Saturday, 26 November 2016

दस्त(लूज मोशन) होने पर घरेलू / natural remedies for loose motion

दस्त(लूज मोशन) होने पर घरेलू नुस्खे:-
     दस्त होने पर शरीर के मिनरल्स और पानी तेजी से बाहर हो जाते हैं, जिससे कमजोरी आ जाती है।
उपाय:-नींबू के रस में एक चम्मच चीनी और थोड़ा नमक मिलाकर पीएं इसे पीने से डायरिया दूर होगा और शरीर को एनर्जी भी मिलेगी ।
मेथी दाना- एक चौथाई चम्मच मेथी दाना पाउडर ठंडे पानी से खाली पेट लें । दस्त से मुक्ती मिलेगी।गीले चावल को दही के साथ दिन में दो तीन बार खाएँ ।
अदरक:-आधा चम्मच अदरक पाउडर छाछ के साथ दिन में दो तीन बार लें ।
लौकी:-इसके रस को छानकर दिन में दो तीन बार पीने से यह समस्या दूर होगी ।
शहद:-एक चम्मच शहद में आधा चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर दिन में दो तीन बार लेने से दस्त से राहत मिलती है।
अनार:-दिन भर में दो बार अनार का ज्यूस पीएं।अनार की पत्तियों को पानी में उबालें और छानकर पीने से दस्त में आराम आता हैं

Friday, 25 November 2016

हेपेटाइटिस बी / natural remedy of hepatitis B

हेपेटाइटिस बी:--मूली के हरे पत्ते पीलिया में लाभदायक होते हैं।यहीं नहीं मूली के रस में भी इतनी ताकत होती है कि यह खून और लीवर से अत्यधिक बिलीरूबीन को निकाल सके।पीलिया या हेपेटाइटिस में रोगी को 2-3 गिलास मूली का रस जरूर पीना चाहिए या फिर इसके पत्ते पीसकर उनका रस निकाल कर व छानकर पीएं।
  फल, सब्जियां उर्फ साबूत अनाज खाना चाहिए । मलाई युक्त दूध, दही, क्रीम, पनीर और वसा युक्त से परहेज करें ।
ज्यादा वसा मात्रा से युक्त बिस्कुट, केक, चाकलेट, मेवे पीनट बटर और मसालेदार स्नेक्स से परहेज करें

Wednesday, 16 November 2016

खाज खुजली के लिए उपचार / natural ways to get rid of itching

खाज खुजली के लिए उपचार

1:- नारियल के तेल में थोड़ा सा कपूर मिलाकर गरम करे और खुजली वाले स्थान पर लगायें

2:- गौ माता के घी में कुछ लहसुन मिलाकर गरम करे और इसकी मालिश करें

3:- नीबू के रस में पके हुए केले को मसलकर लगाये

4:- शुद्ध सरसों के तेल में लहसुन को गरम करके ठंडा होने पर हल्दी मिलाकर मालिश करें

5;- भूने हुए सुहागे को पानी में मिलाकर लगाएं

6:- नारियल के तेल में आंवले का गुठली की राख मिलाकर लगाये

7:- गौ माता के घी में आँवला, गंधक, कपूर, नीला थोथा सबको बराबर मात्रा में मिलाकर खाज खुजली पर लगायें

देशी गौ माता के गौमूत्र गोबर का खाज खुजली पर लेप लगायें जल्दी आराम मिलता है
8:- नीम की छाल, त्रिफला चूर्ण, उसवा, कुटकी और गौरखमुंडी समान मात्रा में लेकर पानी में भिगो दें और उसे आग पर पकाएं और उसकी भांप द्वारा अर्क तैयार करें और
इस अर्क को रूई से लगाये खाज खुजली पर लगाईये

9:- कंरज, नीम, तथा निर्गुंडी तीनो की छाल को पीसकर पानी में मिलाकर
लगाये

10:- तिल के तेल में हल्दी मिलाकर लगाने से चर्म रोग नहीं होता है

अनिद्रा -प्राकृतिक उपचार / isomnia - natural remedy

अनिद्रा आज का सबसे बड़ा रोग है, वस्तुतः युवा के लिए छः घंटे की नींद पर्याप्त होती है। बच्चों के लिए आठ घंटे और वृद्धों को चार से छः घंटे की नींद की आवश्यकता होती है।

प्राकृतिक उपचार

प्राकृतिक उपचार से अनिद्रा रोग समूल नष्ट हो जाता है, रोगी पर कोई दुष्प्रभाव भी नहीं पड़ता।

१. एक चम्मच प्याज के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर चाटें। यह औषधि रात को सोने से पहले लें।

२. रात को सोने से पहले नियमित सरसों या तिल के तेल से पांच मिनट पैर के तलवों की मालिश करें, इससे थकान दूर होती है और नींद अच्छी आती है।

३. पपीता एक बहुत ही गुणकारी और स्वादिष्ट फल है। अनिद्रा के रोगी नियमित रूप से पपीता खायें, उसका रस पीयें और कच्चे पपीते की सब्जी बनाकर खायें तो उन्हें अनिद्रा की शिकायत नहीं होगी।

४. सौंफ अनिद्रा रोग की बेहतर औषधि है। रात को सोने से पूर्व १० ग्राम सौंफ एक कप पानी में उबाल-छानकर पियें।

६. सेब का मुरब्बा अनिद्रा रोग को शांत कर गहरी नींद लाता है - रात को भोजन के बाद नियमित रूप से खाने वालों को रोग से मुक्ति मिलती है।

Tuesday, 15 November 2016

मधुमेह नाशक / diabetic medicine

🐚♦मधुमेह नाशक ♦🐚
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शुगर यानी डायबिटीज जितना खतरनाक रोग है, वहीं यह अन्य गंभीर बीमारियों का कारण भी है। आज पूरे विश्व में ही नहीं, बल्कि हमारे देश में भी इस रोग से संबंधित रोगियों में निरंतर वृद्धि हो रही है। जागरुकता के अभाव में यह रोग आज मानवता के लिए नासूर बनता जा रहा है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है जब दुनिया में स्वास्थ्य के संसाधनों की कमी थी तो लोग ऐसी गंभीर बीमारियों से कैसे बचकर रहते थे। बुजुर्गों और वैद्यों द्वारा बताए गए एक ऐसे नुस्खे के बारे जाने जो न तो महंगा है, बल्कि एकदम सटीक भी है।

अक्सर देखा जाता है कि शुगर से परेशान लोग एलोपैथी दवाओं पर हजारों रुपए खर्च कर देते हैं, लेकिन उसके बाद भी उन्हें आराम नहीं मिलता है। इससे निजात पाने के लिए वे दर-दर की ठोकरें खाते रहते हैं। वहीं एलोपैथी दवाओं के साइड इफेक्ट्स से अनजान हम अन्य बीमारियों को भी न्यौता दे देते रहते हैं।

मधुमेह रेगियों के लिए एक ऐसी रामबाण औषधि के जिससे न केवल आपका शुगर लेवल तीव्र गति से घटेगा, बल्कि आपकी दुर्बलता को भी दूर कर देगा। इस उपाय के लाभ का अंदाजा यूं लगा सकते हैं कि यदि इसको मात्रा से ज्यादा लिया जाए तो शूगर इसके सेवन से लो होने लगती है। बादाम के कारण रोगी की दुर्बलता दूर होती है तथा चने से इंद्र जौ की कड़वाहट मिटती है। इस औषधि में कड़वे लगने वाले इन्द्र जौ की खास भूमिका होती है। इसलिए इसमें बादाम गिरी और भुने हुए चने को भी मिलाया जाता है।
🔸बनाने की विधि🔸
इन्द्र जौ कड़वे 250 ग्राम, बादाम गिरि 250 ग्राम और 250 ग्राम भुने हुए चने सभी को अलग-अलग पीसकर सबसे पहले पाउडर बनाएं। इसके बाद इन तीनों सामग्रियों के पाउडर को अच्छी तरह मिलाकर एक कांच के जार में भर लें।
🔸सेवन की विधि🔸
इसका सेवन दिन में मात्र एक बार ही करें। खाना खाने के बाद एक चम्मच पाउडर सादे पानी के साथ सेवन करें। इसके नियमित सेवन से कुछ दिन में ही आपको फर्क नजर आने लगेगा।
  अगर आप दोस्तों में से कोई शुगर रोग से ग्रस्त हो तो स्वयं इस योग का सेवन कर नया जीवन पाईये और अगर कोई आपका अपना शुगर रोगी है तो उसे यह योग शेयर करके नया दीजिए सभी दोस्तों से अनुरोध है कि यह पोस्ट रुकनी नहीं चाहिए सम्पूर्ण भारत वासियों को यह योग मालूम हो जा ना चाहिये मानवता का दुख अपना दुख यह मेरा मानना है और आज पता चल जाएगा की मानवता के दुख को कोन अपना दुख मानता है और कोन कोन मित्र शेयर करके निर्धन गरीब लोगों को नयी उम्मीद और नयी रोशनी दिखाता है, इसी में सभी का कल्याण है।

Saturday, 5 November 2016

हम पानी क्यों ना पीयें खाना खाने के बाद / why don't drink water after meal

*हम पानी क्यों ना पीयें खाना खाने के बाद ?*

हमने दाल खाई, हमने सब्जी खाई, हमने रोटी खाई, हमने दही खाया, लस्सी पी, दूध, दही, छाछ, लस्सी, फल आदि.! ये सब कुछ भोजन के रूप में हमने ग्रहण किया | ये सब कुछ हमको उर्जा देता है और पेट उस उर्जा को आगे ट्रांसफर करता है.!

पेट मे एक छोटा सा स्थान होता है, जिसको हम हिंदी मे कहते हैं "अमाशय" | उसी स्थान का संस्कृत नाम है "जठर" | ये एक थैली की तरह होता है और यह जठर हमारे शरीर मे सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि सारा खाना सबसे पहले इसी में आता है। ये बहुत छोटा सा स्थान है | इसमें अधिक से अधिक 350 gms खाना आ सकता है.! हम कुछ भी खाते हैं, सब ये अमाशय में आ जाता है.!

आमाशय में अग्नि प्रदीप्त होती है | उसी को कहते हे "जठराग्न".! ये अग्नि तब तक जलती हे जब तक खाना पचता है | अब अपने खाते ही गटागट पानी पी लिया और खूब ठंडा पानी पी लिया... और कई लोग तो बोतल पे बोतल पी जाते है.! अब जो आग (जठराग्नि) जल रही थी, वो बुझ गयी.! आग अगर बुझ गयी तो खाने की पचने की जो क्रिया है वो रुक गयी |

खाना जाने पर हमारे पेट में दो ही क्रिया होती है, एक क्रिया है जिसको हम कहते हे "Digestion" और दूसरी है "fermentation".... *फर्मेंटेशन का मतलब है सडना और डायजेशन का मतलब है पचना.!*

आयुर्वेद के हिसाब से आग जलेगी तो खाना पचेगा,
खाना पचेगा तो उससे रस बनेगा.!
जो रस बनेगा तो उसी रस से मांस, मज्जा, रक्त, वीर्य, हड्डिया, मल, मूत्र और अस्थि बनेगा और सबसे अंत में मेद बनेगा.!

*अब जब खाना सड़ेगा तब क्या होगा..?*

खाने के सड़ने पर सबसे पहला जहर जो बनता है वो है यूरिक एसिड (uric acid) | कई बार आप डॉक्टर के पास जाकर कहते हैं कि मुझे घुटने में दर्द हो रहा है, मुझे कंधे-कमर में दर्द हो रहा है तो डॉक्टर कहेगा आपका यूरिक एसिड बढ़ रहा है |

*जब खाना सड़ता है, तो यूरिक एसिड जैसा ही एक दूसरा विष बनता है जिसको हम कहते हे LDL (Low Density Lipoprotive) माने खराब कोलेस्ट्रोल (cholesterol)*

जब आप ब्लड प्रेशर (BP) चैक कराने डॉक्टर के पास जाते हैं तो वो आपको कहता है (HIGH BP)
आप पूछोगे... कारण बताओ.? तो वो कहेगा कोलेस्ट्रोल बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ है |

इससे भी ज्यादा खतरनाक एक  विष हे वो है.... VLDL (Very Low Density Lipoprotive) ये भी कोलेस्ट्रॉल जैसा ही विष है। अगर VLDL बहुत बढ़ गया तो आपको भगवान भी नहीं बचा सकता|

खाना सड़ने पर और जो जहर बनते हैं, उसमे एक ओर विष है जिसको अंग्रेजी में हम कहते हैं Triglycerides.!

जब भी डॉक्टर आपको कहे की आपका "triglycerides" बढ़ा हुआ हे तो समज लीजिए की आपके शरीर मे विष निर्माण हो रहा है |

*ये सभी विष तब बनते है, जब खाना सड़ता है |*

मतलब समझ लीजिए किसी का कोलेस्ट्रोल बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट मे ध्यान आना चाहिए कि खाना पच नहीं रहा है |

खाना पचने पर जो बनता है वो है....
मांस, मज्जा, रक्त, वीर्य, हड्डिया, मल, मूत्र, अस्थि.! और खाना नहीं पचने पर बनता है यूरिक एसिड, कोलेस्ट्रोल, LDL-VLDL.!

पेट मे बनने वाला यही जहर जब ज्यादा बढ़कर खून में आते हैं तो खून दिल की नाड़ियो में से निकल नहीं पाता और रोज थोड़ा थोड़ा कचरा जो खून में आया है इकट्ठा होता रहता है और एक दिन नाड़ी को ब्लॉक कर देता है जिसे आप *heart attack* कहते हैं.!

*महत्व की बात* : खाने को खाना नहीं, खाने को पचाना है | आपने क्या खाया, कितना खाया ? वो महत्व नहीं है.!

जब हम खाना खाते हैं तो जठराग्नि द्वारा सब एक दूसरे मे मिक्स होता है और फिर खाना पेस्ट मे बदलता हैं.! पेस्ट मे बदलने की क्रिया होने तक
1 घंटा 48 मिनट का समय लगता है ! उसके बाद जठराग्नि कम हो जाती है.! (बुझती तो नहीं लेकिन बहुत धीमी हो जाती है) पेस्ट बनने के बाद शरीर मे रस बनने की परिक्रिया शुरू होती है ! तब हमारे शरीर को पानी की जरूरत होती हैं। तब आप जितना इच्छा हो उतना पानी पिये.!

अब आप कहेंगे खाना खाने के पहले कितने मिनट तक पानी पी सकते हैं.? *तो खाना खाने के 45 मिनट पहले तक आप पानी पी सकते हैं !*

Thursday, 3 November 2016

दाद-खाज, ayurvedic medicine

दाद-खाज .....

स्कीन से जुड़ी बीमारियां भी कई बार गंभीर समस्या बन जाती है। ऐसी ही एक समस्या है एक्जीमा या दाद पर होने वाली खुजली और जलन दाद से पीडि़त व्यक्ति का जीना मुश्किल कर देती है। अगर आपके साथ भी कुछ ऐसा ही है

- दाद पर अनार के पत्तों को पीसकर लगाने से लाभ होता है।

- दाद को खुजला कर दिन में चार बार नींबू का रस लगाने से दाद ठीक हो जाते हैं।

- केले के गुदे में नींबू का रस लगाने से दाद ठीक हो जाता है।

- चर्म रोग में रोज बथुआ उबालकर निचोड़कर इसका रस पीएं और सब्जी खाएं।

- गाजर का बुरादा बारीक टुकड़े कर लें। इसमें सेंधा नमक डालकर सेंके और फिर गर्म-गर्म दाद पर डाल दें।

- कच्चे आलू का रस पीएं इससे दाद ठीक हो जाते हैं।

- नींबू के रस में सूखे सिंघाड़े को घिस कर लगाएं। पहले तो कुछ जलन होगी फिर ठंडक मिल जाएगी, कुछ दिन बाद इसे लगाने से दाद ठीक हो जाता है।

- हल्दी तीन बार दिन में एक बार रात को सोते समय हल्दी का लेप करते रहने से दाद ठीक हो जाता है।

- दाद होने पर गर्म पानी में अजवाइन पीसकर लेप करें। एक सप्ताह में ठीक हो जाएगा।

- अजवाइन को पानी में मिलाकर दाद धोएं।

- दाद में नीम के पत्तों का रस १२ ग्राम रोज पीना चाहिए।

- दाद होने पर गुलकंद और दूध पीने से फायदा होगा।

- नीम के पत्ती को दही के साथ पीसकर लगाने से दाद जड़ से साफ हो जाते है।

Ayurvedic ways to reduce joint pain

बूढ़े भी दौड़ने लगे ऐसे हैं ‘ज्वाइंट पेन’ के ये देसी नुस्खे.
1. लगभग 8-10 लहसुन की कली को तेल या घी में तल
लें और खाना खाने सेपहले उसे चबाएं। इससे जोड़ों के
दर्द से तुरंत आराम मिलता है।
-डांग जिला गुजरात के हर्बल जानकारों का मानना
है कि लहसुन की कलियों को तलकर या गर्म करके
कपूर के साथ मिलाकर दर्द वाली जगह पर थोड़ी देर
तक मालिश की जाए तो तुरंत आराम मिलता है।
2. साटोडी के फूल,आबा हल्दी और अदरक की समान
मात्रा को मिक्स कर उसका काढ़ा तैयार कर लें। इस
काढ़े की दो-तीन चम्मच मात्रा का सेवन करें। इससे
भी जोड़ों का दर्द दूर होता है।
3. आंकडा के ताजी पत्तियों पर सरसों का तेल के
साथ लेप तैयार कर लें। इस लेप को हल्का गर्म कर दर्द
वाली जगह पर लगाने से भी आराम मिलता है.
4. दालचीनी का 2 ग्राम का चूर्ण एक कप पानी में
मिलाकर रोजाना सुबह पिएं। इससे जोड़ों के दर्द में
काफी आराम मिलता है। डांग जिले के
आदिवासियों के अनुसार यह फॉमरूला डायबिटीज
की समस्या से भी निजात दिलाने में सहायक है।
आदिवासियों के अनुसार खाने-पीने में भी
दालचीनी का उपयोग शरीर को कई तरह की
समस्याओं से दूर रखता है।
5. बरसात के दिनों में इंद्रावन के फल का गूदा, नमक
और आजवाइन के मिश्रण का सेवन न सिर्फ जोड़ों के
दर्द से मुक्ति दिलाता है, बल्कि यह आर्थरायटिस में
भी शरीर को काफी लाभ पहुंचाता है।
6. आदिवासी आमतौर पर अनंतवेल के पत्तों की चाय
पीते हैं। अनंतबेल की एक ग्राम जड़ लगभग एक कप चाय
के लिए काफी है। अगर दिन में दो बार इसका सेवन
किया जाए तो जोड़ों के दर्द से तुरंत निजात मिल
जाती है।
7. आदिवासी हरी घास, अदरक, दालचीनी और लोंग
की समान मात्रा को मिश्रित कर इसकी गोली
बनाते हैं। वे इस गोली का नियमित सेवन करते हैं और
इसके साथ कम से कम 5 मिली पानी पीने की सलाह
देते हैं। यह प्रकिया अगर लगातार एक महीने तक
आजमाई जाए तो जोड़ों का दर्द खत्म हो जाता है।
8. पारिजात के 6-7 ताजे पत्ते अदरक के साथ पीस लें
और शहद का साथ इसका सेवन करें तो इससे न केवल
जोड़ों के दर्द से राहत मिलती है, बल्कि शरीर की
अन्य तकलीफें भी खत्म हो जाती हैं। माना जाता है
कि इस फॉमरूले का सेवन सायटिका जैसे रोगों से
निजात दिलाने में भी बहुत सहायक ह

Sunday, 23 October 2016

एनीमिया का आयुर्वेदिक इलाज / ayurvedic treatment of animia

एनीमिया का आयुर्वेदिक इलाज
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शरीर में थकान, कमजोरी और त्वचा का रंग
पीला पड़ने से हमारा शक पूरी तरह से सच में बदल
जाता है कि किसी इंसान
को एनीमिया यानी की उसके शरीर में खून
की कमी है। अगर खून में हीमोग्लोबिन
की मात्रा बहुत अधिक कम हो गई है तो,
आपकी त्वचा में सूजन भी देखने को मिल सकती है।
एनीमिया का करण, लोह तत्त्व / विटामिन
बी १२ / फोलिक एसिड की कमी होती है
जो भोजन में कमी के कारण हो सकती है
या अत्यधिक रक्त श्राव के कारण ।
कभी कभी अनुवांशिक कारणों से
भी हो सकती है। खून की कमी अक्सर महिलाओं
में देखी जाती है । अगर आपके घर में
भी किसी को एनीमिया है,
तो अच्छा होगा कि आप इसका आयुर्वेदिक
इलाज ही करें।
अगर शरीर में खून की कमी है तो अपने आहार पर
खास ध्यान दें।
खून बढ़ाने वाले आहार गेहूं, चना, मोठ, मूंग
को अंकुरित कर नींबू मिलाकर सुबह नाश्ते में
खाएं। मूंगफली के दाने गुड़ के साथ चबा-चबा कर
खाएं। पालक, सरसों, बथुआ, मटर, मेथी,
हरा धनिया, पुदीना तथा टमाटर खाएं। फलों में
पपीता, अंगूर, अमरूद, केला, सेब, चीकू, नींबू
का सेवन करें। अनाज, दालें, मुनक्का, किशमिश,
गाजर तथा पिंड खजूर दूध के साथ लें।
1. सेब और चुकंदर रस... एक गिलास सेब का जूस लें,
उसमें एक गिलास चुकंदर का रस और स्वाद के लिये
शहद मिलाएं। इसे रोजाना पिएं। इस पेय में बहुत
सारा लौह तत्व होता है।
2. तिल और शहद ...एक चम्मच तिल का बीज लें, उसे
2 घटों के लिये पानी में भिगो दें। फिर
पानी छान कर बीज को कूंच कर पेस्ट बना लें।
फिर इसमें 1 चम्मच शहद मिलाएं और दिन में इसे
दो बार खाएं।
3. एलोवेरा नाश्ते के 30 मिनट पहले 30 एमएल
एलोवेरा जूस दिन में रोजाना लें।
4. शरीर की मसाज शरीर से टॉक्सिन
निकालना भी जरुरी है। इसलिये अपने शरीर
की किसी अच्छे पेशेवर मसाज करने वाले से मसाज
करवाएं।
5. योगा सूर्यनमस्कार, सर्वांगआसन, शवआसन और
पश्चिमोत्तानासन करने से पूरे शरीर में खून
का फ्लो बढ़ जाता है। इसके अलावा गहरी सांस
भरना और प्रणायाम करना भी लाभदायक
होता है।
6. आम पके हुए आम के गूदे को अगर मीठे दूध के साथ
लिया जाए तो आपका हीमोग्लोबिन बढ़
जाएगा।
7. टिप्स- दिन में दो बार ठंडे पानी से नहाएं।
सुबह के समय सूरज की रौशनी में बैठें। चाय और
कॉफी पीना थोड़ा कम कर दें क्योंकि यह शरीर
को आयरन सोखने से रोकता है।
8. चिकित्सक से परामर्श यह घरेलू नुस्खे पूरी तरह से
आयुर्वेद पर आधारित हैं। यह पूरी तरह से
प्राकृतिक, नुकसान ना पहुंचाने वाला और
आसानी से घर में बनाये जाने वाले नुस्खे हैं। अगर
आपको लगे कि इसे लेने से आपको कोई नुकसान
हो रहा है तो, चिकित्सक से परामर्श करें।

कब्ज का आयुर्वेदिक इलाज / ayurvedic remedy of indigestion and gas

सारी बिमारियों की जड़ कब्ज का परमानेंट आयुर्वेदिक इलाज आयुर्वेद कहता है की लगभग सारी बिमारियों का सबसे पहला कारण या जड़ कब्ज ही होती है इसलिए कभी भी कब्ज को हल्के में नहीं लेना चाहिए !

एक पुरानी कहावत भी है की जिस का पेट साफ़ हो और जिस पर कोई कर्ज ना हो तो उससे बड़ा सुखी कौन है !

कब्ज होने का अर्थ है, पेट ठीक तरह से साफ नहीं हुआ है या शरीर में तरल पदार्थ की कमी है।

अगर आपको लंबे समय से कब्ज रहता है और आपने इस बीमारी का इलाज नहीं कराया है तो ये एक भयंकर बीमारी का रूप ले सकती है।

कब्ज होने पर व्यक्ति को पेट संबंधी दिक्कते भी होती हैं, जैसे पेट दर्द होना, ठीक से फ्रेश होने में दिक्कत होना, शरीर का मल पूरी तरह से न निकलना इत्यादि । आइए जानते हैं कब्ज के लिए आयुर्वेदिक उपचार –

– रोज लैट्रिन (शौच) जाने का समय बिल्कुल निश्चित होना चाहिए ! क्योंकि अगर समय निश्चित हो तो बिना किसी दवा के भी पेट साफ़ होने लगता है ! रोज निश्चित समय पर जाकर लैट्रिन में बैठने से कुछ दिन बाद अपने आप बिना किसी मेहनत के आराम से पेट साफ़ होने लगता है ! अगर लैट्रिन जाने का रोज का समय बार बार बदलेगा तो निश्चित कब्ज होनी ही है (नोट – लैट्रिन या पेशाब करते समय जोर लगाना बहुत हानिकारक होता है इसलिए अपने से जितना मल या पेशाब आसानी से बाहर निकल जाय उतना ही ठीक है, और ज्यादा मल या पेशाब जबरदस्ती बाहर निकालने के लिए कभी भी जोर नहीं देना चाहिए) !

– अगर किसी को कब्ज हो तो उसे अधिक मात्रा में पानी पीने की सलाह दी जाती है तथा गर्म पानी पीने से ज्यादा फ़ायदा होता हैं। पानी की कमी से आंतों में मल सूख जाता है और मल निष्कासन में जोर लगाना पडता है। इसलिये कब्ज से परेशान रोगियों के लिये सर्वोत्तम सलाह तो यह है कि मौसम के मुताबिक 24 घंटे में 3 से 5 लिटर पानी पीने की आदत डालना चाहिये। और अगर एक नार्मल आदमी भी इतना पानी रोज पिए तो उसे कभी कब्ज होगी ही नहीं ! सुबह उठते ही 1 लिटर पानी पीयें। फ़िर 2 से 5 किलोमीटर तेज चाल से मॉर्निंग वाक (पैदल चले) करें। शुरू में कुछ अनिच्छा और असुविधा महसूस होगी लेकिन धीरे-धीरे आदत पड़ जाने पर कब्ज जड़ से ही मिट जाएगी (ध्यान रखें सिर्फ पानी की सही मात्रा पीने भर से ही, बिना किसी दवा के, कब्ज की बीमारी निश्चित ठीक हो जाती है) !

– मेथी के दानों को हल्की आंच पर भून (सेंक) कर रात को 1-2 चम्मच खाने से सुबह पेट बढ़िया साफ़ होता है ! मेथी के दानों को बिना भूजे हुए खाने से इसका उल्टा फायदा मिलता है मतलब अगर दस्त हो रही हो तो कच्ची मेथी खाने से दस्त बंद हो जाती है ! मेथी कच्ची खाएं या भूजी, ये पेट के अलावा डायबिटिज तथा ह्रदय रोगों में भी बहुत फायदा है !

– कब्ज के पुराने रोगी को तरल पदार्थ, सादा और आसानी से पचने वाला खाना (जैसे दलिया, खिचड़ी) इत्यादि ही अधिक खाना चाहिए।

– कब्ज के दौरान कई बार सीने में भी जलन होने लगती हैं। ऐसे में एसीडिटी होने और कब्ज होने पर शक्कर और देशी गाय माता के घी को मिलाकर खाली पेट खाना चाहिए।

– हरी सब्जियों और फलों जैसे पपीता, अंगूर, गन्ना, अमरूद, टमाटर, चुकंदर, अंजीर फल, पालक का रस या कच्चा पालक, किशमिश को पानी में भिगोकर खाने, रात को मुनक्का खाने से कब्ज दूर करने में मदद मिलती है।

– इसबगोल की की भूसी कब्ज में परम हितकारी है। पानी के साथ 2-3 चम्मच इसबगोल की भूसी रात को सोते वक्त लेना फ़ायदेमंद है और इससे सुबह पेट आराम से साफ़ होता है (इसबगोल एक कुदरती रेशा है और आंतों की सक्रियता बढाता है) !

– श्री बाबा रामदेव के पतंजलि आयुर्वेद के भी कई प्रोडक्ट हैं (जैसे – दिव्य चूर्ण, उदर कल्प चूर्ण, त्रिफला चूर्ण, हरीतकी चूर्ण आदि) जो कब्ज में बहुत फायदेमंद हैं ! ये प्रोडक्ट सुरक्षित हैं और लम्बे समय तक इनका इस्तेमाल किया जा सकता है फिर रोज इनकी मात्रा धीरे धीरे कम करने से बिना इन प्रोडक्ट को खाए भी, पेट साफ़ होने लगता है !

– खाने में हरे पत्तेदार सब्जियों के अलावा रेशेदार सब्जियों का सेवन खासतौर पर करना चाहिए।

– गर्म पानी और गर्म दूध कब्ज दूर करते हैं। रात को गर्म दूध में भारतीय देशी गाय माता का घी डालकर पीना कब्ज को दूर करने में कारगार है।

– रात सोते समय, दूध में 2-3 छुवारे उबाल कर, छुवारे खाकर दूध पीने से, सुबह बढियां पेट साफ़ होता है !

– नींबू को गर्म पानी में डालकर पीने से कब्ज दूर होती है। सुबह-सुबह सिर्फ सादा गर्म पानी पीने से भी कब्ज को दूर करने में बहुत मदद मिलती है।

– अलसी के बीज का पाउडर पानी के साथ लेने से कब्ज में राहत मिलती है !

– दो सेब रोज खाने से या केला गर्म दूध के साथ रोज लेने से कब्ज में लाभ होता है।
  अमरूद और पपीता ये दोनो फ़ल कब्ज रोगी के लिये अमृत समान है। ये फ़ल दिन मे किसी भी समय खाये जा सकते हैं। इन फ़लों में पर्याप्त रेशा होता है और आंतों को शक्ति देते हैं। मल आसानी से विसर्जित होता है।

– सूखे अंगूर यानी किशमिश पानी में 3 घन्टे गलाकर खाने से आंतों को ताकत मिलती है और दस्त आसानी से आती है।

– अंजीर कब्ज हरण फ़ल है। 3 – 4 अंजीर फ़ल रात भर पानी में गलावें। सुबह खाएं। आंतों को गतिमान कर कब्ज का निवारण होता है।

– मुनक्का में कब्ज नष्ट करने के गुण हैं। 7 मुनक्का रोजाना रात को सोते वक्त लेने से कब्ज रोग में आराम मिलता है