Thursday, 26 January 2017

मस्से का आयुर्वेदिक इलाज / warts ayurvedic treatment

त्वचा पर पेपीलोमा वायरस के कारण छोटे, खुरदुरे कठोर पिंड बन जाते हैं जिसे मस्सा (Warts) कहते हैं। मस्से काले और भूरे रंग के होते हैं। मस्से 8 से 12 प्रकार के होते हैं।
मस्से को काटने और फो़डने के कारण मस्से का वायरस शरीर के अन्य हिस्सों में भी चला जाता है जिसके कारण मस्से हो जाते हैं। कभी कभी मस्से का वायरस एक आदमी से दूसरे आदमी की त्वचा पर आकर मस्सा बना देते हैं।

आइए मस्सों से बचने के लिए घरेलू उपचार के बारे में जानते हैं :
1.मस्से को समाप्त करने के लिए प्याज फायदेमंद होता है। एक प्याज को लेकर उसके रस को दिन में एक बार नियमित रूप से लगाने से मस्से समाप्त हो जाते हैं।
2.आलू का प्रयोग करने से मस्से समाप्त होते हैं। आलू को छीलकर काट लीजिए, उसके कटे हुए हिस्से को मस्सों पर रगडिए, ऎसा करने से कुछ दिनों में मस्से समाप्त हो जाते हैं।
3.लहसुन की कली को छील लीजिए, उसके बाद उसे काटकर मस्सों पर रगडिए, कुछ दिन बाद मस्से सूखकर झड जाएंगे।
4.बेकिंग सोडा और अरंडी के तेल (castor oil) को रात में मस्सों लगाकर सो जाइए, ऎसा करने से मस्से धीरे-धीरे समाप्त हो जाते हैं।

कुछ उपयोगी बातें:
1.मस्से को कभी भी काटना व जलाना नहीं चाहिए, क्योंकि इससे रोग गम्भीर हो सकता है।
2.अधिक उम्र में मस्से निकलने पर चिकित्सक से जांच कराना जरूरी है।
3.स्किन को धूप से बचाएं और धूप में निकलने से पहले सनस्क्रीन लोशन लगाना न भूलें।
4.यदि मस्से अपने आप नरम हो जाएं, उनके आकार में परिवर्तन हो जाए, उनमें खुजली हो या उससे स्त्रव होने लगे तो तुरन्त चिकित्सक से सलाह लेकर उपचार कराएं, क्योंकि यह मीलानोमा या कैंसर भी हो सकता है।

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