Sunday, 23 April 2017

पैरों के तलवे में जलन को दूर करने के उपाय / domestic ways to relieve from burning feet

पैरों के तलवे में जलन को दूर करने के उपाय
पैरों की जलन से कई बार हम परेशान होते है, यह समस्या गर्मी के दिनों में ज्यादा परेशान करती है. इस समस्या के लिए हम डॉक्टर के पास जाना उचित नहीं समझते व आलस कर जाते है. इस समस्या को हम घरेलु नुस्खों के द्वारा दूर कर सकते है. आइये हम आपको बताते हैं पैरों के तलवे में जलन को दूर करने वाले घरेलू उपचार और जलन के मुख्य कारण.

पैरों के तलवे में जलन का कारण –

पैर में रक्त का प्रवाह कम होना
उम्र अधिक होना
डायबटीज भी है एक कारण
किडनी की परेशानी
विटामिन की कमी
शराब अधिक पीना
किसी दवाई का साइड इफेक्ट्स
ब्लडप्रेशर

पैरों के तलवे में जलन को दूर करने के आसान घरेलु उपाय

1 बड़ी सौंफ सौंफ शरीर में ठंडक देती है, हाथ पैर की जलन को दूर करने लिए ये बहुत काम आती है. बड़ी सौंफ, खड़ा धना व मिश्री को बराबर मात्रा में मिलाकर पीस लें, अब दोनों समय खाने के बाद 1-1 चम्मच पानी के साथ लें, कुछ दिन लगातार खाने से आपको आराम मिलेगा.
2 अदरक अदरक भी हाथ पैर की जलन कम करता है. ये शरीर में खून का प्रवाह बढ़ाता है, रोजाना एक टुकड़ा अदरक का खाने से शरीर में खून सही ढंग से प्रवाह होगा, जिससे पैर की जलन व दर्द दूर होगा. इसके अलावा आप नारियल या जैतून के तेल में थोडा सा अदरक का रस मिलाकर हल्का गुनगुना कर लें, अब पैर व हाथ में 10 min तक मालिश करें, रोजाना ऐसा करने से आराम मिलेगा.
3 विटामिन से युक्त चीजें खाएं विटामिन B3 की कमी से हाथ पैरों में जलन होती है, इसलिए विटामिन से युक्त भोज्य पदार्थ का सेवन जरुर करें. इसके लिए आप , दूध, मूंगफली, मटर, मशरूम का सेवन करें.
4 हरी घास पर चलें नेचुरल थेरिपी से अच्छा कोई इलाज नहीं होता है. बिना चप्पल के हरी घास पर चले, इससे पैर में खून का संचार अच्छे से होता है.
5 मसाज खून संचार बढ़ाने के लिए मसाज करना सबसे कारीगर है, नारियल या जैतून तेल से पैरों की कुछ देर मालिश करें, रोजाना ऐसा करने से आपको जलन की परेशानी दूर हो जाएगी.
6 लौकी घिसें लौकी से ठंडक मिलती है, इसके लिए लौकी को काट कर पैरों में कुछ देर घिसें, इसके अलावा आप उसके गूदे को निकालकर उसे लगायें. पुरे शरीर की गर्मी पैरों में अधिक महसूस होती है. लौकी से पैर में ठंडक मिलती है.
7 धनिया धनिया भी ठंडी प्रवत्ति का होता है, इसके सेवन से पैर हाथ में ठंडक मिलती है. मिश्री व धनिया को मिलाकर पाउडर बना लें अब इसे 1-2 चम्मच रोज खाएं. कुछ ही दिन में आराम मिलेगा.
8 मेहँदी मेहँदी काफी ठंडक देती है, ये सब हम सभी जानते है, इसे हाथों में लगाना हर औरत, लड़की को पसंद होता है. लेकिन ये एक घरेलु उपचार भी है जो हाथ पैर की जलन ख़त्म करती है. मेहँदी पाउडर को निम्बू का रस व सिरके के साथ मिलाकर पेस्ट बना लें, अब इसे पैर के तलवों पर कुछ देर लगायें फिर धो लें. इसी तरह आप इसे हाथ में भी लगा सकते है. कुछ दिन तक करने से जलन ख़त्म हो जाएगी, साथ ही पैरों का दर्द भी गायब हो जायेगा.
9 राइ का तेल राइ या सरसों का तेल मालिश के लिए सबसे अच्छा होता है. इससे सिकाई करना भी लाभकारी है, ये जलन के साथ साथ दर्द निवारक भी है. इसके लिए आप आधी बाल्टी गुनगुने पानी में 3-4 चम्मच तेल डालें और 5 min तक इसमें पैरों को डालें रहें. अब फूट फिलर से पैर घिसें जिससे पैर की सारी गन्दगी निकल जाये. अब ठन्डे पानी से पैर धो लें. ऐसा करने से दर्द भी कम होगा.
10 मक्खन मक्खन हर किसी की घर में आसानी से मिल जाता है, जिसे जब चाहें आप उपयोग कर सकते है. 1-2 चम्मच मक्खन में कुछ दाने मिश्री के मिलाएं, अब इसे अच्छे से मिलाएं, जिससे मिश्री घुल जाये. अब इसे पैर व हाथ में लगायें कुछ देर बाद धो लें, रोजाना करने से आपको फर्क समझ आएगा.

आंत की सूजन को मिटाने के लिए आयुर्वेदिक इलाज / ayurvedic remedies of ulcerative colitis

अल्सरेटिव कोलाइटिस (आंत की सूजन):                                                     कोलाइटिस वालो को 3 चीजे तुरंत बंद कर देनी चाहिए दूध, घी और मीठा। ये तीनो उनके लिए ज़हर के समान हैं।
घरेलु नुस्खे।
अनार :-
अनार के दाने लीजिये, अगर दाने ज़्यादा कठोर हो तो उसको चबा कर फिर इसके बीज फ़ेंक दे, नहीं तो नर्म दाने हो तो इसको चबा चबा कर खा ले। ध्यान रखे अनार का जूस नहीं पीना हैं, जितनी देर तक हो सके अनार के दानो को मुंह में चबाओ और फिर खाओ। कोलाइटिस वालो को कुछ पचता नहीं, तो शुरू शुरू में २ चम्मच, ४ चम्मच शुरू करे, फिर धीरे धीरे आधी कटोरी तक खाए। अनार आप कभी भी खा सकते हैं, खाली पेट भी खा सकते हैं, भोजन के बाद भी, किसी भी समय अनार खा सकते हैं।

बेल :-
बेल जो शिव पर चढ़ाते हैं, ये बहुत अच्छी औषिधि हैं, कोलाइटिस के लिए, बेल के कच्चे फल को लीजिये, इसको बीच में काट कर इसको सुखा लीजिये, फिर इसको कूट कर चूर्ण कर लीजिये, ये लाल रंग का हो जायेगा। मगर ध्यान रहे इस में कीड़े बहुत जल्दी पड़ जाते हैं। इसलिए जितना इस्तेमाल हो सके उतना ही चूर्ण करे, बाकी सुखा कर रखे ले। इस चूर्ण को छाछ तक्र के साथ पिए। छाछ तक्र अपने आप में कोलाइटिस की बहुत बढ़िया औषिधि हैं।

आंव व् संग्रहिणी में लाभदायक बिल्व चूर्ण।

बिल्व (बेल – जिसके पत्र और फल शिवजी पर पूजा के लिए चढ़ाये जाते हैं) का चूर्ण सुबह शाम 1-1 चम्मच या बिल्व का जूस 1 गिलास पीने से आंव में बहुत आराम आता हैं। और मल भी बांध कर आता हैं।

आंव और संग्रहिणी वाले इसको ज़रूर अपनाये।

छाछ तक्र :-
छाछ तक्र इस रोग में बहुत ही गुणकारी हैं। हर रोज़ एक गिलास से ले कर ४ गिलास तक पीना प्रारम्भ करे। अगर रोग बहुत ही भयंकर अवस्था में पहुँच गया है तो रोगी को सप्ताह में एक दिन सिर्फ छाछ तक्र पर ही निकालना चाहिए, इस दिन उसको कुछ भी नहीं खाना, जब भी भूख लगे तो सिर्फ इसको ही पिए।

छाछ तक्र बनाने की विधि :: दही में एक चौथाई पानी मिलाकर अच्छी तरह से मथ लर मकखन निकालने के बाद जो बचता है उसे तक्र कहते है, तक्र शरीर में जमें मैल को बाहर निकालकर वीर्य बनाने का काम करता है, ये कफ़ नाशक है

अलसी :-
अलसी के नित्य सेवन करने से इस रोग में आश्चर्य जनक सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। छाछ के साथ इसका एक चम्मच चूर्ण नित्य सेवन करे। ध्यान रहे अलसी को चूर्ण करने के बाद इसके गुण कम हो जाते हैं। चूर्ण करने के बाद इसको १० दिन के अंदर इस्तेमाल कर लेना चाहिए, अन्यथा इसके गुणों में बहुत कमी आती हैं।

पत्ता गोभी :-
पत्ता गोभी एक चमत्कारिक औषिधि हैं कोलाइटिस के लिए, इसमें एंटी ऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाये जाते हैं। इसमें ग्लूटमाइन होता हैं, जिसमे घाव भरने की और पाचन शक्ति को बढ़ने की अद्भुत क्षमता होती हैं। अगर नियमित इसका रस पिया जाए तो ये कोलाइटिस में अदभुत परिणाम देता हैं। शुरू में आधा कटोरी जूस से शुरू करे फिर धीरे धीरे इसको एक से 4 गिलास तक नियमित करे। जब आप 4 गिलास पीना शुरू करेंगे तो एक हफ्ते में आपकी बीमारी जड़ से ख़त्म होनी शुरू होगी। ध्यान रहे इसका जूस ताज़ा ही पीना हैं।

अल्फाल्फा :-
अल्फाल्फा (रिजका, जो अक्सर गाँवों में लोग अपने जानवरो के चारे के लिए इस्तेमाल करते हैं, आज वैज्ञानिको ने इसको सुपर फ़ूड माना हैं ) अल्सरेटिव कोलाइटिस के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं हैं।

गेंहू के जवारों :-
गेंहू के जवारों का रस इस रोग में बहुत ही बढ़िया औषिधि हैं। अगर रोगी एक महीने से ३ महीने तक इस का सेवन करे तो उसको इस के आश्चर्य चकित करने वाले परिणाम मिलते हैं।

एलो वेरा :-
सूजन और घावों को भरने में और पस ख़त्म करने में ये बहुत बढ़िया काम करता हैं। इसका सेवन हर रोज़ सुबह एक गिलास गुनगुने पानी में १० मि. ली. से शुरू कर के एक महीने में ३० मि. ली. तक करे।

कुटज :-
कुटज कोलाइटिस के लिए बहुत बढ़िया औषिधि हैं, कुटजारिष्ट के नाम से आयुर्वेद में सिरप आता हैं, आप इसका सेवन हर रोज़ 2 से 4 चम्मच एक गिलास पानी में डाल कर पिए। बार बार लगने वाले दस्त में ये बहुत उपयोगी हैं।

गिलोय : –
गिलोय को आयुर्वेद की अमृत कहा जाता हैं, ये कोलाइटिस में अमृत समान हैं, गिलोय के ताज़े सत्व में शहद डाल कर नियमित सेवन करे।

निर्गुण्डी :-
निर्गुण्डी के पत्तों के रस को शहद के साथ दिन में 2 बार देने से लाभ मिलता है ।

रोगियों को हर रोज़ सुबह नित्य कर्म से निर्व्रत हो कर बहुत मंद गति से आधा घंटा तक कपाल भाति करनी चाहिए। तेज़ तेज़ करेंगे तो नुक्सान हो सकता हैं। पेट दर्द होने पर हींग का लेप अपने पेट के इर्द गिर्द करे। नारियल पानी हर रोज़ पिए। आप कुछ भी खाए उसको इतना चबाइए के आपकी आंतो को मेहनत ना करनी पड़े।

किडनी सिकुड़ना का इलाज / kidney failure ayurvedic remedy

किडनी सिकुड़ना का इलाज

दोस्तों किडनी फेलियर का एक सबसे बड़ा कारन है किडनी का सिकुड़ना। अगर किडनी सिकुड़ जाए तो क्या करें.

जब हमारी किडनी सिकुड़ जाती है तो किडनी की छोटी रचना जिसे हम नेफ्रॉन्स कहते है जो फ़िल्टर का कम करती है ये नेफ्रान्स दब जाते है और उनका फंक्शन ठीक से नहीं हो पता जिससे किडनी फ़िल्टर भी ठीक से नहीं हो कर पाती और वही बिषैला पदार्थ हमारे ब्लड में शरीर में जाने लगता है और Creatinine, urea ये सब ब्लड में बढ़ जाते है।

ऐसे मरीज जिनकी किडनी सिकुड़ गयी है और डॉक्टर ने बोल दिया है की इसका कोई इलाज नहीं है किडनी ट्रांस्प्लांट के आलावा वो मरीज निराश न हो। उनके लिए विशेष आयुर्वेदिक इलाज बता रहें हैं आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ. योगेश गौतम जी.

जिन मरीजों की किडनी सिकुड़ गयी हो और डॉक्टर उनको किडनी ट्रांसप्लांट ही एक मात्र विकल्प बता रहें हों ऐसे मरीजो को करना क्या है के “मकोय” यह एक पौधा होता है जो पूरे भारत में पाया जाता है इसके फल छोटे छोटे होते है कुछ लोग इसे खाते भी है. इसका पूरा पौधा ले लीजिये इसको अच्छे से धुलाई कर के इसका रस निकाल लें, इस मकोय के रस को 20 ml दिन में दो बार पीना है तीन महीने तक लगातार.

3 महीने बाद सोनोग्राफी करवा के देखे किडनी के सिकुड़ने में यह बहुत ही लाभकारी है। डॉ योगेश गौतम.

विशेष – मकोय की सब्जी भी बना कर खायी जाती है. इसके फल भी खाए जाते हैं. इसका अर्क भी आता है. जिस भी प्रकार से किडनी के रोगी इसका सेवन करें तो उनको लाभ होगा.

खांसी के लिए आर्युवेदिक उपचार / domestic ways to relive from cough

खांसी के लिए आर्युवेदिक उपचार
(चाहे किसी भी प्रकार की हो)

1:- हल्दी पाउडर आधा चम्मच मुह के अंतिम हिस्से में डाले और चुप होकर बैठ जायें 10 मिनट तक
ये धीरे धीरे लार के साथ अंदर चली जायेगी
इससे टांसिल भी ठीक हो जाता है पूर्णरूप से

2:- अदरक और पान
दोनों के एक-एक चम्मच रस
को गर्म करने के बाद उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर चाट ले

3:- अदरक के टूकड़े को तवे या आग में भूनकर उसपर हल्दी डालकर
चूसते रहे
(इससे तो भयानक से भयानक खांसी दूर हो जाती है)

4:- अनार के रस को गर्म करके पीने से भी खांसी ठीक हो जाती है

5:- अमरूद को आग में भूनकर खाने से भी खासी ठीक हो जाती है

6:-हल्दी एक चौथाई चम्मच को गर्म दूध में मिलाकर पीये

7:- काली मिर्च को मुह में डालकर चूसते रहे
इससे भी खांसी दूर होती है

यात्रा मे उल्टी रोकने के घरेलू और आयुर्वेदिक तरीके / ayurvedic ways to stop vomiting while travelling


🍃 *आरोग्यं :-*
अगर आपको भी सफर में होती है उलटी तो अपनाएं ये घरेलू नुस्खे ! तुरंत होगा असर शुरू
कई लोगों को घूमने का शौक तो होता है पर वो उलटी के डर से कहीं बाहर नहीं निकल पाते। ऐसे में परेशान होने की जरूरत नहीं क्योंकि आपके किचन में ही ऐसी कई चीजें मौजूद हैं जिसका इस्तेमाल कर आप सफर के दौरान उलटी की समस्या से बच सकते हैं। आपका भी कोई दोस्त गाड़ी या बस में बैठते ही उलटी करता है? तो उसे भी बताएं ये आसान घरेलू नुस्खे…

अदरक 
अदरक में ऐंटीमैनिक गुण होते हैं। एंटीमैनिक एक ऐसा पदार्थ है जो उलटी और चक्कर आने से बचाता है। सफर के दौरान जी मिचलाने पर अदरक की गोलियां या फिर अदरक की चाय का सेवन करें। इससे आपको उलटी नहीं आएगी। अगर हो सके तो अदरक अपने साथ ही रखें। अगर घबराहट हो तो इसे थोड़ा-थोड़ा खाते रहें।

प्याज का रस 
सफर में होने वाली उलटियों से बचने के लिए सफर पर जाने से आधे घंटे पहले 1 चम्मच प्याज के रस में 1 चम्मच अदरक के रस को मिलाकर लेना चाहिए। इससे आपको सफर के दौरान उलटियां नहीं आएंगी। लेकिन अगर सफर लंबा है तो यह रस साथ में बनाकर भी रख सकते हैं।

लौंग का जादू 
सफर के दौरान जैसे ही आपको लगे कि जी मिचलाने लगा है तो आपको तुरंत ही अपने मुंह में लौंग रखकर चूसनी चाहिए। ऐसा करने से आपका जी मिचलाना बंद हो जाएगा।.

मददगार है पुदीना 
पुदीना पेट की मांसपेशियों को आराम देता है और इस तरह चक्कर आने और यात्रा के दौरान तबीयत खराब लगने की स्थिति को भी खत्म करता है। पुदीने का तेल भी उलटियों को रोकने में बेहद मददगार है। इसके लिए रुमाल पर पुदीने के तेल की कुछ बूंदे छिड़कें और सफर के दौरान उसे सूंघते रहें। सूखे पुदीने के पत्तों को गर्म पानी में मिलाकर खुद के लिए पुदीने की चाय बनाएं। इस मिश्रण को अच्छे से मिलाएं और इसमें 1 चम्मच शहद मिलाएं। कहीं निकलने से पहले इस मिश्रण को पिएं।

नींबू का कमाल 
नींबू में मौजूद सिट्रिक ऐसिड उलटी और जी मिचलाने की समस्या को रोकते हैं। एक छोटे कप में गर्म पानी लें और उसमें 1 नींबू का रस व थोड़ा सा नमक मिलाएं। इसे अच्छे से मिलाकर पिएं। आप नींबू के रस को गर्म पानी में मिलाकर या शहद डालकर भी पी सकते हैं। यात्रा के दौरान होने वाली परेशानियों को दूर करने का यह एक कारगर इलाज है।

यूरिक एसिड का आयुर्वेदिक एवं घरेलु इलाज / ayurvedic and domestic remedy of uric acid

यूरिक एसिड का घरेलु इलाज.

1. यूरिक एसिड बढ़ने पर हाईड्रालिक फाइबर युक्त आहार खायें। जिसमें पालक, ब्रोकली, ओट्स, दलिया, इसबगोल भूसी फायदेमंद हैं।
2. आंवला रस और एलोवेरा रस मिश्रण कर सुबह शाम खाने से 10 मिनट पहले पीने से यूरिक एसिड कम करने में सक्षम है।
3. टमाटर और अंगूर का जूस पीने से यूरिक एसिड तेजी से कम करने में सक्षम है।
4. तीनो वक्त खाना खाने के 5 मिनट बाद 1 चम्मच अलसी के बीज का बारीक चबाकर खाने से भोजन पाचन क्रिया में यूरिक ऐसिड नहीं बनता।
5. 1 चम्मच शहद और 1 चम्मच अश्वगन्धा पाउडर को 1 कप गर्म दूध के साथ घोल कर पीने से यूरिक एसिड नियत्रंण में आता है।
6. यूरिक एसिड बढ़ने के दौरान जैतून तेल का इस्तेमाल खाने तड़के-खाना बनाने में करें। जैतून तेल में विटामिन-ई एवं मिनरलस मौजूद हैं। जोकि यूरिक एसिड नियत्रंण करने में सहायक हैं।
7. यूरिक एसिड बढ़ने पर खाने से 15 पहले अखरोट खाने से पाचन क्रिया शर्करा को ऐमिनो एसिड नियत्रंण करती है। जोकि प्रोटीन को यूरिक एसिड़ में बदलने से रोकने में सहायक है।
8. विटामिन सी युक्त चीजें खाने में सेवन करें। विटामिन सी यूरिक एसिड को मूत्र के रास्ते विसर्ज करने में सहायक है।
9. रोज 2-3 चैरी खाने से यूरिक एसिड नियत्रंण में रखने में सक्षम है। चेरी गांठों में एसिड क्रिस्टल नहीं जमने देती।
10. सलाद में आधा नींबू निचैड कर खायें। दिन में 1 बार 1 गिलास पानी में 1 नींबू निचैंड कर पीने से यूरिक एसिड मूत्र के माध्यम से निकलने में सक्षम है। चीनी, मीठा न मिलायें।
11. तेजी से यूरिक एसिड घटाने के लिए रोज सुबह शाम 45-45 मिनट तेज पैदल चलकर पसीना बहायें। तेज पैदल चलने से एसिड क्रिस्टल जोड़ों गांठों पर जमने से रोकता है। साथ में रक्त संचार को तीब्र कर रक्त संचार सुचारू करने में सक्षम है। पैदल चलना से शरीर में होने वाले सैकड़ों से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है। तेज पैदल चलना एसिड एसिड को शीध्र नियत्रंण करने में सक्षम पाया गया है।
12. बाहर का खाना पूर्ण रूप से बन्द कर दें। घर पर बना सात्विक ताजा भोजन खायें। खाने में ताजे फल, हरी सब्जियां, सलाद, फाइबर युक्त संतुलित पौष्टिक आहर लें।
13. रोज योगा आसान व्यायाम करें। योग आसान व्यायाय यूरिक एसिड को घटाने में मद्दगार है। साथ में योगा-आसान-व्यायाम करने से मोटापा वजन नियत्रंण रहेगा।
14. ज्यादा सूजन दर्द में आराम के लिए गर्म पानी में सूती कपड़ा भिगो कर सेकन करें।
15. यूरिक एसिड समस्या शुरू होने पर तुरन्त जांच उपचार करवायें। यूरिक एसिड ज्यादा दिनों तक रहने से अन्य रोग आसानी से घर बना लेते हैं।

17. नारियल पानी रोज पिए।

18. खाना खाने के आधे घंटे बाद 1 चम्मच अलसी के बीज चबाकर खाने से फ़ायदा मिलता है।

19. बथुए का जूस खाली पेट पिएँ। दो घंटे तक कुछ न खाएँ पिएँ।

20. अजवाइन भी शरीर में हाइ यूरिक एसिड को कम करने की अच्छी दवा है। इसलिए भोजन पकाने में अजवाइन का इस्तेमाल करें।

21. हर रोज दो चम्मच सेब का सिरका 1 गिलास पानी में मिलाकर दिन में 3 बार पिएँ। लाभ दिखेगा।

22. सेब, गाजर और चुकंदर का जूस हर रोज़ पीने से बॉडी का pH लेवल बढ़ता है और यूरिक एसिड कम होता है।

23. एक मध्यम आकार का कच्चा पपीता लें, उसे काटकर छोटे छोटे टुकड़े कर लें। बीजों को हटा दें। कटे हुए पपीते को 2 लीटर पानी में 5 मिनट के लिए उबालें। इस उबले पानी को ठंडा करके छान लें और इसे दिन में चाय की तरह 2 से 3 बार पिएँ।

24. कुकिंग के लिए तिल, सरसों या ऑलिव ऑयल का प्रयोग करें। हाइ फ़ाइबर डाइट लें।

25. अगर लौकी का मौसम हो तो सुबह खाली पेट लौकी (घीया, दूधी) का जूस निकाल कर एक गिलास इस में 5-5 पत्ते तुलसी और पुदीना के भी डाल ले, अब इसमें थोड़ा सेंधा नमक मिला ले। और इसको नियमित पिए कम से कम 30 से 90 दिन तक।

26. रात को सोते समय डेढ़ गिलास साधारण पानी में अर्जुन की छाल का चूर्ण एक चम्मच और दाल चीनी पाउडर आधा चम्मच डाल कर चाय की तरह पकाये और थोड़ा पकने पर छान कर निचोड़ कर पी ले। ये भी 30 से 90 दिन तक करे।

27. चोबचीनी का चूर्ण का आधा आधा चम्मच सवेरे खाली पेट और रात को सोने के समय पानी से लेने पर कुछ दिनों में यूरिक एसिड खत्म हो जाता है।

28. दिन में कम से कम 3-5 लीटर पानी का सेवन करें। पानी की पर्याप्‍त मात्रा से शरीर का यूरिक एसिड पेशाब के रास्‍ते से बाहर निकल जाएगा। इसलिए थोड़ी – थोड़ी देर में पानी को जरूर पीते रहें।

यूरिक एसिड में परहेज.
दही, चावल, अचार, ड्राई फ्रूट्स, दाल, और पालक बंद कर दे।

ओमेगा 3 फैटी एसिड का सेवन न करें।

पैनकेक, केक, पेस्ट्री जैसी वस्तुएँ न खाएँ।
डिब्बा बंद फ़ूड खाने से बचें।
शराब और बीयर से परहेज़ करें।

रात को सोते समय दूध या दाल का सेवन अत्यंत हानिकारक हैं। अगर दाल खातें हैं तो ये छिलके वाली खानी है, धुली हुयी दालें यूरिक एसिड की समस्या के लिए

सब से बड़ी बात खाना खाते समय पानी नहीं पीना, पानी खाने से डेढ़ घंटे पहले या बाद में ही पीना हैं।

फ़ास्ट फ़ूड, कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड फ़ूड, अंडा, मांस, मछली, शराब, और धूम्रपान बिलकुल बंद कर दे। इन से आपकी यूरिक एसिड की समस्या,
हार्ट की कोई भी समस्या, जोड़ो के दर्द, हाई ब्लड प्रेशर की समस्या में बहुत आराम आएगा।

रसोईघर से स्वास्थ्य सुझाव / ayurvedic and domestic ways for general health problem

रसोईघर से स्वास्थ्य सुझाव         

खराश या सूखी खाँसी के लिये अदरक और गुड़
गले में खराश या सूखी खाँसी होने पर पिसी हुई अदरक में गुड़ और घी मिलाकर खाएँ। गुड़ और घी के स्थान पर शहद का प्रयोग भी किया जा सकता है। आराम मिलेगा।

दमे के लिये तुलसी और वासा
दमे के रोगियों को तुलसी की १० पत्तियों के साथ वासा (अडूसा या वासक) का २५० मिलीलीटर पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर दें। लगभग २१ दिनों तक सुबह यह काढ़ा पीने से आराम आ जाता है।

अरुचि के लिये मुनक्का हरड़ और चीनी
भूख न लगती हो तो बराबर मात्रा में मुनक्का (बीज निकाल दें), हरड़ और चीनी को पीसकर चटनी बना लें। इसे पाँच छह ग्राम की मात्रा में (एक छोटा चम्मच), थोड़ा शहद मिला कर खाने से पहले दिन में दो बार चाटें।

मौसमी खाँसी के लिये सेंधा नमक
सेंधे नमक की लगभग एक सौ ग्राम डली को चिमटे से पकड़कर आग पर, गैस पर या तवे पर अच्छी तरह गर्म कर लें। जब लाल होने लगे तब गर्म डली को तुरंत आधा कप पानी में डुबोकर निकाल लें और नमकीन गर्म पानी को एक ही बार में पी जाएँ। ऐसा नमकीन पानी सोते समय लगातार दो-तीन दिन पीने से खाँसी, विशेषकर बलगमी खाँसी से आराम मिलता है। नमक की डली को सुखाकर रख लें एक ही डली का बार बार प्रयोग किया जा सकता है।

बदन के दर्द में कपूर और सरसों का तेल
१० ग्राम कपूर, २०० ग्राम सरसों का तेल - दोनों को शीशी में भरकर मजबूत ठक्कन लगा दें तथा शीशी धूप में रख दें। जब दोनों वस्तुएँ मिलकर एक रस होकर घुल जाए तब इस तेल की मालिश से नसों का दर्द, पीठ और कमर का दर्द और, माँसपेशियों के दर्द शीघ्र ही ठीक हो जाते हैं।

बैठे हुए गले के लिये मुलेठी का चूर्ण
मुलेठी के चूर्ण को पान के पत्ते में रखकर खाने से बैठा हुआ गला ठीक हो जाता है। या सोते समय एक ग्राम मुलेठी के चूर्ण को मुख में रखकर कुछ देर चबाते रहे। फिर वैसे ही मुँह में रखकर जाएँ। प्रातः काल तक गला साफ हो जायेगा। गले के दर्द और सूजन में भी आराम आ जाता है।

फटे हाथ पैरों के लिये सरसों या जैतून का तेल
नाभि में प्रतिदिन सरसों का तेल लगाने से होंठ नहीं फटते और फटे हुए होंठ मुलायम और सुन्दर हो जाते है। साथ ही नेत्रों की खुजली और खुश्की दूर हो जाती है।

    सर्दी बुखार और साँस के पुराने रोगों के लिये तुलसी-
तुलसी की २१ पत्तियाँ स्वच्छ खरल या सिलबट्टे (जिस पर मसाला न पीसा गया हो) पर चटनी की भाँति पीस लें और १० से ३० ग्राम मीठे दही में मिलाकर नित्य प्रातः खाली पेट तीन मास तक खाएँ। दही खट्टा न हो। यदि दही माफिक न आये तो एक-दो चम्मच शहद मिलाकर लें। छोटे बच्चों को आधा ग्राम तुलसी की चटनी शहद में मिलाकर दें। दूध के साथ भूलकर भी न दें। औषधि प्रातः खाली पेट लें। आधा एक घंटे पश्चात नाश्ता ले सकते हैं।

मुँह और गले के कष्टों के लिये सौंफ और मिश्री
भोजन के बाद दोनों समय आधा चम्मच सौंफ चबाने से मुख की अनेक बीमारियाँ और सूखी खाँसी दूर होती है, बैठी हुई आवाज़ खुल जाती है, गले की खुश्की ठीक होती है और आवाज मधुर हो जाती है।

जोड़ों के दर्द के लिये बथुए का रस
बथुआ के ताजा पत्तों का रस पन्द्रह ग्राम प्रतिदिन पीने से गठिया दूर होता है। इस रस में नमक-चीनी आदि कुछ न मिलाएँ। नित्य प्रातः खाली पेट लें या फिर शाम चार बजे। इसके लेने के आगे पीछे दो-दो घंटे कुछ न लें। दो तीन माह तक लें।

अधिक क्रोध के लिये आँवले का मुरब्बा और गुलकंद
बहुत क्रोध आता हो तो सुबह आँवले का मुरब्बा एक नग प्रतिदिन खाएँ और शाम को गुलकंद एक चम्मच खाकर ऊपर से दूध पी लें। क्रोध आना शांत हो जायेगा
 

पेट में कीड़ों के लिये अजवायन और नमक
आधा ग्राम अजवायन चूर्ण में स्वादानुसार काला नमक मिलाकर रात्रि के समय रोजाना गर्म जल से देने से बच्चों के पेट के कीडे नष्ट होते हैं। बडों के लिये- चार भाग अजवायन के चूर्ण में एक भाग काला नमक मिलाना चाहिये और दो ग्राम की मात्रा में सोने से पहले गर्म पानी के साथ लेना चाहिये।

घुटनों में दर्द के लिये अखरोट
सवेरे खाली पेट तीन या चार अखरोट की गिरियाँ खाने से घुटनों का दर्द मैं आराम हो जाता है।

पेट में वायु-गैस के लिये मट्ठा और अजवायन-
पेट में वायु बनने की अवस्था में भोजन के बाद १२५ ग्राम दही के मट्ठे में दो ग्राम अजवायन और आधा ग्राम काला नमक मिलाकर खाने से वायु-गैस मिटती है। एक से दो सप्ताह तक आवश्यकतानुसार दिन के भोजन के पश्चात लें।

काले धब्बों के लिये नीबू और नारियल का तेल
चेहरे व कोहनी पर काले धब्बे दूर करने के लिये आधा चम्मच नारियल के तेल में आधे नीबू का रस निचोड़ें और त्वचा पर रगड़ें, फिर गुनगुने पानी से धो लें।

शारीरिक दुर्बलता के लिये दूध और दालचीनी
दो ग्राम दालचीनी का चूर्ण सुबह शाम दूध के साथ लेने से शारीरिक दुर्बलता दूर होती है और शरीर स्वस्थ हो जाता है। दो ग्राम दालचीनी के स्थान पर एक ग्राम जायफल का चूर्ण भी लिया जा सकता है।

मसूढ़ों की सूजन के लिये अजवायन
मसूढ़ों में सूजन होने पर अजवाइन के तेल की कुछ बूँदें पानी में मिलाकर कुल्ला करने से सूजन में आराम आ जाता है।

हृदय रोग में आँवले का मुरब्बा
आँवले का मुरब्बा दिन में तीन बार सेवन करने से यह दिल की कमजोरी, धड़कन का असामान्य होना तथा दिल के रोग में अत्यंत लाभ होता है, साथ ही पित्त, ज्वर, उल्टी, जलन आदि में भी आराम मिलता है।

हकलाना या तुतलाना दूर करने के लिये दूध और काली मिर्च
हकलाना या तुतलाना दूर करने के लिये १० ग्राम दूध में २५० ग्राम कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर रख लें। २-२ ग्राम चूर्ण दिन में दो बार मक्खन के साथ मिलाकर खाएँ।               

श्वास रोगों के लिये दूध और पीपल
एक पाव दूध में ५ पीपल डालकर गर्म करें, इसमें चीनी डालकर सुबह और ‘शाम पीने से साँस की नली के रोग जैसे खाँसी, जुकाम, दमा, फेफड़े की कमजोरी आदि रोग दूर होते हैं।

अच्छी नींद के लिये मलाई और गुड़।
रात में नींद न आती हो तो मलाई में गुड़ मिलाकर खाएँ और पानी पी लें। थोड़ी देर में नींद आ जाएगी।

कमजोरी को दूर करने का सरल उपाय
एक-एक चम्मच अदरक व आंवले के रस को दो कप पानी में उबाल कर छान लें। इसे दिन में तीन बार पियें। स्वाद के लिये काला नमक या शहद मिलाएँ।

पेट के रोग दूर करने के लिये मट्ठा
मट्ठे में काला नमक और भुना जीरा मिलाएँ और हींग का तड़का लगा दें। ऐसा मट्ठा पीने से हर प्रकार के पेट के रोग में लाभ मिलता है। यह बासी या खट्टा नहीं होना चाहिये।

घमौरियों के लिये मुल्तानी मिट्टी
घमौरियों पर मुल्तानी मिट्टी में पानी मिलाकर लगाने से रात भर में आराम आ जाता है।

खुजली की घरेलू दवा
फटकरी के पानी से खुजली की जगह धोकर साफ करें, उस पर कपूर को नारियल के तेल मिलाकर लगाएँ लाभ होगा।

मुहाँसों के लिये संतरे के छिलके
संतरे के छिलके को पीसकर मुहाँसों पर लगाने से वे जल्दी ठीक हो जाते हैं। नियमित रूप से ५ मिनट तक रोज संतरों के छिलके का पिसा हुआ मिश्रण चेहरे पर लगाने से मुहाँसों के धब्बे दूर होकर रंग में निखार आ जाता है।

बंद नाक खोलने के लिये अजवायन की भाप
एक चम्मच अजवायन पीस कर गरम पानी के साथ उबालें और उसकी भाप में साँस लें। कुछ ही मिनटों में आराम मालूम होगा।

चर्मरोग के लिये टेसू और नीबू
टेसू के फूल को सुखाकर चूर्ण बना लें। इसे नीबू के रस में मिलाकर लगाने से हर प्रकार के चर्मरोग में लाभ होता है।

माइग्रेन के लिये काली मिर्च, हल्दी और दूध
एक बड़ा चम्मच काली मिर्च का चूर्ण एक चुटकी हल्दी के साथ एक प्याले दूध में उबालें। दो तीन दिन तक लगातार रहें। माइग्रेन के दर्द में आराम मिलेगा।

गले में खराश के लिये जीरा
एक गिलास उबलते पानी में एक चम्मच जीरा और एक टुकड़ा अदरक डालें ५ मिनट तक उबलने दें। इसे ठंडा होने दें। हल्का गुनगुना दिन में दो बार पियें। गले की खराश और सर्दी दोनों में लाभ होगा।
सर्दी जुकाम के लिये दालचीनी और शहद
एक ग्राम पिसी दालचीनी में एक चाय का चम्मच शहद मिलाकर खाने से सर्दी जुकाम में आराम मिलता है।

टांसिल्स के लिये हल्दी और दूध
एक प्याला (२०० मिलीली.) दूध में आधा छोटा चम्मच (२ ग्राम) पिसी हल्दी मिलाकर उबालें। छानकर चीनी मिलाकर पीने को दें। विशेषरूप से सोते समय पीने पर तीन चार दिन में आराम मिल जाता है। रात में इसे पीने के बात मुँह साफ करना चाहिये लेकिन कुछ खाना पीना नहीं चाहिये।

मधुमेह के लिये आँवला और करेला
एक प्याला करेले के रस में एक बड़ा चम्मच आँवले का रस मिलाकर रोज पीने से दो महीने में मधुमेह के कष्टों से आराम मिल जाता है।

मधुमेह के लिये कालीचाय-
मधुमेह में सुबह खाली पेट एक प्याला काली चाय स्वास्थ्यवर्धक होती है। चाय में चीनी दूध या नीबू नहीं मिलाना चाहिये। यह गुर्दे की कार्यप्रणाली को लाभ पहुँचाती है जिससे मधुमेह में भी लाभ पहुँचता है।

माइग्रेन और सिरदर्द के लिये सेब-
सिरदर्द और माइग्रेन से परेशान हों तो सुबह खाली पेट एक सेब नमक लगाकर खाएँ इससे आराम आ जाएगा।

अपच के लिये चटनी-
खट्टी डकारें, गैस बनना, पेट फूलना, भूक न लगना इनमें से किसी चीज से परेशान हैं तो सिरके में प्याज और अदरक पीस कर चटनी बनाएँ इस चटनी में काला नमक डालें। एक सप्ताह तक प्रतिदिन भोजन के साथ लें, आराम आ जाएगा।

उच्च रक्तचाप के लिये मेथी
सुबह उठकर खाली पेट आठ-दस मेथी के दाने निगल लेने से उच्चरक्त चाप को नियंत्रित करने में सफलता मिलती है।

कोलेस्ट्राल पर नियंत्रण सुपारी से
भोजन के बाद कच्ची सुपारी २० से ४० मिनट तक चबाएँ फिर मुँह साफ़ कर लें। सुपारी का रस लार के साथ मिलकर रक्त को पतला करने जैसा काम करता है। जिससे कोलेस्ट्राल में गिरावट आती है और रक्तचाप भी कम हो जाता है।

जलन की चिकित्सा चावल से
कच्चे चावल के ८-१० दाने सुबह खाली पेट पानी से निगल लें। २१ दिन तक नियमित ऐसा करने से पेट और सीन की जलन में आराम आएगा। तीन माह में यह पूरी तरह ठीक हो जाएगी।

दाँतों के कष्ट में तिल का उपयोग
तिल को पानी में ४ घंटे भिगो दें फिर छान कर उसी पानी से मुँह को भरें और १० मिनट बाद उगल दें। चार पाँच बार इसी तरह कुल्ला करे, मुँह के घाव, दाँत में सड़न के कारण होने वाले संक्रमण और पायरिया से मुक्ति मिलती है।

विष से मुक्ति
१०-१० ग्राम हल्दी, सेंधा नमक और शहद तथा ५ ग्राम देसी घी अच्छी तरह मिला लें। इसे खाने से कुत्ते, साँप, बिच्छु, मेढक, गिरगिट, आदि जहरीले जानवरों का विष उतर जाता है।   स्वस्थ त्वचा का घरेलू नुस्खा
नमक, हल्दी और मेथी तीनों को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें, नहाने से पाँच मिनट पहले पानी मिलाकर इनका उबटन बना लें। इसे साबुन की तरह पूरे शरीर में लगाएँ और ५ मिनट बाद नहा लें। सप्ताह में एक बार प्रयोग करने से घमौरियों, फुंसियों तथा त्वचा की सभी बीमारियों से मुक्ति मिलती है। साथ ही त्वचा मुलायम और चमकदार भी हो जाती है।

ल्यूकोरिया से मुक्ति
ल्यूकोरिया नामक रोग कमजोरी, चिडचिडापन, के साथ चेहरे की चमक उड़ा ले जाता हैं। इससे बचने का एक आसान सा उपाय- एक-एक पका केला सुबह और शाम को पूरे एक छोटे चम्मच देशी घी के साथ खा जाएँ ११-१२ दिनों में आराम दिखाई देगा। इस प्रयोग को २१ दिनों तक जारी रखना चाहिए।

खाँसी में प्याज
अगर बच्चों या बुजुर्गों को खांसी के साथ कफ ज्यादा गिर रहा हो तो एक चम्मच प्याज के रस को चीनी या गुड मिलाकर चटा दें, दिन में तीन चार बार ऐसा करने पर खाँसी से तुरंत आराम मिलता है।

पेट साफ रखे अमरूद-
कब्ज से परेशान हों तो शाम को चार बजे कम से कम २०० ग्राम अमरुद नमक लगाकर खा जाएँ, फायदा अगली सुबह से ही नज़र आने लगेगा। १० दिन लगातार खाने से पुराने कब्ज में लाभ होगा। बाद में जब आवश्यकता महसूस हो तब खाएँ।

बीज पपीते के स्वास्थ्य हमारा
पके पपीते के बीजों को खूब चबा-चबा कर खाने से आँखों की रोशनी बढ़ती है। इन बीजों को सुखा कर पावडर बना कर भी रखा जा सकता है। सप्ताह में एक बार एक चम्मच पावडर पानी से फाँक लेन पर अनेक प्रकार के रोगाणुओं से रक्षा होती है। 

मुलेठी पेप्टिक अलसर के लिये-
मुलेठी के बारे में तो सभी जानते हैं। यह आसानी से बाजार में भी मिल जाती है। पेप्टिक अल्सर में मुलेठी का चूर्ण अमृत की तरह काम करता है। बस सुबह शाम आधा चाय का चम्मच पानी से निगल जाएँ। यह मुलेठी का चूर्ण आँखों की शक्ति भी बढ़ाता है। आँखों के लिये इसे सुबह आधे चम्मच से थोड़ा सा अधिक पानी के साथ लेना चाहिये।

भोजन से पहले अदरक-
भोजन करने से दस मिनट पहले अदरक के छोटे से टुकडे को सेंधा नमक में लपेट कर [थोड़ा ज्यादा मात्रा में ] अच्छी तरह से चबा लें। दिन में दो बार इसे अपने भोजन का आवश्यक अंग बना लें, इससे हृदय मजबूत और स्वस्थ बना रहेगा, दिल से सम्बंधित कोई बीमारी नहीं होगी और निराशा व अवसाद से भी मुक्ति मिल जाएगी।

मुहाँसों से मुक्ति-
जायफल, काली मिर्च और लाल चन्दन तीनो का पावडर बराबर मात्रा में मिलाकर रख लें। रोज सोने से पहले २-३ चुटकी भर के पावडर हथेली पर लेकर उसमें इतना पानी मिलाए कि उबटन जैसा बन जाए खूब मिलाएँ और फिर उसे चेहरे पर लगा लें और सो जाएँ, सुबह उठकर सादे पानी से चेहरा धो लें। १५ दिन तक यह काम करें। इसी के साथ प्रतिदिन २५० ग्राम मूली खाएँ ताकि रक्त शुद्ध हो जाए और अन्दर से त्वचा को स्वस्थ पोषण मिले। १५- २० दिन में मुहाँसों से मुक्त होकर त्वचा निखर जाएगी।

सरसों का तेल केवल पाँच दिन-
रात में सोते समय दोनों नाक में दो दो बूँद सरसों का तेल पाँच दिनों तक लगातार डालें तो खाँसी-सर्दी और साँस की बीमारियाँ दूर हो जाएँगी। सर्दियों में नाक बंद हो जाने के दुख से मुक्ति मिलेगी और शरीर में हल्कापन मालूम होगा।

अजवायन का साप्ताहिक प्रयोग-
सुबह खाली पेट सप्ताह में एक बार एक चाय का चम्मच अजवायन मुँह में रखें और पानी से निगल लें। चबाएँ नहीं। यह सर्दी, खाँसी, जुकाम, बदनदर्द, कमर-दर्द, पेटदर्द, कब्जियत और घुटनों के दर्द से दूर रखेगा। १० साल से नीचे के बच्चों को आधा चम्मच २ ग्राम और १० से ऊपर सभी को एक चम्मच यानी ५ ग्राम लेना चाहिए।