जल्द सफ़ेद नहीं होगा ।
७०. अजवाईन अपान वायु को बढ़ा देता है जिससे पेट की समस्यायें कम होती है ।
७१. अगर पेट में मल बंध गया है तो अदरक का रस या सोंठ का प्रयोग करें ।
७२. कब्ज होने की अवस्था में सुबह पानी पीकर कुछ देर एडियों के बल चलना चाहिए ।
७३. रास्ता चलने, श्रम कार्य के बाद थकने पर या धातु गर्म होने पर दायीं करवट लेटना चाहिए ।
७४. जो दिन मे दायीं करवट लेता है तथा रात्रि में बायीं करवट लेता है उसे थकान व शारीरिक पीड़ा कम होती है ।
७५. बिना कैल्शियम की उपस्थिति के कोई भी विटामिन व पोषक तत्व पूर्ण कार्य नहीं करते है ।
७६. स्वस्थ्य व्यक्ति सिर्फ 5 मिनट शौच में लगाता है ।
७७. भोजन करते समय डकार आपके भोजन को पूर्ण और हाजमे को संतुष्टि का संकेत है ।
७८. सुबह के नाश्ते में फल , दोपहर को दही व रात्रि को दूध का सेवन करना चाहिए ।
७९. रात्रि को कभी भी अधिक प्रोटीन वाली वस्तुयें नहीं खानी चाहिए । जैसे - दाल , पनीर , राजमा , लोबिया आदि ।
८०. शौच और भोजन के समय मुंह बंद रखें , भोजन के समय टी वी ना देखें ।
८१. मासिक चक्र के दौरान स्त्री को ठंडे पानी से स्नान , व आग से दूर रहना चाहिए ।
८२. जो बीमारी जितनी देर से आती है , वह उतनी देर से जाती भी है ।
८३. जो बीमारी अंदर से आती है , उसका समाधान भी अंदर से ही होना चाहिए ।
८४. एलोपैथी ने एक ही चीज दी है , दर्द से राहत । आज एलोपैथी की दवाओं के कारण ही लोगों की किडनी , लीवर , आतें , हृदय ख़राब हो रहे हैं । एलोपैथी एक बिमारी खत्म करती है तो दस बिमारी देकर भी जाती है ।
८५. खाने की बस्तु में कभी भी ऊपर से नमक नहीं डालना चाहिए , ब्लड-प्रेशर बढ़ता है ।
८६ . रंगों द्वारा चिकित्सा करने के लिए इंद्रधनुष को समझ लें , पहले जामुनी , फिर नीला ..... अंत में लाल रंग ।
८७ . छोटे बच्चों को सबसे अधिक सोना चाहिए , क्योंकि उनमें वह कफ प्रवृति होती है , स्त्री को भी पुरुष से अधिक विश्राम करना चाहिए ।
८८. जो सूर्य निकलने के बाद उठते हैं , उन्हें पेट की भयंकर बीमारियां होती है , क्योंकि बड़ी आँत मल के चूसने लगता है ।
८९. बिना शरीर की गंदगी निकाले स्वास्थ्य शरीर की कल्पना निरर्थक है , मल-मूत्र से 5% , कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ने से 22 %, तथा पसीना निकलने लगभग 70 % शरीर से विजातीय तत्व निकलते हैं ।
९०. चिंता , क्रोध , ईष्या करने से गलत हार्मोन्स का निर्माण होता है जिससे कब्ज , बबासीर , अजीर्ण , अपच , रक्तचाप , थायरायड की समस्या उतपन्न होती है ।
९१. गर्मियों में बेल , गुलकंद , तरबूजा , खरबूजा व सर्दियों में सफ़ेद मूसली , सोंठ का प्रयोग करें ।
९२. प्रसव के बाद माँ का पीला दूध बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को 10 गुना बढ़ा देता है । बच्चो को टीके लगाने की आवश्यकता नहीं होती है ।
९३. रात को सोते समय सर्दियों में देशी मधु लगाकर सोयें त्वचा में निखार आएगा ।
९४. दुनिया में कोई चीज व्यर्थ नहीं , हमें उपयोग करना आना चाहिए ।
९५. जो अपने दुखों को दूर करके दूसरों के भी दुःखों को दूर करता है , वही मोक्ष का अधिकारी है ।
९६. सोने से आधे घंटे पूर्व जल का सेवन करने से वायु नियंत्रित होती है , लकवा , हार्ट-अटैक का खतरा कम होता है ।
९७. स्नान से पूर्व और भोजन के बाद पेशाब जाने से रक्तचाप नियंत्रित होता है ।
९८ . तेज धूप में चलने के बाद , शारीरिक श्रम करने के बाद , शौच से आने के तुरंत बाद जल का सेवन निषिद्ध है ।
९९. त्रिफला अमृत है जिससे वात, पित्त , कफ तीनो शांत होते हैं । इसके अतिरिक्त भोजन के बाद पान व चूना । देशी गाय का घी , गौ-मूत्र भी त्रिदोष नाशक है ।
१००. इस विश्व की सबसे मँहगी दवा लार है , जो प्रकृति ने तुम्हें अनमोल दी है , इसे ना थूके ।
Saturday, 12 August 2017
गला बैठना और उसका इलाज –विभिन्न औषधियों से उपचार
गला बैठना और उसका इलाज –विभिन्न औषधियों से उपचार :
1. नमक :
गला खराब होने पर सरसों के तेल में नमक को मिलाकर पीयें। इससे वातज के कारण गले का खराब होना ठीक होता है और आवाज साफ हो जाती है।
गर्म पानी में नमक डालकर गरारे करने और गले की सिंकाई करने से बैठी हुई आवाज खुल जाती है।
2. छोटी पीपल : भोजन के बाद कालीमिर्च और छोटी पीपल को मिलाकर खाने से कफज के कारण स्वर भंग (आवाज बैठना) में आराम मिलता है।
3. कत्था : 1 ग्राम कत्था को सरसों के तेल में भिगोकर मुंह में रखने से सभी प्रकार का स्वर भंग (गला बैठना) ठीक हो जाता है।
4. छोटी हरड़ : छोटी हरड़ का चूर्ण बनाकर 6 ग्राम चूर्ण को गाय के दूध में मिलाकर 7 से 8 दिनों तक लगातार सेवन करने से गला बैठना व गले का दर्द, खुश्की आदि ठीक हो जाती हैं।
5. मिश्री :
सौंठ और मिश्री बराबर मिलाकर महीन पीस-छानकर चूर्ण बना लें और इस चूर्ण में शहद मिलाकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें। इसकी गोलियों को चूसने से बैठा हुआ गला खुल जाता है तथा गले की खुश्की खत्म हो जाती है।
1 चम्मच मिश्री, 1 चम्मच घी और 15 दाने पिसी हुई कालीमिर्च के मिलाकर सुबह-शाम चाटने से बैठा हुआ गला ठीक हो जाता है। ध्यान रहे कि इसे चाटने के कुछ घंटे पानी न पियें।
6. गन्ना : गन्ने को भूनकर तथा छीलकर चूसने से गले की खुश्की व बैठा हुआ गला ठीक हो जाता है।
7. मुलहठी :
पान में मुलहठी डालकर रात को सोते समय खायें और सो जायें। सुबह उठने पर आवाज साफ हो जायेगी।
मुलहठी को मुंह में रखकर उसका रस चूसने से भी गले में आराम आता है।
सोते समय 1 ग्राम मुलहठी के चूर्ण को मुंह में रखकर कुछ देर चबाते रहे या फिर सिर्फ मुंह में रखकर सो जाएं। सुबह सोकर उठने पर गला जरूर साफ हो जायेगा। अगर मुलहठी के चूर्ण को पान के पत्ते में रखकर मुंह में रखा जायें तो और भी अच्छा रहेगा इससे सुबह गला खुलने के अलावा गले का दर्द और सूजन भी दूर होती है।
3 ग्राम मुलहठी की जड़ का चूर्ण 250 मिलीलीटर दूध को अनुपात से दिन में 2 बार लेना चाहिए और मूल (जड़) को समय-समय पर चूसते रहना चाहिए।
स्वर भंग में मुलहठी को मुंह में रखकर चूसने से लाभ होता है।
8. छुहारे : सोते समय एक छुहारा उबालकर दूध में लें। इसके सेवन के दो घंटे बाद पानी न पियें। ऐसा करने से आवाज साफ हो जाएगी।
9. अजमोदा : अजमोदा, हल्दी, आंवला, यवक्षार और चित्रक के चूर्ण को शहद तथा घी के साथ चाटने से स्वर भेद दूर होता है। मात्रा 1 से 2 ग्राम तथा दिन में तीन बार देनी चाहिए।
10. अदरक :
अदरक में छेद करके उसमें एक चने के बराबर हींग भरकर कपड़े में लपेटकर सेंक लें और इसे पीसकर छोटी-छोटी आकार की गोलियां बना लें। 1-1 गोली दिन में 8 बार चूसें।
अदरक का रस शहद में मिलाकर चूसने से भी गले की आवाज खुल जाती है। आधा चम्मच अदरक का रस प्रत्येक आधा-आधा घंटे के अंतराल में सेवन करने से खट्टी चीजे खाने के कारण बैठा हुआ गला ठीक हो जाता है। अदरक के रस को कुछ समय तक गले में रोकना चाहिए। इससे गला साफ हो जाता है।
आधा चम्मच अदरक के रस को चौथाई कप गर्म पानी में मिलाकर आधे-आधे घंटे में 4 बार पीने से सर्दी के कारण या खट्टी चीजों के खाने से बैठा हुआ गला ठीक हो जाता है। अदरक के रस को गले में कुछ समय तक रोकना चाहिए यानी कि रस को कुछ समय तक निगलना नही चाहिए। इससे गला साफ हो जाता है।
पिसी हुई कालीमिर्च और घी मिलाकर भोजन करते समय पीने से लाभ होता है।
अदरक के अंदर छेद करके उसमें थोड़ी सी हींग और नमक भरकर उस अदरक को कपड़े में लपेटकर उसके ऊपर मिट्टी लगा दें और आग में रख दें। जब अदरक पक जाये और खुशबू आने लगे तब आग से निकालकर कपड़े को उतारकर थोड़ी-थोड़ी अदरक को खाने से गला खुल जायेगा और आवाज भी साफ हो जायेगी।
अदरक के रस में सेंधानमक मिलाकर चाटने से बहुत लाभ होता है।
अदरक, लौंग, हींग और नमक को मिलाकर पीस लें और इसकी छोटी-छोटी गोलियां तैयार करें। दिन में 3-4 बार एक-एक गोली चूसें।
11. पान :
चिराग का गुल पान में रखकर खाने से सिंदूर के खाने की वजह से बंद हुई आवाज खुल जाती है।
पान की जड़ के टुकड़े को मुंह में रखकर 3-4 बार चूसने से गले की आवाज खुल जाती है और गला साफ होता है।
12. इमली :
1 ग्राम पुरानी इमली के फल का चूर्ण 4 से 6 ग्राम शहद के साथ दिन में 2 बार लेना चाहिए।
1 ग्राम पुराने फलों के चूर्ण को शहद के साथ दिन में तीन बार सेवन करने से लाभ मिलता है।
13. प्याज : प्याज को आग में दबाकर उसका भुरता बना लें। रोगी को लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग भुना सुहागा खिलाकर से प्याज का भुरता खिलाने से स्वरभंग (आवाज़ का खराब होना) ठीक हो जाता है। 14. लहसुन :
गरम पानी के साथ लहसुन का रस मिलाकर गरारे करने से फायदा होता है।
एक कली लहसुन का रस और फूली हुई फिटकरी को पानी में डालकर कुल्ला करने से बैठी हुई आवाज में लाभ होता है।
लहसुन को दीपक की लौ में भूनकर पीस लें। उसमें मुलहठी का चूर्ण मिला लें। फिर 2 ग्राम चूर्ण को शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से बैठी हुई आवाज ठीक हो जाती है।
गर्म पानी में लहसुन का रस मिलाकर सुबह-शाम गरारे करने से गले में लाभ होता है।
लहसुन को पीसकर गर्म पानी में मिलाकर बार-बार गरारे करने से सिर्फ 2-3 बार में ही गला साफ हो जाता है। एक बार में कम से कम 10 मिनट तक लगातार गरारे करें।
15. सिरस : सिरस की छाल और हल्दी दोनों पीसकर, तेल में सेंककर, गले पर लेप करके, रूई लगाकर, पट्टी बांधकर रात को सोयें। सुबह गला खुल जायेगा।
16. सुहागा :
सुहागा पीस लें इसकी चुटकी भर चूसने से बैठी हुई आवाज खुल जाती है।
जिन लोगों का गला ज्यादा जोर से बोलने के कारण बैठ गया हो उन्हें कच्चा सुहागा आधा ग्राम (मटर के बराबर सुहागे का टुकड़ा) मुंह में रखने और चूसते रहने से स्वरभंग (बैठे हुए गला) में 2 से 3 घंटों में ही आराम हो जाता है।
5 से 10 मिलीलीटर ऊंटकटोरे का मूल स्वरस (जड़ का रस) अकेले या सुहागे की खील (लावा) के साथ मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से स्वरभंग (गला बैठने पर) ठीक हो जाता है।
स्वरभंग (गला बैठने पर) होने पर सुहागे की टिकिया चूसते रहने से गले में जल्दी आराम आता है।
17. बेर :
बेर की जड़ को मुंह में रखना चाहिए अथवा बेर के पत्तों को सेंककर सेंधानमक के साथ खाना चाहिए। इससे बहुत लाभ मिलता है।
बेर के पेड़ की छाल का टुकड़ा मुख में रखकर उसका रस चूसने से दबी हुई आवाज 2-3 दिन में ही खुल जाती है।
18. तुलसी : स्वरभंग (गला बैठना) में तुलसी की जड़ को मुलेठी की तरह चूसते रहने से लाभ मिलता है।
19. ब्राह्मी : ब्राह्मी की जड़ 100 ग्राम, मुनक्का 100 ग्राम और शंखपुष्पी 50 ग्राम को चौगुने पानी में मिलाकर रस निकाल लें। इस रस का सेवन करने से शरीर स्वस्थ होता है और आवाज भी साफ होती है।
20. शहद :
1 कप गर्म पानी में 1 चम्मच शहद डालकर गरारे करने से आवाज खुल जाती है।
फूली हुई फिटकरी को पीसकर शहद के साथ मिलाकर पानी मिलाकर कुल्ले किये जा सकते हैं।
मुलहठी का चूर्ण शहद के साथ चाटना चाहिए।
3 से 9 ग्राम की मात्रा में बहेड़ा के चूर्ण को शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से स्वरभंग (गला बैठना) और गले के दूसरे रोग भी ठीक हो जाते हैं।
21. सफेद जीरा : आधे से 2 ग्राम सफेद जीरे को रोजाना 2 बार चबाने से स्वरभंग (बैठा हुआ गला) ठीक हो जाता है।
22. पीपल : लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग से लगभग आधा ग्राम पीपल के चूर्ण को शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से स्वरभंग (बैठा हुआ गला) ठीक हो जाता है।
23. सोंठ : सोंठ और कायफर (कायफल) को मिलाकर काढ़ा तैयार कर ले और इस काढ़े को सुबह-शाम सेवन करने और काढ़े से गरारा करने से आराम आता है।
24. लताकस्तूरी : लताकस्तूरी के बीजों के चूर्ण के धूम्रपान से स्वरभंग (गला बैठने पर) में लाभ होता है।
25. गुड़ : लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग से लगभग आधा ग्राम गुग्गुल को गुड़ के साथ रोजाना 3 से 4 बार लेने से गले में आराम आता है।
26. कचूर : कचूर को मुंह में रखकर चबाने से या चूसते रहने से गला साफ और आवाज मीठी हो जाती है। गाना गाने वाले लोग ज्यादातर इसका प्रयोग करते हैं।
27. तालीसपत्र: स्वरभंग (गला बैठने पर) में तालीसपत्र (अबीस वेभइआना लाइंड) का काढ़ा या फांट सुबह-शाम सेवन करने से गले में आराम आता है।
28. शोधित कुचला : लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग शोधित कुचले का चूर्ण सुबह-शाम सेवन करने से ज्यादा बोलने के कारण पैदा हुआ स्वरभंग (गला बैठने पर) ठीक हो जाता है। 29. बतासे : 5 से 10 बूंद कायापुटी का तेल बतासे या चीनी पर डालकर रोजाना 3 से 4 बार सेवन करने से स्वरभंग (गला बैठने पर) ठीक हो जाता है।
30. कालीमिर्च :
कालीमिर्च और मिश्री एक साथ चबाकर खाने से या दोनों को मिलाकर चूर्ण बनाकर चुटकी भर चूर्ण रोजाना 3 से 4 बार मुंह में रखकर चूसते रहने से गला जल्दी से बिल्कुल साफ हो जाता है।
गला बैठने पर पिसी हुई कालीमिर्च और घी को पानी में मिलाकर भोजन करते समय पीने से लाभ होता है।
कालीमिर्च 10 ग्राम और इतनी मात्रा में मुलेठी तथा 20 ग्राम मिश्री। इनको पीसकर सुबह-शाम रोज चुटकी भर लेकर और शहद में मिलाकर खाने से आवाज साफ और सुरीली हो जाती है।
रात को सोते समय 12 कालीमिर्च के दाने और बताशे लेकर हर बताशे के अंदर 2 कालीमिर्च रखकर चबाकर सो जायें। इसके ऊपर पानी न पीयें। इससे सर्दी-जुकाम से बैठा हुआ गला ठीक हो जायेगा।
31. हींग :
थोड़ी सी हींग को गर्म पानी के साथ खाने से बैठा हुआ गला ठीक हो जाता है।
जुकाम का पानी गले में गिरने या जलवायु परिवर्तन (हवा, पानी बदलना) से आवाज बैठ जाये तो आधा ग्राम हींग को गर्म पानी में घोलकर दो बार गरारे करने से आवाज ठीक हो जाती है।
32. बच : कत्था, बच, कुलंजन और बावची को पीसकर मुंह में रखने से गले में आराम आता है।
33. गुड़ : 10 ग्राम उबलते चावल, 10 ग्राम गुड़ और 40 मिलीलीटर पानी को एक साथ मिलाकर पका लें और पकने पर उसमें घी मिलाकर दिन में 2 बार लें। इससे स्वरभंग में लाभ होता है।
34. खूबकलां : 1 से 2 ग्राम खूबकलां (खाकसीर) के बीज को पानी में डालकर लुआबदार घोल सुबह-शाम पीने से स्वरभंग (गला बैठने पर) दूर हो जाता है।
35. शहतूत : शहतूत के पत्तों के काढ़े से गण्डूस (गरारे) कराने से स्वरभंग (गला बैठने पर) में आराम आता है।
36. मालकांगनी : मालकांगनी, बच, अजवायन, खुरासानी, कुलंजन और पीपल को बराबर मात्रा में लेकर इसमें शहद मिलाकर रोजाना 3 ग्राम चटाने से गले में आराम आता है।
37. मूली के बीज :
मूली के बीजों को पीसकर गर्म पानी में मिला लें। उसके बाद किसी साफ कपड़े में छानकर रोगी को खिला दें।
मूली के 12 बीजों को पीसकर गर्म पानी के साथ फांक लेने से गला साफ हो जाता है।
आवाज बैठ गई हो तो 5 ग्राम मूली के बीजों को गर्म पानी में पीसकर पीने से आवाज खुल जाएगी।
आधा चम्मच मूली के बीजों को पीसकर गर्म जल के साथ लेने से गला साफ हो जाता है।
मूली के 5-10 ग्राम बीजों को पीसकर गर्म पानी के साथ दिन में 3-4 बार फंकी लेने से गला साफ होता है।
38. शीतलचीनी :
स्वरभंग (गला बैठने पर) में शीतलचीनी या कबाबचीनी चबाकर चूसते रहने से गला साफ होता है। गाना गाने वाले लोग इसे गला साफ करने के लिये अक्सर चूसते रहते हैं।
10 ग्राम कबाबचीनी को पीसकर 1 ग्राम शहद में मिलाकर दिन में 2 से 3 बार चाटने से बंद आवाज खुल जाती है।
39. कराजनीः स्वऱभंग (गला बैठने पर) में श्वेतकुंजा (कराजनी) के पत्ते कबाबचीनी के साथ मिश्री मिलाकर या अकेले श्वेतगुंजा के साथ सिर्फ मिश्री को मिलाकर चूसते रहने से गले में पूरा आराम होता है।
40. हल्दी : गर्म दूध में थोड़ा हल्दी डालकर पीने से स्वर भेद (मोटी आवाज), बैठी आवाज या दबी आवाज में फायदा होता है।
41. धान : 10 ग्राम चावल, 10 ग्राम गुड़ और 40 ग्राम चीनी को मिलाकर दिन में 3 बार खाने से लाभ मिलता है।
42. जामुन :
जामुन की मुठली का चूर्ण शहद के साथ मिलाकर 3 से 4 बार सेवन करना चाहिए।
जामुन की गुठलियों को पीसकर शहद में मिलाकर गोलियां बना लें। यह 2-2 गोली रोजाना 4-4 बार चूसने से बैठा हुआ गला खुल जाता है। आवाज का भारीपन ठीक हो जाता है। ज्यादा दिन तक उपयोग करने से बिगड़ी हुई आवाज ठीक हो जाती है। अधिक बोलने, गाना गाने वालों के लिए यह बहुत उपयोगी है।
43. अगस्ता : अगस्ते की पत्तियों के काढ़े से गरारे करने से सूखी खांसी, जीभ का फटना, स्वरभंग तथा कफ के साथ रुधिर निकलने में लाभ होता है।
44. गुंजा : गुंजा के ताजे पत्तों को कबाबचीनी और शक्कर के साथ सेवन करने से स्वरभंग (गला बैठ जाना) दूर हो जाता है।
45. सेहुण्ड : खिरैटी, शतावर और चीनी को शहद के साथ चाटने से स्वरभंग खत्म हो जाता है।
46. शंखपुष्पी : शंखपुष्पी के पत्तों को चबाकर रस चूसने से बैठा हुआ गला ठीक होकर आवाज सुधरती है।
47. लालमिर्च : थोड़ी सी लालमिर्च के साथ बादाम और चीनी मिलाकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें और रोज खायें। इससे स्वर भंग (आवाज की खराबी) दूर होता है। 48. अनार :
अच्छा पका हुआ एक अनार रोज खाना चाहिए। इससे गले की बिगड़ी हुई आवाज कुछ ही दिनों में ठीक हो जाती है।
पका अनार खाने से दबी हुई गले की आवाज खुल जाती है।
49. अपराजिता : 10 ग्राम अपराजिता के पत्ते, 500 मिलीलीटर पानी में उबालकर आधा शेष रहने पर सुबह-शाम गरारे करने से, टांसिल, गले के घाव और स्वर भंग में लाभ होता है।
50. अफीम :
अजवायन और अफीम के डोडे समान मात्रा में लेकर पानी में उबालकर छान लें और फिर छाने हुए पानी से गरारे करें।
अफीम के डोडे और अजवायन को उबालकर गरारे करने से बैठी हुई आवाज खुल जाती है।
51. आंवला : 1 चम्मच पिसे हुए आंवले की गर्म पानी से फंकी लेने से बैठा हुआ गला खुल जाता है और आवाज साफ आने लगती है।
52. नींबू : गला बैठ जाए या गले में सूजन हो जाये तो ताजा पानी या गर्म पानी में नींबू निचोड़कर और उसमें नमक डालकर गरारे करने से जल्दी लाभ होता है।
53. शलगम : शलगम को पानी में उबाल लें फिर उस पानी को छानकर उसमें शक्कर यानी चीनी को मिलाकर रोजाना 2 बार पीने से बैठे हुए गले में आराम आता है।
54. पानी : 1 भगोने (पतीले) में पानी डालकर उबाल लें। जब पानी में भाप (धुंआ) उठने लगे तो पतीले के ऊपर मुंह करके उसमें से निकलने वाली भाप (धुंए) को गले में खींचने से बैठा हुआ गला खुल जाता है।
55. अजवाइन : अजवाइन और चीनी को पानी में उबालकर रोजाना सुबह-शाम पीने से बैठा हुआ गला खुल जाता है।
56. जौ : सुबह-सुबह 25 जौ (जौ गेंहू के जैसे होते हैं) चबाकर निगल जाने से आवाज ठीक हो जाती है।
57. आम : आम के पत्तों के काढ़े में शहद मिलाकर धीरे-धीरे पीने से स्वरभंग में लाभ होता है।
58. कुलंजन :
1 ग्राम कुलंजन को पान में रखकर खाने से आराम आता है।
कुलंजन, मुलेठी, अकरकरा और सेंधानमक बराबर मिलाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को जीभ पर रगड़कर निगल लें।
कुलंजन को मुंह में रखकर चूसने से बैठा हुआ गला खुल जाता है।
10 ग्राम दक्खनी मिर्च और 10 ग्राम कुलंजन को पीसकर और छानकर उसमें 20 ग्राम खांड मिलाकर 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम चूसें। इससे बंद आवाज खुलने में लाभ होता है।
59. बादाम : 7 बादाम की गिरी और 7 कालीमिर्च को थोड़े से पानी में डालकर और उसमें थोड़ी सी पिसी हुई चीनी मिलाकर चाटने से खुश्की की वजह से बंद हुई आवाज खुल जाती है।
60. सत अजवायन : चने की दाल के बराबर सत अजवायन लेकर पान में रखकर चबाएं और उसका रस निगल लें।