*सोयाबीन*
को पचा पाने की शक्ति शूकर (pig ) में ही होती है। इसका उपयोग पश्चिमी देशों में शुकर को मोटा करने के लिए किया जाता है ताकि उसका क़त्ल करने के बाद पोर्क मांस पर्याप्त प्राप्त हो ।
हमारे कुछ राजनेताओ ने सोयाबीन को बहुत प्रोत्साहित किया ताकि हमारे देश के लोग मेहनत करे, हमारी जमीन, पानी , श्रम का उपयोग हो और पूरी पश्चिमी दुनिया को सस्ते दर मुर्ख भारतीय द्वारा उत्पन्न सस्ती दर पर पश्चिमी शुकर के लिये आहार प्राप्त हो।
सोयाबीन का जटिल प्रोटीन मनुष्य नहीं पचा सकता , जिससे धीरे धीरे किडनी खराब होने लगती है। स्वयं को आधुनिक सिद्ध करने की कोशिश में लगे मुर्ख लोग ही ऐसे प्रपंचो में फसते जाते है।
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